ब्लैकमेलिंग की मोड़ पर फिर ठिठका झारखंड

आज झारखंड में राजनीति अजीब मोड़ पर है। झूठ, फरेब, छल, प्रपंच और ब्लैकमेलिंग इसके मुख्य तत्व बन गये हैं। राज्य के भाजपाई सीएम अर्जुन मुंडा का तो और भी सानी है। यहां की पूरी राजनीतिक व्यवस्था को मात्र कयासों के भंवरजाल में उलझा रखा है। इसका सीधा कुअसर समूचे प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।  फिलहाल एक बड़ा सबाल उभर कर सामने आया है कि भाजपा के अर्जुन मुंडा और झामुमो के शिबू सोरेन के बीच सफेद झूठ कौन बोल रहा है। मुंडा जहां मुख्यमंत्री हैं वहीं, सोरेन उनकी सरकार समन्वय समिति के अध्यक्ष। और तो और श्री सोरेन की […]

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पत्रकारिता की आड़ में राष्ट्रव्यापी दलाली का नमुना

 अखबार निकालने वाले लोग दलाली करके कोयला खदानों के मालिक बनने लगे हैं. ऐसे लोगों से क्या उम्मीद करेंगे कि वे जनता के पक्ष में अखबार चलायेंगे? ये लोग खुलेआम अपने रसूख का इस्तेमाल ठेका पाने, दलाली पाने में करने लगे हैं. और, रातोंरात सैकड़ों करोड़ रुपये कमाने में सफल हो जाते हैं. दर्डा खानदान इसका साक्षात उदाहरण है. महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री जवाहरलाल दर्डा के 61 वर्षीय पुत्र विजय दर्डा लोकमत ग्रुप के चेयरमैन हैं. यह ग्रुप लोकमत मराठी दैनिक, लोकमत समाचार हिंदी दैनिक और लोकमत टाइम्स अंग्रेजी दैनिक का महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों से प्रकाशन करता है. विजय दर्डा […]

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बिन नाखून के शेर हैं झारखंड लोकायुक्त

इसे बिडवंना नहीं तो और क्या कहेगें कि झारखंड राज्य में आठ साल बाद भी लोकायुक्त को एक स्वतंत्र जांच एजेंसी की मान्यता तो दूर, राज्य लोकायुक्त अधिनियन के तहत दोषियों पर उन्हें सीधी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं मिल सका है।जबकि यहां चहुंओर भ्रष्ट्राचार और कुव्यवस्था का बोलबाला है।वे अभी तक राज्य सरकार के उन्हीं जांच  एजेंसियों पर  निर्भर हैं,जो आम आदमी के स्तर पर कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं करने के रिकार्ड बना चुकी है। इससे इतर हाल ही में कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध ऐसी मुहिम छेड़े कि सरकार बिल्कुल उलट-पुलट हो गई।इसके पूर्व […]

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व्यवस्था के फिल्टर में छेद तो है हीं साहब

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने न्यायपालिका को निशाने पर लिया है। वेशक भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका की भुमिका काफी अहम है। इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि बहुतेरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया काफी जटिल और पीड़ादायक हो गई है, जो न्यायपालिका के ही इस एथिक्स के खिलाफ जाती कि देर से मिला न्याय एक अन्याय से कम नहीं होता।  सुश्री ममता बनर्जी अपनी बेबाकी के लिये मानी जाती है। अगर उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह कहा है कि […]

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असम में खतरा बने बांग्लादेशी

इन दिनों असम कई मामलों को लेकर सुर्खियों में है। संयोग कहिए या साजिश इन सारे मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बांग्लादेशी मुसलमानों का हाथ बताया जा रहा है। पहली घटना एक महिला विधायक का है, जिसने अपनी राजनीति की शुरूआत भारतीय जनता पार्टी से की फिर कांग्रेस मे चली गयी। असम के राजनीतिक प्रेक्षकों का तो यहां तक कहना हैं कि उक्त महिला विधायक का भाजपा के एक प्रभावशाली नेता के साथ अंतरंग संबध रहे हैं। भाजपा का वह नेता कई वर्षो तक पूर्वोतर का काम सम्भालता रहा है। उस नेता पर आज भी पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी […]

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कुत्ता के मुंह में सूखी हड्डी और उसे मिलते स्वआनंद

बात 1992 की है। एक दिन मुजफ्फरपुर में एक साथी संवाददाता से मैंनें पूछा कि शुक्ला जी, किसी को कुछ मिलता नहीं। फिर भी इ पत्रकार भाई लोग इतना खुश कैसे रहता है। शुक्ला जी का जबाब था..” कुत्ता सूखी हड्डी चबाता है। खुन उसकी जीभ से निकलता है। और उ इ सोच कर चबाते रहता है कि वह सूखी हड्डी  से आनंद ले रहा है ” आज 1992 और 2012 में  दो दशक का फासला हो चुका है और परिस्थितियों में भी काफी बदलाव आ गया है।  कभी सूखी हड्डी चबाने वाले भी आज पीजा-बर्गर खा रहे हैं और जिन्हें […]

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अविश्वास और उत्पीड़न का पर्याय है झारखंड पुलिस

जब किसी भी सिस्टम का फिल्टर खराब हो जाये, तब अविश्वास और उत्पीड़न जन्म लेता है। आज हम बात करते हैं पुलिस फिल्टर सिस्टम की। इसमें कोई शक नहीं कि पुलिस नेताओं खास कर सत्ता पर कुंडली मार कर बैठे व्यूरोकेट्स के इशारे पर नाचती है। एक आम आदमी के दुःख-दर्द और उसकी सच्चाई कोई मायने नहीं रखती। एक चौकीदार-कांस्टेवल से लेकर पुलिस सिस्टम का हर महकमा अधिक से अधिक काली कमाई करने पर उतारु है। हम यह नहीं कहते कि इस सिस्टम से जुड़े हर लोग निकम्मे और भ्रष्ट हैं। लेकिन इतना तो सत्य है कि इस सिस्टम में अगर […]

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प्रभात खबर ने छापी बेवुनियाद खबर

झारखंड की राजधानी रांची से प्रकाशित दैनिक प्रभात खबर के संवाददाता ने राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक की गिरफ्तारी  को  लेकर  बिल्कुल  असत्य और वेबुनियाद खबर लिखी है। उसने राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक पक्ष लेना तो दूर वादी की शिकायत और थाना में दर्ज प्राथमिकी को भी समाचार का आधार नहीं बनाया, जो स्पष्ट प्रमाणित करता है कि इस सुनियोजित षडयंत्र में कहीं न कहीं शामिल रहा है। इसका एक मात्र कारण है कि राजनामा डॉट कॉम दैनिक प्रभात खबर की पत्रकारिता को लेकर भी कई खबरें प्रसारित कर चुका है। और कहते हैं न कि शातिर खिलाड़ी कभी खुद […]

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सूचना नहीं देता है झारखंड सूचना एवं जन संपर्क विभाग

राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय )। झारखंड सरकार का सूचना एवं जन संपर्क विभाग सरकारी राशि के महालूट का सिर्फ अड़्डा बन कर रह गया है। इसी का नतीजा है कि यह विभाग सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत भी एक आम सूचना  जन साधारण को उपलब्ध नहीं कराती। शायद इसलिये कि यहां कायदा-कानून नामक कोई नैतिकता बची ही नहीं है। सच पुछिये तो  कॉरपोरेट मीडिया हाउस  की दलाली और सत्तासीन सरकार की थूक चटई ने इस  विभाग के प्रायः पदासीन कर्मचारियों-अधिकारियों को इतना संपुष्ट कर रखा है कि उन्हें किसी की परवाह ही नहीं है। विगत दिनांकः 20 मार्च,2012 को राजनामा.कॉम के संचालक-संपादक के […]

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काटजू जी, देखिये झारखंडी मीडिया की चाल-चरित्र

राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय) ।  झारखंडी मीडिया का एक विशेष गुण। जो जितना बड़ा चोर-उतना ही जोर से मचाता है शोर। बात चाहे प्रिंट मीडिया की हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की। हमाम में  सब नंगे। इसी संदर्भ में एक नई कड़ी जुट गई है कि यहां आम जनता के अरबो-खरबों रुपये की गाढ़ी कमाई को बिल्डर-माफियओं की फौज ने लूट लिया। आज वे ही समाचार-पत्रिकायें व न्यूज़ चैनलें सुर्खियां बना रही है,जिनकी परोक्ष-अपरोक्ष तौर पर मिलीभगत रही है।  आज-कल रांची से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान ने बाजाप्ता बिल्डरों के कारनामों को कलंक कथा नाम से भुना रहा है। वह जिस प्रकार की सूचनायें […]

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झारखंड सूचना एंव जन संपर्क विभाग में सिर्फ लूट का खेल

राज़नामा.कॉम ( मुकेश भारतीय )।  पत्रकारिता झारखंड की। कोई कहता है कि अखबार नहीं,आंदोलन। कोई कहता है कि अब चलेगी आपकी मर्जी। कोई कुछ तो कोई कुछ। लेकिन यहां न तो किसी अखबार का कोई आंदोलन दिखता है और न हीं किसी की मर्जी । इस लूटखंड में कॉरपोरेट मीडिया के लोग भी हर जगह हाथ-पैर दोनों से लुटते नजर आ रहे हैं। अगर किसी भी खबर का गौर से आंकलन कीजिये तो उसमें पेड न्यूज़ की दुर्गंध अधिक आती है। बहरहाल, हम बात करते हैं झारखंड सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग में विज्ञापन के नाम पर हो रहे […]

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