यह कैसी आजादी है,जिसमें विरोध की भी इजाजत नहीं है !

-:  प्रवीण प्रसाद  :-  जिस प्रेस की स्वतंत्रता या अभिव्यक्ति की आज़ादी की दुहाईयाँ दी जाती हैं, वह वास्तव में पत्रकारों की आज़ादी नहीं है बल्कि वह उन चैनलों/अखबारों के मालिकों की आज़ादी है. वे ही पत्रकारों की आज़ादी का दायरा और सीमा तय करते हैं. चूँकि मीडिया कंपनियों के मालिक नहीं चाहते हैं कि उनकी कंपनियों में पत्रकारों के शोषण और उत्पीडन का मामला सामने आए, इसलिए पत्रकार चाहते हुए भी इसकी रिपोर्ट नहीं कर पाते हैं. जिन अखबारों में अपवादस्वरूप कभी-कभार इसकी रिपोर्ट छपती भी है तो वह ज्यादातर आधी-अधूरी और तोडमरोड कर छपती है. उदाहरण के लिए, नेटवर्क-१८ […]

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लक्षमणपुर बाथे नरसंहारः न्याय पर उठा सबाल

राजनामा.कॉम(मुकेश भारतीय)।  बिहार के जहानाबाद जिले के लक्षमणपुर बाथे गांव में जिस नगसंहार को देश के तात्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम ने राष्ट्रीय शर्म की संज्ञा दी और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी घटना की दर्दनाक तस्वीर देखते ही रो पड़े थे, उस कुकृत्य के सारे आरोपियों को पटना हाई कोर्ट ने रिहा कर दिया है। रिहाई के इस फैसले को किसी भी दृष्टिकोण से न्याय नहीं कहा जा सकता। आरोप तो यहां तक लग रहा है कि जिस वर्गवाद और सामंतवाद की छांव में इस तरह के पशुवत व्यवहार हुये, उसकी जड़ें व्यवस्था में कितनी मजबूत है। इस महा अमानवीय घटना का […]

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पूर्व जजों की जांच के पक्ष में सीबीआइ

नई दिल्ली।  झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने टाटा स्टील से लाइसेंस के एवज में मोटी रकम मांगी, कारपोरेट दलाल नीरा राडिया टाटा मोटर्स के करार के लिए द्रमुक नेताओं से जुगत भिड़ा रही थीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज से करीबी रिश्तों के एवज में पूर्व टेलीकॉम नियंत्रक प्रदीप बैजल ने सेवानिवृत्ति के बाद ऊंचे ओहदे वाली नौकरी पाई, अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के रिलायंस कम्युनिकेशन ने दस्तावेजों में जालसाजी की। सुप्रीम कोर्ट में सीबीआइ की ओर से पेश 16 सबूतों में से ये प्रमुख हैं जो जांच एजंसी ने नीरा राडिया की टेलीफोन बातचीत के आधार पर लगाए हैं। एजंसी कारपोरेट दलाली […]

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कितना जरूरी है सोशल मीडिया पर अंकुश

इस एक लाइन के सवाल पर वैसे तो जनमत होना चाहिए। कोई एक व्यक्ति, दल या फिर खुद सरकार अपने से यह तय नहीं कर सकती कि सोशल मीडिया पर अंकुश लगाना चाहिए या नहीं। बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में उभरते इस ताकतवर मीडिया माध्यम ने जितनी तेजी से अपना विस्तार किया है उसने जनता की सबसे बड़ी जरूरत मीडिया की ताकत को उसके हाथ में दे दिया है। लेकिन जनता के हाथ की यह मीडियाई ताकत क्या खुद जनहित के खिलाफ जा रही है? उस दिन 11जुलाई को दिवंगत पत्रकार उदयन शर्मा की याद में जो लोग सोशल मीडिया के […]

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मरांडी जी ने किया था 50 करोड़ रु. माफ

उषा मार्टिन ग्रुप का झारखंड की सत्ता पर पकड़ काफी मजबूत रही है। अलग राज्य के बाद तो इस कंपनी की तूती बोलने लगी। यहां शायद ही कोई ऐसा नेता चाहे वह पक्ष हो या विपक्ष, इसके लूट के खिलाफ एक शब्द भी बोलने की हिमाकत करे। अगर किसी ने उसके खिलाफ जाने की जरा सा भी जुर्रत किया तो इस कंपनी ने उसकी ऐसी की तैसी कर डालने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। क्योंकि इस कंपनी के हाथ में है झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार का एक मीडिया हाउस। कहा जा सकता है कि मूलतः खनिज संपदा की […]

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सर्च, सीजर और रेड का पावर चाहिये :झारखंड लोकायुक्त

राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय ने झारखंड के  लोकायुक्त जस्टिस अमरेश्वर सहाय से उनके कार्यालय में कई ज्वलंत मुद्दों पर बात-चीत की। प्रस्तुत है उसके मुख्य अंशः- अगल राज्य बनने के बाद आप झारखंड को आप कहां देखते हैं ? लोकायुक्तः पिछले बारह बर्षों में झारखंड को कम से कम बारह पायदान उपर चढ़ जाना चाहिये था। लेकिन यह काफी दुर्भाग्य की बात है कि मेरी राय में यह दो पायदान ही उपर चढ़ पाया है और अभी दस पायदान नीचे है। जिस तरह से इसका विकास होला चाहिये था, वह नहीं हो पाया है। यहां संसाधनों की कमी भी नहीं है […]

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पर्यावरण को यूँ नष्ट कर रहे हैं खनन माफिया

 राजधानी राँची प्रक्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर सुसज्जित पहाड़ियों तथा मनोरम वन संपदाओं को खनन माफियाओं का हुजूम तहस-नहस कर रहे हैं. इस क्षेत्र में कुकुरमुत्ते की भांति उगे करीब 10000 से ऊपर अवैध क्रेसर मशीन चल रहे हैं. इनके संचालकों को विभागीय अधिकारियों तथा राजनेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त है. प्रदेश व केन्द्र स्तर पर सारी सूचनायें रहने के बाबजूद इस दिशा में कोई कार्रवाई न होना एक गंभीर चिंता का विषय है.

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