हाँ मैं झारखण्ड हूँ

मैं अपनी विशेषता के लिए जाना जाता है। हमारा देश अपनी सभ्यता एवं संस्कृति के लिए पुरे संसार में विख्यात है। हमारा भारत देश अपने यहाँ होने वाले पूजा – पाठ , पर्व के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है , अलग – अलग धर्म के लोग यहाँ निवास करते हैं , जहाँ आस्थानुसार लोगों के द्वारा अनेक देवी – देवताओं की पूजा की जाती है। हमारे देश में 29 राज्य हैं , हर राज्य में वहां के पर्व विशेष महत्वा रखते हैं। जैसे महाराष्ट्र का गणेश पूजा पुरे भारत में सबसे उम्दा माना जाता है। उसी तरह पुरे भारत में दुर्गा पूजा – काली पूजा मनाया जाता […]

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भारतीय मंदिर, जो कभी दिखता है तो कभी गायब हो जाता है

यह बताने की जरूरत नहीं है कि भारत एक प्राचीनतम सभ्यता वाला सांस्कृतिक देश हैं. यह विश्व के उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं. यहां की भगौलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं. वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है तो वह हैं भारत की प्राचीनतम मंदिर. मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं. इनमें से कई मंदिर […]

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हिन्दी के ही एफएम चैनल कर रहे हैं हिन्दी का बेड़ा गर्क :राहुल देव

‘वर्तमान में मीडिया में हिंदी की जो स्थिति है, वह लंगड़ी, लूली और अपाहिज भाषा सी है। इसका असर यह होगा कि जो लोग भाषाई अपाहिज हैं, वे आगे चलकर बौद्धिक अपाहिज हो जाएंगे। यह हिंदी की दैनिक हत्या जैसा है। कोई भी स्वाभिमान समाज ऐसा नहीं करता, जैसा हमारे यहां हो रहा है।’ यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव का। वे हाल ही में भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे, जिसका विषय था ‘मीडिया की भूमिका: भाषा सीखना या सिखाना’। अपने संबोधन […]

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द नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया की मीडिया फेलोशिप का डेडलाइन 30 दिसंबर

द नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया (NFI) युवा कार्यरत पत्रकारों के लिए एक मीडिया फेलोशिप कार्यक्रम संचालित करता है। इस वर्ष प्रिंट के दस पत्रकारों को फेलोशिप से सम्‍मानित किया जाएगा। जिसके अंतर्गत उन्‍हें विभिन्‍न विषयों के आधार पर भारत में व्‍यापक सामाजिक विकास के मुद्दों पर शोध कर लेखन करना होगा। किसी भी क्षेत्रीय तथा राष्‍ट्रीय दैनिक तथा संबंधित मीडिया के पत्रकारों के लिए फेलोशिप खुली है। फ्रीलॉन्‍सर पत्रकारों को भी आवेदन करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है। आवदेन करने के लिए प्रारंभिक से मध्‍य कॅरियर में पदस्‍थ पत्रकार तथा पांच से सात साल का व्‍यावसायिक अनुभव होना चाहिए। इसके […]

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अश्लील चुटकुलों से अजीज, अब शुगली-जुगली के नाम से जाने जाएंगे संता बंता

मशहूर कॉमेडियन संता-बंता ने अपना नाम बदल लिया है और अब उन्हें नए नाम शुगली-जुगली से जाने जाएंगे। संता-बंता पिछले 18 वर्षो से इसी नाम से कॉमेडी प्रोग्राम करते आ रहे थे लेकिन उनके नाम पर बन रहे अश्लील चुटकुलों से आहत होकर उन्होंने अपना नाम बदलने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि संता-बंता का नाम लेकर लोगों की ओर से सिख समुदाय को टारगेट कर उनका मजाक बनाया जाता था। इससे सिख समाज खासतौर पर आहत हो रहा था। उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती थी। संता बंता ने कहा कि कोई भी अश्लील चुटकुले के दौरान लोगों के […]

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प्रधानमंत्री जी के नाम एक दुखियारी भैंस का खुला ख़त

माननीय प्रधानमंत्री जी, सबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मैं ना आज़म खां की भैंस हूं और ना लालू यादव की ! ना मैं कभी रामपुर गयी, ना पटना! मेरा उनकी भैंसों से दूर-दूर का नाता नहीं। यह सब मैं इसलिये बता रही हूं कि कहीं आप मुझे विरोधी पक्ष की भैंस न समझे लें। मैं तो भारत के करोड़ों इंसानों की तरह आपकी बहुत बड़ी फ़ैन हूं। जब आपकी सरकार बनी तो जानवरों में सबसे ज़्यादा ख़ुशी हम भैंसों को ही हुई थी। हमें लगा कि ‘अच्छे दिन’ सबसे पहले हमारे ही आएंगे। लेकिन हुआ एकदम उल्टा! […]

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मैं ही सबका पूर्वज हूं, मैं आदिवासी हूं।

हम है आदिवासी मैं पृथ्वी का पहला इंसान, मैं किसी ॠषि का अवैध संतान नहीं हूँ, ना महाभारत युद्ध के भगोड़े विधवाओं का पुत्र, बल्कि मैं ही सबका पूर्वज हूँ, मैं आदिवासी हूँ। मैं गंवार नहीं हूँ, ना ही मैं अनपढ़ हूँ, प्रकृति की भाषा समझने वाला का मैं एकमात्र हूँ, मैं आदिवासी हूँ। ना ही धर्म परिवर्तन के डर से पहाड़ों में छिपा हुआ, बल्कि निस्वार्थ अपने तीरों के दम से प्रताप और शिवाजी को मैं राज्य दिलाने वाला हूँ, मैं आदिवासी हूँ। ना मैंने अंग्रेजों की चमचागिरी की, ना जांलियावाला में अपनों पर गोलियां बरसाने वाला हूँ, बल्कि संथाल […]

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देश के तीन और साहित्यकारों ने लौटाये अपने सम्मान

कश्मीरी लेखक और कवि गुलाम नबी खयाल भी साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने यह कहते हुए सम्मान लौटाने का ऐलान किया कि आज देश में अल्पसंख्यक असुरक्षित और खतरा महसूस करते हैं। उनके साथ ही मध्यप्रदेश के जाने-माने कवि और लेखक राजेश जोशी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों के विरोध में साहित्य सम्मान लौटाने का फैसला लिया है। खयाल ने सोमवार को समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘मैंने पुरस्कार लौटाने का फैसला किया है। देश में अल्पसंख्यक असुरक्षित और खतरा महसूस कर रहे हैं। उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय लग रहा है।’’ […]

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आंखों देखी फांसीः एक रिपोर्टर के रोमांचक अनुभव का दस्तावेज

राजनामा.कॉम। किसी पत्रकार के लिये यह अनुभव बिरला है तो संभवत: हिन्दी पत्रकारिता में यह दुर्लभ रिपोर्टिंग।  लगभग पैंतीस वर्ष बाद एक दुर्लभ रिपोर्टिंग जब किताब के रूप में पाठकों के हाथ में आती है तो पीढिय़ों का अंतर आ चुका होता है। बावजूद इसके रोमांच उतना ही बना हुआ होता है जितना कि पैंतीस साल पहले। एक रिपोर्टर के रोमांचक अनुभव का दस्तावेज के रूप में प्रकाशित किताब ‘आंखों देखी फांसी’ हिन्दी पत्रकारिता को समृद्ध बनाती है । देश के ख्यातनाम पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक के रूप में स्थापित श्री गिरिजाशंकर की बहुप्रतीक्षित किताब का विमोचन भोपाल में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री […]

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आलोक श्रीवास्तव को ‘राष्ट्रीय दुष्यंत कुमार अलंकरण’ सम्मान

जाने-माने युवा कवि, लेखक और टीवी पत्रकार आलोक श्रीवास्तव को साल 2014 के ‘राष्ट्रीय दुष्यंत कुमार अलंकरण’ से सम्मानित किया जाएगा। दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय, भोपाल की ओर से हर साल दिए जाने वाले इस प्रतिष्ठित अलंकरण की घोषणा 17 मार्च को भोपाल में की गई। साल 1998 में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित यह अलंकरण पहली बार दुष्यंत के ही तेवर के शायर अदम गोंडवी को दिया गया था। तब से अब तक अनेक ख्यातनाम साहित्यकारों को यह प्रतिष्ठित अलंकरण दिया जा चुका है, जिनमें डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, लीलाधर मंडलोई, निदा फाज़ली, अशोक चक्रधर, चित्रा मुद्गल, राजेश जोशी, मृणाल पाण्डेय […]

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भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर बिहार के सीएम की कविता

भूमि अधिग्रहण क़ानून में संशोधन के विरोध में एक दिन का उपवासः किसानों को दिखाए सब्ज़ बाग़ और खूब किया प्रचार। अच्छे दिन हम लाएंगे बस बना दो सरकार। किसानों के वोट से और पूंजीपतियों के नोट से। भाजपा की सरकार बनी 31 प्रतिशत सपोर्ट से। जीत में इतना फूल गए कि सारे वादे भूल गए। पूँजीपतियों के वारे न्यारे करने में मशगूल भए। कोर्पोरेट को लुभाने को पूंजीपतियों को रिझाने को। मोदी सरकार अध्यादेश लाई किसान की ज़मीन हथियाने को। चारो तरफ जब हुआ शोर सब चिल्लाते चोर चोर। भागे अध्यादेश छोड़ डरकर आए संसद की ओर। जब लोकसभा में […]

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पत्रकारिता से मुश्किल काम है राजनीति :आशुतोष

“राजधर्म केवल शासकों का नहीं होता। हर नागरिक के कुछ राजधर्म होते हैं। हर कोई अगर ईमानदारी से अपना राजधर्म निभाए तो देश आगे बढ़ेगा। राजनीति पत्रकारिता से ज्यादा मुश्किल होती है।” इस तरह के विचार वरिष्ठ पत्रकार और आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष की पुस्तक ‘मुखौटे का राजधर्म’ के विमोचन के मौके पर व्यक्त किए गए। किताब में आशुतोष द्वारा अलग-अलग समाचार पत्रों में लिखे गए लेखों का संकलन किया गया है। हिन्दी के प्रख्यात आलोचक प्रो. नामवर सिंह व हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने आशुतोष की पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक मेले के हॉल संख्या आठ […]

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