सुरेन्द्र शर्मा की हास्य होली के निशाने पर यूं रहे नामी हस्तियां

धौनी पर धमाल हम क्रिकेटवालों की एक ही नियति है जीत गए तो सिर पर बैठाएंगे हार गए तो जूता दिखाएंगे यह मीडियावाले भी कम नहीं हैं जीत गए तो रंगारंग कार्यक्रम बनाएंगे हार गए तो हमारे क्रियाकर्म का सामान जुटाएंगे हम हारते हैं या जीतते हैं, हम देश के लिए खेलते हैं खेल कोई युद्ध नहीं, खेल भावना से लीजिए हमारे चेहरे पर गुलाल लगाइए, कालिख मत पोतिए। लपेट में लालू हम मथुरा के नहीं, बिहार के यदुवंशी हैं माखन चुराते हैं, रास रचाते हैं कोई हमें छोटा समझे, तो मुंह खोल उसे ब्रह्मांड दिखाते हैं गुजरात वाले रखते होंगे […]

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नारी की बद्दतर हालत का सबसे बड़ा कारण है लिंग भेद

नारी शक्ति और महिलाओं के उत्थान के लिए वर्षों से लिखा जाता रहा है / बोला जाता रहा है। पर सचाई यह है की नारी की स्तिथि आज भी बेहतर नहीं हो पायी है। इसका सबसे बड़ा कारण लिंग भेद है। और जब तक बेटा – बेटी में फर्क किया जाता रहेगा न ही भ्रूण हत्या रुकेगी और न ही हमारा देश विकाश की और बढ़ेगी। आज की नारी बहुत ही दृढ इक्षा शक्ति के साथ पहले की अपेक्षा आगे बढ़ी हैं , पर पहले भी नारी की आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं थी। इस बात का उदाहरण ” झांसी की रानी ” जिसके […]

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” झारखण्डी नृत्य की विविधता , उराँव जनजाति की महत्ता के साथ “

भारत के मानचित्र में अंकित ऐतिहासिक क्षेत्र छत्तीसगढ़  एवं झारखण्ड आदिवासीयों के निवास के लिए काफी प्रसिद्ध है। झारखण्ड क्षेत्र की अपनी ऐतिहासिक भौगोलिक और संस्कृति की पहचान तो है ही ये अन्य जनजातियों की भाँति आत्मवाद में विश्वास करते हैं, तथा सबसे बड़ा देवता आत्मा है जिसे ये धर्मेश कहते हैं । झारखण्ड क्षेत्र की प्राचीन अस्मिता को दर्शाने वाले पौराणिक श्लोकों से हमें इसकी पहचान का आभास मिलता है । “उराँव” झारखण्ड की दूसरी बड़ी  जनजाति है जो बिहार , प. बंगाल , उङीसा मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ , आसम एवं अंडमान निकोबार राज्य में पाई जाती है । झारखण्ड में […]

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हाँ मैं झारखण्ड हूँ

मैं अपनी विशेषता के लिए जाना जाता है। हमारा देश अपनी सभ्यता एवं संस्कृति के लिए पुरे संसार में विख्यात है। हमारा भारत देश अपने यहाँ होने वाले पूजा – पाठ , पर्व के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है , अलग – अलग धर्म के लोग यहाँ निवास करते हैं , जहाँ आस्थानुसार लोगों के द्वारा अनेक देवी – देवताओं की पूजा की जाती है। हमारे देश में 29 राज्य हैं , हर राज्य में वहां के पर्व विशेष महत्वा रखते हैं। जैसे महाराष्ट्र का गणेश पूजा पुरे भारत में सबसे उम्दा माना जाता है। उसी तरह पुरे भारत में दुर्गा पूजा – काली पूजा मनाया जाता […]

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भारतीय मंदिर, जो कभी दिखता है तो कभी गायब हो जाता है

यह बताने की जरूरत नहीं है कि भारत एक प्राचीनतम सभ्यता वाला सांस्कृतिक देश हैं. यह विश्व के उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं. यहां की भगौलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं. वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है तो वह हैं भारत की प्राचीनतम मंदिर. मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं. इनमें से कई मंदिर […]

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हिन्दी के ही एफएम चैनल कर रहे हैं हिन्दी का बेड़ा गर्क :राहुल देव

‘वर्तमान में मीडिया में हिंदी की जो स्थिति है, वह लंगड़ी, लूली और अपाहिज भाषा सी है। इसका असर यह होगा कि जो लोग भाषाई अपाहिज हैं, वे आगे चलकर बौद्धिक अपाहिज हो जाएंगे। यह हिंदी की दैनिक हत्या जैसा है। कोई भी स्वाभिमान समाज ऐसा नहीं करता, जैसा हमारे यहां हो रहा है।’ यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव का। वे हाल ही में भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर बोल रहे थे, जिसका विषय था ‘मीडिया की भूमिका: भाषा सीखना या सिखाना’। अपने संबोधन […]

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द नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया की मीडिया फेलोशिप का डेडलाइन 30 दिसंबर

द नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया (NFI) युवा कार्यरत पत्रकारों के लिए एक मीडिया फेलोशिप कार्यक्रम संचालित करता है। इस वर्ष प्रिंट के दस पत्रकारों को फेलोशिप से सम्‍मानित किया जाएगा। जिसके अंतर्गत उन्‍हें विभिन्‍न विषयों के आधार पर भारत में व्‍यापक सामाजिक विकास के मुद्दों पर शोध कर लेखन करना होगा। किसी भी क्षेत्रीय तथा राष्‍ट्रीय दैनिक तथा संबंधित मीडिया के पत्रकारों के लिए फेलोशिप खुली है। फ्रीलॉन्‍सर पत्रकारों को भी आवेदन करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाता है। आवदेन करने के लिए प्रारंभिक से मध्‍य कॅरियर में पदस्‍थ पत्रकार तथा पांच से सात साल का व्‍यावसायिक अनुभव होना चाहिए। इसके […]

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अश्लील चुटकुलों से अजीज, अब शुगली-जुगली के नाम से जाने जाएंगे संता बंता

मशहूर कॉमेडियन संता-बंता ने अपना नाम बदल लिया है और अब उन्हें नए नाम शुगली-जुगली से जाने जाएंगे। संता-बंता पिछले 18 वर्षो से इसी नाम से कॉमेडी प्रोग्राम करते आ रहे थे लेकिन उनके नाम पर बन रहे अश्लील चुटकुलों से आहत होकर उन्होंने अपना नाम बदलने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि संता-बंता का नाम लेकर लोगों की ओर से सिख समुदाय को टारगेट कर उनका मजाक बनाया जाता था। इससे सिख समाज खासतौर पर आहत हो रहा था। उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती थी। संता बंता ने कहा कि कोई भी अश्लील चुटकुले के दौरान लोगों के […]

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प्रधानमंत्री जी के नाम एक दुखियारी भैंस का खुला ख़त

माननीय प्रधानमंत्री जी, सबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मैं ना आज़म खां की भैंस हूं और ना लालू यादव की ! ना मैं कभी रामपुर गयी, ना पटना! मेरा उनकी भैंसों से दूर-दूर का नाता नहीं। यह सब मैं इसलिये बता रही हूं कि कहीं आप मुझे विरोधी पक्ष की भैंस न समझे लें। मैं तो भारत के करोड़ों इंसानों की तरह आपकी बहुत बड़ी फ़ैन हूं। जब आपकी सरकार बनी तो जानवरों में सबसे ज़्यादा ख़ुशी हम भैंसों को ही हुई थी। हमें लगा कि ‘अच्छे दिन’ सबसे पहले हमारे ही आएंगे। लेकिन हुआ एकदम उल्टा! […]

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मैं ही सबका पूर्वज हूं, मैं आदिवासी हूं।

हम है आदिवासी मैं पृथ्वी का पहला इंसान, मैं किसी ॠषि का अवैध संतान नहीं हूँ, ना महाभारत युद्ध के भगोड़े विधवाओं का पुत्र, बल्कि मैं ही सबका पूर्वज हूँ, मैं आदिवासी हूँ। मैं गंवार नहीं हूँ, ना ही मैं अनपढ़ हूँ, प्रकृति की भाषा समझने वाला का मैं एकमात्र हूँ, मैं आदिवासी हूँ। ना ही धर्म परिवर्तन के डर से पहाड़ों में छिपा हुआ, बल्कि निस्वार्थ अपने तीरों के दम से प्रताप और शिवाजी को मैं राज्य दिलाने वाला हूँ, मैं आदिवासी हूँ। ना मैंने अंग्रेजों की चमचागिरी की, ना जांलियावाला में अपनों पर गोलियां बरसाने वाला हूँ, बल्कि संथाल […]

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