चंडी पुलिस के निकम्मेपन खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की जरुरत

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क/मुकेश भारतीय। समूचे बिहार में सुशासन यानि कानून का राज होने का दंभ भरने वाले सीएम नीतिश कुमार के घर जिले नालंदा के चंडी थाना पुलिस के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की जरुरत है। सीएम के स्वजातीय होने का रौब झाड़ने वाले पूर्व थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार ने अपराध की नई परिभाषा गढ़ दी थी। जिसकी झलक वर्तमान थाना प्रभारी कमलजीत कुमार के कार्यकाल में भी साफ दिखती है। नालंदा से हमारे प्रमुख संवाददाता जयप्रकाश नवीन की खबर है कि नालंदा के चंडी थाना के नए थानेदार को उच्चके रोज सलामी दे रहे हैं। बैंक से लेकर सड़क तक […]

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सुशासन बाबू के नालंदा में अराजकता, सिर्फ मीडिया में दिखता है सुशासन !

राजनामा डेस्क। सुशासन बाबू यानि बिहार के सीएम नीतिश कुमार। लेकिन सबाल यह उठता है कि उन्हें यह तमगा दिया किसने है। मीडिया ने या आम जनता ने। तलवे चाटने वाली मीडिया कुछ भी अर्शनाम देने को स्वतंत्र है लेकिन, आम जनता के लिये कितना सुशासन है, सीएम के घर-जिले नालंदा का आकंलन कर इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। वेशक नालंदा का एसपी कुमार आशीष मीडिया से इतर आम जन में अपराध नियंत्रण के पैमाने पर खरे नहीं उतरते कम दिख पा रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि वे थाना प्रभारियों का बेतलब कसीदे गढ़ते हैं, जो बिल्कुल […]

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पद्मश्री बलबीर दत के सम्मान में पहुंचे मात्र तीन पत्रकार !

रांची (मुकेश भारतीय)।  झारखंड की पत्रकारिता के भीष्म पितामह बलबीत दत्त को पद्मश्री पुरुस्कार से सम्मानित होने के बाद कल 27 फरवरी की शाम 5 बजे एर्नाकुलम से हटिया स्टेशन पहुँचे। इस स्वागत मौके पर झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष शाहनवाज़ हसन, प्रदेश सचिव सुरेंद्र सोरेन एवं रांची एक्स्प्रेस के वरिष्ठ पत्रकार संपूर्णानंद भारती जी ही नजर आये। आलावे रांची का अन्य सारे पत्रकार कहां छुपे रहे, कोई नहीं जानता। जबकि पीठे पीछे बलबीर जी के साथ प्रगाढ़ संबंध के प्रायः पत्रकार चहुओर ढिढोंरे पीटते नजर आये हैं और उन्हें पद्मश्री सम्मान मिलते ही सोशल साइट पर पुराने फोटो चस्पा कर […]

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अखबारों और चैनलों के सीले होठ और चूं-चूं का मुरब्बा बना झारखंड सीएम जनसंवाद केन्द्र

रांची। वरीय अधिकारियों के दल ने विज्ञापन का ऐसा लालच दिखाया है कि ये अखबार और चैनलवाले आम जनता के सामने नंगे हो गये है, फिर भी बेशर्म की तरह सीना तानकर खड़े है और कह रहे है कि हम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ है, जबकि सच्चाई यह है कि ये इंसानियत के नाम पर कलंक है। आपको मालूम होगा कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत दो बेटियों ने यहां हो रहे गलत कार्यों का विरोध किया, उनका कहना था कि मुख्यमंत्री जनंसवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाओं के साथ अपमानजनक व्यवहार होता है, इन दोनों बेटियों ने इसकी जानकारी राज्य महिला […]

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रघु’राज में झारखंडी मीडिया को धिक्कार, कोई नहीं समझता बिटियों की पीड़ा

रांची। झारखंड की मीडिया को जिन्होंने रांची की बेटियों की आवाज सुनने से इनकार कर दिया। धिक्कार उस सरकार को जिसे पता ही नहीं कि उनकी बेटियों के संग उन्हीं के नाक के नीचे क्या हो रहा है। रांची स्थित सूचना भवन में चल रहे मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाकर्मियों ने राज्य महिला आयोग को पत्र लिखा है कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत वरीय अधिकारियों एवं नियोक्ता के द्वारा उनके साथ बराबर दुर्व्यवहार किया जाता है, अपमानित किया जाता है। इन महिलाकर्मियों ने उक्त पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रीय महिला आयोग नई दिल्ली, प्रधानमंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री झारखण्ड, राज्यपाल झारखण्ड, […]

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….और एक-एक पत्रकार को यूं नंगा कर डाले कृष्ण बिहारी मिश्र !

रांची (मुकेश भारतीय)। वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र ने अपने फेसबुक टाइम लाइन पर रांची के पत्रकारों की नंगई को लेकर जो पोस्ट की है, वाकई वह पत्रकार जगत को शर्मसार कर देने वाली है। हो सकता है कि इनमें सब लोग शामिल न हों, लेकिन इस नग्नता की जबाबदेही से मुक्त भी नहीं हो सकते। क्योंकि वे यदि इस उत्पाती भीड़ में शरीक न हों तो उसका विरोध या कड़ी टिप्पणी अवश्य करनी चाहिये। किसी भी समाचार पत्र या न्यूज चैनलों में इस मीडियाई अराजकता का न छपना या दिखना सबको यूहीं लपेट मारती है। श्री मिश्र एक सजग और […]

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विधायक, सेल्फी और दैनिक प्रभात खबर की पत्रकारिता

रांची (मुकेश भारतीय)। सब अखबार की अपनी-अपनी सोच होती है। खास कर उससे जुड़े समाचार लेखक और संपादकों की। दैनिक प्रभात खबर पर टारगेट जर्नलिज्म के आरोप लगते रहे हैं। कई ऐसे उदाहरण सामने आये हैं, जोकि अखबार की मानसिकता पर कड़े सबाल उठाते हैं। यही कारण है कि अखबार नहीं आंदोलन का दंभ भरने वाली इस अखबार के प्रसार-प्रतिष्ठा में तेजी से गिरावट आई है। दैनिक प्रभात खबर के 20 जनवरी (रांची संस्करण) के प्रथम पेज पर “ गौर से देखिये, साथी का शव लेकर जा रहे हैं ये? ” शीर्षक से लीड न्यूज प्रकाशित किया गया है। रोजमर्रा की […]

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ई राजनीति में पुत्र मोह जे न करावे

–मुकेश भारतीय– राजनीति में तो कब्र की दहलीज पर भी वह करा जाती है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।अब देखिये न। उतराखंड के बाबा भाजपा में शामिल हो गये हैं। उन्हें उनके डीएनए टेस्ट पास शहजादे साहेब शाह जी के दरबार में खींच ले गये हैं।  सतकीय उम्र की दहलीज की ओर बढ़ रहे ये बाबा दो राज्यों उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के कांग्रेसी मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री तथा आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रह चुके हैं।  हालांकि बाबा महामहिम का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाये। उन्हें बीच में ही बहुचर्चित सेक्स स्कैंडल के उपले की वजह से पद त्यागना पड़ा […]

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रघु’राज एक सचः सुशासन का दंभ और नकारा पुलिस तंत्र

रांची (मुकेश भारतीय)। झारखंड के सीएम रघुबर दास राज्य में सुशासन की बात करते हैं लेकिन क्या वाकई यहां कानून का भय कहीं दिखता है ? यदि उनके दो साल के राज खासकर हाल के दिनों की पड़ताल की जाये तो सब कुछ दलगत सत्ता-तंत्र से जुड़े लोगों तक ही सीमित नजर आता है। शासन- प्रशासन का निचला तबका हो या आम आदमी। वह गुंडों और अपराधियों की रहमोकरम पर अधिक निर्भर प्रतीत हो रहा है। आरटीसी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा के साथ राजधानी के भीतर जो कुछ जिस निर्दयता से हुआ, उसने निर्भया की बरसी पर एक कलंक बन गया। […]

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‘हम भारत के लोग’ और नेताओं के बीच यह अंतर क्यों ?

लोकतंत्र में  देश  की प्रजा उसका शरीर होती है लोकतंत्र उसकी आत्मा जबकि लोगों के लिए, लोगों के ही द्वारा  चुनी गई सरकार उस देश का मस्तिष्क होता है उसकी बुद्धि होती है।यह लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार ही देश की विश्व में दिशा और दशा तय करती है । यह एक अनुत्तरित प्रश्न है कि हमारी आज तक की सरकारों ने लोकतंत्र की इस परिभाषा और उसके मकसद को किस हद तक पूरा किया है। सरकार और उसके पदाधिकारियों ने जो कि देश के मस्तिष्क का प्रतिनिधित्व करते हैं आजादी के बाद से ही देश के भविष्य को ताक पर […]

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इस वीडियो ब्लॉगर के सपोर्ट में नहीं दिख रहा मीडिया का कोई धड़ा या संगठन ?

गिरफ्तारी के 20 दिन बाद भी नहीं मिली FIR की कॉपी मुकेश भारतीय  मशहूर ब्लॉगर अभिषेक मिश्रा ने अपनी गिरफ्तारी के बाद जो वीडियो न्यूज जारी किया है, वह मध्य प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान की गुंडागर्दी साफ तौर पर उजागर करती है। यह वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। अभिषेक का कहना है कि उसे गिरफ्तारी के 20 दिनों बाद भी एफआईआर की न तो कॉपी उपलब्ध कराई गई है और न ही उसे यह बताया गया है कि आखिर उसके खिलाफ एफआईआर किसने दर्ज कराई है। आईजी लेवल के पुलिस अधिकारी भी उपर (सीएम) के […]

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यह है दैनिक जागरण की शर्मशार कर देने वाली पत्रकारिता

पटना। राजधानी से प्रकाशित एक प्रमुख हिन्दी समाचार पत्र दैनिक जागरण के पाठकनामा कॉलम में छपा एक पत्र वर्तमान पत्रकारिता पर कई सवाल खड़े कर जाता है। यहां बिना संपादन के कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां छाप दी गई। वेशक यह पत्रकारिता के इतिहास को शर्मशार करने वाली तो है ही, साथ ही साथ बेशर्म पत्रकारिता का चेहरा उजागर करने वाला भी। सच पुछिये तो इसमें दोष संबंधित अखबार के संपादीय विभाग का नहीं है। वैसे प्रबंधनों का है, जिसने समाचार पत्रों का व्यवसायीकरण कर दिया। अब जहां समाचार से ज्यादा विज्ञापनों को अहमियत दिया जाने लगा हो […]

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