‘न तू अंधा है, न अपाहिज है, न निकम्मा है तो फिर ऐसा क्यूं’?

-: मुकेश भारतीय :- इसको भाव शून्यता कहिये, चाहे कहिये निर्बलता, नाम कोई भी दे सकते हैं आप मेरी मजबूरी को। कि जंगल-जगल ढूंढ रहा हूं, मृग बनके कस्तूरी को, बड़ा मुश्किल है तय करना, खुद से खुद की दूरी को।। कभी मेरी द्वारा रचित-प्रकाशित कविता के उपरोक्त अंश आज फिर एक बार मन-मस्तिष्क को झकझोर रही है। हर तरफ इस तरह की माहौल बन गया है कि किसी के दुःख-दर्द को उकेरना भी बड़ा मुश्किल है। ऐसा इसलिये कि हम जिस वर्ग की बात करते हैं, वे वर्ग ही सर्वहारा है। उसमें कोई खुद अपनी लड़ाई लड़ने को सामने नहीं […]

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फिर सबालों के घेरे में नालंदा की पत्रकारिता और पत्रकार संगठन

हमारे एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क के वरीय संपादन सहयोगी  पत्रकार जयप्रकाश नवीन पिछले दो दशक से सक्रीय लेखन के साथ आंचलिक पत्रकारिता से भी जुड़े रहे  हैं। राज्य से लेकर जिला, अनुमंडल व प्रखंड के गठित पत्रकार संगठनों के गवाह भी रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में नालंदा की मीडिया से जुड़े अतीत के साथ वर्तमान की बड़ी सटीकता से विश्लेषण किया है….. ” जिस दिन हमारी आत्मा इतनी निर्बल हो जाय कि अपने प्यारे आदर्श से डिग जाएँ, जान-बूझकर असत्य के पक्षपाती बनें और उदारता, स्वतंत्रता और निष्पक्षता को छोड़ देने की भीरूता दिखाएँ, वह दिन हमारे जीवन का सबसे […]

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एसडीओ की अदद चाय से हिलसा अनुमंडल पत्रकार संघ में यूं मचा घमासान

राजनामा न्यूज (मुकेश भारतीय)। मीडिया हाउस कितना भी बड़ा पूंजीगत क्यों न हो, उसकी रीढ़ आंचलिक पत्रकारिता होती है। इसे कोई नजंदाज नहीं कर सकता, लेकिन आज यदि हम देखें तो आंचलिक पत्रकारों के सामने नाना प्रकार के जटिल समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं। उन सबमें सबसे जटिल चुनौती है आंचलिक पत्रकारों पर मीडिया मठाधीशों का मायाजाल। हद तो तब हो जाती है, आंचलिक स्तर भी अन्य स्रोतों से कुछ ‘तेज-धनाठ्य’ पत्रकार लोग भी वहीं सब करने लगते हैं, जैसा उनके उपर के मीडियाई मठाधीश की मानसिकता होती है। बातें लंबी-चौड़ी, एकता-जुनून की लेकिन काम कपड़ा उतार कर व्यवस्था के सामने […]

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प्रेस क्लब की सदस्यता में धांधली के बीच विजय पाठक को लेकर उभरे तत्थ

राजनामा.कॉम। अब जबकि प्रेस क्लब, रांची की तदर्थ कमिटि की सदस्यता अभियान के दौरान व्यापक पैमाने पर धांधली बरते जाने के बाद चुनाव प्रक्रिया की घोषणा कर दी गई है और समर्थ सदस्यों ने विभिन्न पदों के लिये नामांकण कर दिया है, ऐसे एक बड़ा सबाल उठता है कि जिन लोगों ने द रांची प्रेस क्लब के निबंधन के दौरान फर्जीबाड़ा किया है या फिर सदस्यता प्रक्रिया के दौरान निजी खुन्नस निकालते हुये करीब ढाई सौ पत्रकारों को चुनाव प्रक्रिया से दूर रखा है, वैसे लोगों को चुनाव लड़ना किस नैतिकता का घोतक है। एक अखबार के स्थानीय संपादक विजयकांत पाठक […]

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बिहार-झारखंड, यहां जदयू-भाजपा सरकार की आत्मा जिंदा कहां है ?

“सदियों से चली आ रही मनुवाद की जमीं पर आज की जातीवादी राजनीति ने समाज में एक ऐसे जहरीले कीड़े को बल दिया है, जिसके शिकार इन्सान न मर सकता है और न जिंदा ही रह सकता है। सबाल सिर्फ मानवता की नहीं है, सीधा सबाल शासन-प्रशासन की भी है। “ -: मुकेश भारतीय :- बिहार और झारखंड में एक साथ दो घटनाएं घटी है। ये दोनों घटनाएं मानवता को शर्मसार करती है। ऐसी विषजात समस्याओं का मूल समाधान क्या है? इसका सीधा जबाव ढूंढा जाना चाहिये। विगत 18 अक्टूबर को बिहार के सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा के […]

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क्या कहेंगे अपने राजनेताओं के इस अल्प ज्ञान को !

कल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बिहार दौरे का कार्यक्रम और भाषण लगातार टीवी पर देख रहा था। पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में शिरकत कर रहे प्रधानमंत्री की प्रशंसा में कसीदे गढ़ने वाले एक राजनेता ने अपने भाषण में यहां तक कह डाला कि माननीय नरेन्द्र मोदी जी देश के इकलौते और प्रथम ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने पटना विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लिया। बिहार की जनता को कभी एनडीए गठबंधन, कभी विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग, फिर अप्रत्याशित रुप से भाजपा से अलग होकर महागठबंधन बनाकर सत्ता में आने, और फिर थूक गिराकर चाटने वाले ऐसे राजनेताओं […]

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डिजीटल ‘वायर’ में फंसे भाजपा के ‘शाह’

भाजपा और इसकी अगुआई वाली केंद्र सरकार को उस समय से बड़े सियासी भूचाल का सामना करना पड़ रहा है, जब से एक वेबसाइट ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे की कंपनी का कारोबार एक साल में ही 16 हजार गुना बढ़ जाने की खबर प्रकाशित की है। वेबसाइट के मुताबिक मोदी सरकार के वजूद में आने और शाह के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद इस कंपनी के कारोबार में जबरदस्त उछाल देखने को मिली है। न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ पर रविवार को प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा अध्यक्ष के बेटे जय अमित शाह की कंपनी […]

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ऐसी नौटंकी से क्या दूर होगा बाल विवाह और दहेज की कुप्रथा !

“शपथ नहीं सही शिक्षा और जागरुकता की जरुरत है बिहार को, क्या दहेज देने और लेने वाले कहेंगे कि हमने दहेज दिया या लिया, पूर्व से ही कड़े कानून बने हुए हैं इन दोनों कुप्रथाओं के खिलाफ” वरिष्ठ पत्रकार विनायक विजेता का विश्लेषण… बीते 2 अक्टूबर को पूरे बिहार में बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ सरकार प्रायोजित एक कथित नौटंकी हुई। इसके पूर्व बीते वर्ष महागठबंधन सरकार में शराबबंदी के समर्थन में राजधानी समेत पूरे बिहार में मानव श्रृंखला बनाकर एक कथित नौटंकी हुई थी। बस तब और अब में अंतर यह है कि शराबबंदी की नौटंकी में तब […]

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राजगीर के इस खबर की पड़ताल ने मीडया समेत पूरी सिस्टम को यूं नंगा कर दिया

“नालंदा जिले के राजगीर में अजीब हालात है। पुलिस-प्रशासन-मीडिया में ठीक वैसा ही होता प्रतीत होता है, जैसा रसुखदार चाहते हैं। वो रसुखदार चाहे लुच्चा – लफंगा – दलाल टाइप के लोग ही क्यों न हों। यहां से जुड़े मामलों या समस्याओं को एक दैनिक अखबार (राजधानी पटना से बिहरशरीफ संस्करण प्रकाशित) भी विशेष मामलों में सच को तोड़-मरोड़ कर खबरें प्रकाशित करने में जी-जान से दिख रहा है। जबकि अन्य लीडिंग अखबारों तक से वह गायब होती है।” राजनामा न्यूज डेस्क।  एक बार मेला सैरात भूमि मामले को लेकर राजगीर बंद हुआ। इस अखबार में एक लाइन भी खबर न […]

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सृजन महाघोटालाः सीबीआई की रडार पर नेताओं,अफसरों के साथ पत्रकार भी

“पूर्व सहकारिता मंत्री भी सीबीआई के राडार पर, बड़े-बड़े पत्रकार भी हाथ जोड़ते थे अमित और प्रिया के सामने, हर दल के नेताओं का संरक्षण था सृजन के संपोषकों को,  दिखावे के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट चलाते थे अमित कुमार “ बहुचर्चित सृजन महाघोटाले की जांच की आंच में पूर्व सहकारिता मंत्री आलोक मेहता भी तप सकते हैं। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस घोटाले की जांच अपने हाथ लेने के बाद सीबीआई सबसे पहले उन राज नेताओं और अधिकारियों के चित्र और चरित्र का मंथन करने में जुटी है जिन्होंने इसमहा घोटाले में परोक्ष या अपरोक्ष रुप से सहायक की भूमिका निभायी। इस मामले […]

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