सूचना नहीं देता है झारखंड सूचना एवं जन संपर्क विभाग

राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय )। झारखंड सरकार का सूचना एवं जन संपर्क विभाग सरकारी राशि के महालूट का सिर्फ अड़्डा बन कर रह गया है। इसी का नतीजा है कि यह विभाग सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत भी एक आम सूचना  जन साधारण को उपलब्ध नहीं कराती। शायद इसलिये कि यहां कायदा-कानून नामक कोई नैतिकता बची ही नहीं है। सच पुछिये तो  कॉरपोरेट मीडिया हाउस  की दलाली और सत्तासीन सरकार की थूक चटई ने इस  विभाग के प्रायः पदासीन कर्मचारियों-अधिकारियों को इतना संपुष्ट कर रखा है कि उन्हें किसी की परवाह ही नहीं है। विगत दिनांकः 20 मार्च,2012 को राजनामा.कॉम के संचालक-संपादक के […]

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काटजू जी, देखिये झारखंडी मीडिया की चाल-चरित्र

राजनामा.कॉम (मुकेश भारतीय) ।  झारखंडी मीडिया का एक विशेष गुण। जो जितना बड़ा चोर-उतना ही जोर से मचाता है शोर। बात चाहे प्रिंट मीडिया की हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की। हमाम में  सब नंगे। इसी संदर्भ में एक नई कड़ी जुट गई है कि यहां आम जनता के अरबो-खरबों रुपये की गाढ़ी कमाई को बिल्डर-माफियओं की फौज ने लूट लिया। आज वे ही समाचार-पत्रिकायें व न्यूज़ चैनलें सुर्खियां बना रही है,जिनकी परोक्ष-अपरोक्ष तौर पर मिलीभगत रही है।  आज-कल रांची से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान ने बाजाप्ता बिल्डरों के कारनामों को कलंक कथा नाम से भुना रहा है। वह जिस प्रकार की सूचनायें […]

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झारखंड सूचना एंव जन संपर्क विभाग में सिर्फ लूट का खेल

राज़नामा.कॉम ( मुकेश भारतीय )।  पत्रकारिता झारखंड की। कोई कहता है कि अखबार नहीं,आंदोलन। कोई कहता है कि अब चलेगी आपकी मर्जी। कोई कुछ तो कोई कुछ। लेकिन यहां न तो किसी अखबार का कोई आंदोलन दिखता है और न हीं किसी की मर्जी । इस लूटखंड में कॉरपोरेट मीडिया के लोग भी हर जगह हाथ-पैर दोनों से लुटते नजर आ रहे हैं। अगर किसी भी खबर का गौर से आंकलन कीजिये तो उसमें पेड न्यूज़ की दुर्गंध अधिक आती है। बहरहाल, हम बात करते हैं झारखंड सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग में विज्ञापन के नाम पर हो रहे […]

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पत्रकार वनाम झारखंड सरकार की रेवड़ियां

झारखंड सरकार की मीडिया फेलोशिप समिति द्वारा अनुसंशित जिन 30 में 26 उम्मीदवारों (पत्रकारों) को सरकार ने 50-50 हजार रुपए की फेलोशिप प्रदान करने की घोषणा की है, उनका गहन अवलोकन करने पर यह साफ जाहिर होता है कि मुंडा सरकार ने झारखंड की पत्रकारिता के एक खास वर्ग के चहेतों के बीच मात्र रेवड़ियां बांटने का कार्य की है। जिन पत्रकारों को इसका लाभ मिलनी चाहिए, उसे नहीं मिलने की परंपरा कायम रखते हुये इसमें पारदर्शिता नहीं बरती गई है और यदि इसकी न्यायपूर्ण जांच की जाए तो सबकी कलई खुलनी तय है। चयन समिति में कई ऐसे लोग हैं,जिनसे […]

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