सुरेन्द्र कुमार सिंह चांस की कविताः एक गीत समाज के अंतिम के लिए

तोड़के तारे लाया हूँ तुम गुमसुम गुमसुम बैठे हो एक बार ही बोलो ना तेरे लिए लाऊँ क्या। माना बहुत सताये हो दुनिया से ठुकराये हो हंसी ख़ुशी मुस्कान दिल्लगी सब कुछ गवां के आये हो पर इतना ही क्या कम है कितना सुंदर जीवन है मैं भी इस पर रीझ गया अपनी दुनिया भूल गया आशा ढूंढ़ के लाया हूँ तुम उलझे उलझे बैठे हो एक बार ही बोलो ना.. चलो तो हम भी चलते हैं तूफानों से लड़ते हैं अँधेरे के इस जंगल में एक दिया बन जलते हैं उठो तो वादा करते है बात पते की करते है […]

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स्वतंत्र लेखक मंच का 27 वां वार्षिक साहित्योत्सव आज

नई दिल्ली। अखिल भारतीय स्वतंत्र लेखक मंच का 27 वां वार्षिक साहित्योत्सव विगत महाधिवेशन की भांति इस वर्ष का साहित्योत्सव संत रविदास ,स्वामी दयानंद सरस्वती, वीर शिवाजी, रामकृष्ण परमहंस और सरोजिनी नायडू की जयंती के रुप में बड़े ही भव्य रूप से मनाया जायेगा। आगामी 19 फरवरी 2017 नव हिंद पब्लिक स्कूल गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल सभागार न्यू रोहतक रोड करोल बाग मैं एक दिवसीय समारोह के उद्घाटन पूर्व राज्यपाल डॉ भीष्म नारायण करेंगे। मुख्य अतिथि डॉ.जी.वी.जी.कृष्णमूर्ति इमरान हुसैन खाद्य आपूर्ति मंत्री दिल्ली सरकार रविंद्र गुप्ता पूर्व महापौर उत्तरी दिल्ली विशेष रवि विधायक दिल्ली सरकार  संजीव झा विधायक दिल्ली सरकार अतिथि […]

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लुआठी’ के सम्पादक ‘आकाश खूंटी’ को मिला ‘श्रीनिवास पानुरी स्मृति सम्मान’

धनबाद। खोरठा साहित्य में उल्लेखनीय योगदान केलिए खोरठा पत्रिका ‘लुआठी’ के सम्पादक गिरिधारी गोस्वामी ‘आकाश खूंटी’ को खोरठा कवि श्रीनिवास पानुरी की 96वीं जयंती पर धनबाद की साहित्यिक संस्था ‘खोरठा साहित्य विकास मंच’ एवं ‘उमा फिल्म प्रोड्क्शन’ कतरास के सौजन्य से ‘श्रीनिवास पानुरी स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान पानुरी जयंती पर कल बरवा अड्डा में आयोजित भव्य साहित्यक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री मथुरा प्रसाद महतो के हाथों दिया गया। इन्होने चालीस पृष्ठों की ‘लुआठी’ का ‘पानुरी स्मृति अंक’ के साथ उनके प्रतिनिधि कविताओं का सम्पादन कर ‘सबले बीस’ एवं उनकी चालीस साल पुरानी नाटक ‘चाबी […]

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पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक-पत्रकार सुरेन्द्र प्रसाद तरुण का निधन

पटना। बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं पत्रकार सुरेन्द्र प्रसाद तरुण का लंबी बीमारी के बाद बीती रात्रि निधन हो गया। वह 88 के थे। दिवंगत तरुण ने बीती रात रात पटना मेडिकल कालेज अस्पताल में अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके निधन पर गहरी शोक व्यक्त करते हुए उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराए जाने की घोषणा की है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि सुरेंद्र प्रसाद तरूण एक प्रख्यात राजनेता एवं प्रसिद्ध समाजसेवी थे। उनके निधन से न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक क्षेत्रों में भी अपूरणीय क्षति हुयी है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की […]

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देशभक्ति की चेतना जगाएगा राष्ट्र गान

– डॉ नीलम महेंद्र- हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है और चूँकि हम लोग अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति बेहद जागरूक हैं और हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हासिल है तो हम हर मुद्दे पर अपनी अपनी प्रतिक्रिया देते हैं और किसी भी फैसले अथवा वक्तव्य को विवाद बना देते हैं , यही हमारे समाज की विशेषता बन गई है। किसी सभ्य समाज को अगर यह महसूस होने लगे कि उसके देश का राष्ट्र गान उस पर थोपा जा रहा है और इसके विरोध में स्वर उठने लगें तो यह उस देश के भविष्य के लिए वाकई चिंताजनक विषय है। राष्ट्र गान […]

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काले धन की काली लड़ाई, राम दुहाई राम दुहाई

विचाराधीन या बेचारा अधीन ? इस बार भी हुआ जेल ब्रेक / भागे कैदी पर उन्हें महज कैदी कहा गया. दाढ़ी थी इनके भी, उनसे थोड़ी लम्बी भी मगर नहीं कहे गये, इस बार ये आतंकी. थोड़े सांस्कृतिक राष्ट्रवादी टाईप के थे. इसलिये पकड़ लिये गये जिन्दा वर्ना मारे जाते भोपालवालों की तरह. वैसे तो आतंक का कोई धर्म नहीं होता. धर्म का जरूर आतंक हो सकता है.   एनकाउन्टर  जेल से उठाओ भगाओ और भून दो फिर फैंक आओ लो गया एनकाउन्टर ! कुछ सिरफिरे कहेंगे इसको फेक उठायेंगे सवाल मांगेंगे तो दे देना प्लेटों के खंजर और लकड़ी की चाबी […]

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‘मुंशिया के पापा’

दो औरतें आपस में अपने घर के सामने खड़ी होकर बतिया रही थीं। शाम को धुंधलका था- शक्ल तो नहीं देख सका अलबत्ता उनके मुख उच्चारण उपरान्त निकले शब्दों का श्रवण स्वान सदृश तीव्र कर्णों से किया था। बड़ा आनन्द आया। मुझे लगा कि इनसे बड़ा कोई आलोचक नहीं हो सकता। वह क्या कह रही थी जब आप पढ़ेंगे तो आप को भी आनन्द की अनुभूति होगी। वह जो आदमी जा रहा है, उसे मैं अपने मोहल्ले में पिछले 40 सालों से देख रही हूँ। इस मोहल्ले में यह ऐसा आदमी है जिसने हमारी बहू-बेटियों की तरफ मुँह करके नहीं देखा […]

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 जलना चाहता हूँ मैं तो बनकर इक दिया,देखो अँधेरा जग में कहीं अब रह न जाये

नई ज्योति के संग झिलमिल करके दिल में अपने उम्मीदों के रंग भरके, करूँ रौशनी मैं तो झम झम यार निशा की गली में यूँ तम खो जाये जैसे तिमिर को कोई जुगनू खा जाये हो बाती का मुझसे प्यार ऐसा मेरे प्यार में झूमे संसार ऐसा रौशनी संसार को इतनी दूंगा मैं उषा जा न पाए, निशा आ ना पाये मुझ दिए को कोई भुला ना पाये जलना चाहता हूँ मैं तो बनकर इक दिया देखो अँधेरा जग में कहीं अब रह न जाये अगर संसार में हैं कही मुझ बिन उदासी कोई तो होगी कही मेरी दर्श की प्यासी […]

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मैं कलम का सिपाही हूं, मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल

जला दे नफरत की आग में अपनी मानवता को कर तू अब अनमोल मैं कलम का सिपाही हूँ मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल जो चढे फाँसी पे भारत माँ की जय बोल तू ही लगा दे उनकी गर्दन का कुछ मोल चन्द्र शेखर प्यारा भगत सिंह मेरा दुलारा राणा संग जय गाये शिवाजी की हम अब लक्ष्मी बेटी के कर्म कोे वीर बेटो से तोल मैं कलम का सिपाही हूँ मेरी प्यारी कलम आज उनकी जय बोल जो अगणित दीपक बन वीर भाई ते हमारे जल गए देश खातिर तूफानों में एक किनारे, जले कई तूफानों में पर हारे […]

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सुरेन्द्र शर्मा की हास्य होली के निशाने पर यूं रहे नामी हस्तियां

धौनी पर धमाल हम क्रिकेटवालों की एक ही नियति है जीत गए तो सिर पर बैठाएंगे हार गए तो जूता दिखाएंगे यह मीडियावाले भी कम नहीं हैं जीत गए तो रंगारंग कार्यक्रम बनाएंगे हार गए तो हमारे क्रियाकर्म का सामान जुटाएंगे हम हारते हैं या जीतते हैं, हम देश के लिए खेलते हैं खेल कोई युद्ध नहीं, खेल भावना से लीजिए हमारे चेहरे पर गुलाल लगाइए, कालिख मत पोतिए। लपेट में लालू हम मथुरा के नहीं, बिहार के यदुवंशी हैं माखन चुराते हैं, रास रचाते हैं कोई हमें छोटा समझे, तो मुंह खोल उसे ब्रह्मांड दिखाते हैं गुजरात वाले रखते होंगे […]

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नारी की बद्दतर हालत का सबसे बड़ा कारण है लिंग भेद

नारी शक्ति और महिलाओं के उत्थान के लिए वर्षों से लिखा जाता रहा है / बोला जाता रहा है। पर सचाई यह है की नारी की स्तिथि आज भी बेहतर नहीं हो पायी है। इसका सबसे बड़ा कारण लिंग भेद है। और जब तक बेटा – बेटी में फर्क किया जाता रहेगा न ही भ्रूण हत्या रुकेगी और न ही हमारा देश विकाश की और बढ़ेगी। आज की नारी बहुत ही दृढ इक्षा शक्ति के साथ पहले की अपेक्षा आगे बढ़ी हैं , पर पहले भी नारी की आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं थी। इस बात का उदाहरण ” झांसी की रानी ” जिसके […]

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” झारखण्डी नृत्य की विविधता , उराँव जनजाति की महत्ता के साथ “

भारत के मानचित्र में अंकित ऐतिहासिक क्षेत्र छत्तीसगढ़  एवं झारखण्ड आदिवासीयों के निवास के लिए काफी प्रसिद्ध है। झारखण्ड क्षेत्र की अपनी ऐतिहासिक भौगोलिक और संस्कृति की पहचान तो है ही ये अन्य जनजातियों की भाँति आत्मवाद में विश्वास करते हैं, तथा सबसे बड़ा देवता आत्मा है जिसे ये धर्मेश कहते हैं । झारखण्ड क्षेत्र की प्राचीन अस्मिता को दर्शाने वाले पौराणिक श्लोकों से हमें इसकी पहचान का आभास मिलता है । “उराँव” झारखण्ड की दूसरी बड़ी  जनजाति है जो बिहार , प. बंगाल , उङीसा मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ , आसम एवं अंडमान निकोबार राज्य में पाई जाती है । झारखण्ड में […]

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