….जाहिलों का पत्रकार संगठन कहेगें तो बुरा लगेगा

राजनामा.कॉम। किसी भी पेशा में संगठन का अपना कर्तव्य और दायित्व होता है। बात जब मीडिया संगठन की हो तो जिम्मेवारी काफी बढ़ जाती है। लेकिन आज कल मीडिया-पत्रकार के नाम पर कई ऐसे संगठन उग आये हैं, जो बात तो करते हैं पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान की। पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ तो चिंघाड़ते नहीं थकते। -: मुकेश भारतीय :- नालंदा जिले के राजगीर थाना के एक नशे में धुत जमादार ने वेब जर्नलिस्ट राजीव रंजन के साथ दो अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिल कर मारपीट की। राजीव रंजन का कसूर सिर्फ इतना था कि दो अन्य रिपोर्टर के साथ नशे […]

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अफसरों को हड़काने की जगह यूं आत्ममंथन करें सीएम

‘एज ए मैन और ऐज ए पॉलिटीशियन नीतीश कुमार में कहीं दोष नहीं है ।दोष है तो ब्यूरोक्रेट्स से सांसद बने एक वैसे शख्स का, जिसके इशारे पर आईएएस और आईपीएस अफसरों का तबादला होता रहा है। जिनके इशारे पर नीतीश किसी कारणवश चलने को बाध्य हैं……..’ राजनामा.कॉम (विनायक विजेता)। पटना बिहार के प्रशासनिक अधिकारी हो या पुलिस अधिकारी। बीते छह वर्षों से बिहार और विभिन्न जिलों में पदस्थापित अधिकारियों की हालत मोबाईल फोन की तरह हो गई है। कभी मोबाइल की तेज घंटी की तरह बजने वाले ऐसे अधिकारी आज ‘बेवरेशन मोड’ में जाने को बाध्य हो गए हैं। डर […]

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सुर्खियों में हैं बिहार कैडर के IPS अमित लोढा की पुस्तक ‘बिहार डायरीज’

“वर्तमान में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए  आइपीएस अमित लोढा इन दिनों सीमा सुरक्षा बल नार्थ के डीआईजी पद पर तैनात हैं। उनकी पदस्थापना राजस्थान के बार्डर इलाका जैसलेमेर में है……” पटना (विनायक विजेता) । बिहार कैडर के 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा की स्वलिखित पुस्तक ‘बिहार डायरीज’ इन दिनों चर्चा में है। देश के कई शहरों में लोग खासकर वैसे युवा वर्ग जो यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं इसे खरीदने के लिए किताब की दूकानों पर लंबी कतार में खड़े देखे जा रहे हैं। अमित लोढ़ा इन दिनों अपनी लिखी किताब ‘बिहार डायरीज’ से काफी चर्चा में […]

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कम्यूनल-अनसोशल वीडियो वायरल करने वाले ऐसे पुलिसकर्मी पर हो क्वीक एक्शन

“असमाजिक तत्वों पर नजर रखने की जबावदेही सबकी है। पुलिस-प्रशासन का दायित्व है कि वह पहचान में आये ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे, ताकि वैसे लोगों में भय का महौल कायम हो सके, जो विशेष परिस्थितियों में भी प्रशासनिक हिदायत को ठेंगा दिखाने से नहीं चूकते……“ -:  मुकेश भारतीय :- बीते कल का दिन-रात हर दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील था। बिहार-झारखंड के चप्पे-चप्पे में पुलिस प्रशासन काफी सजगता से मुसतैद दिखी। कई स्थानों पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। कुछ जगहों पर हिंसक झड़पों की सूचना भी मिल रही थी। इसी बीच नालंदा जिले में ‘JDU HARNAUT […]

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बिना प्रशासनिक सहभागिता संभव नहीं है सोशल मीडिया पर नजर

वेशक आज समाज में सोशल मीडिया के उपयोग और दुरुपयोग के एक से एक खतरनाक आयाम इतनी तेजी से सामने आ रहे हैं कि इस पर नजर रखने और उपद्रवी तत्वों के खिलाफ समय से कार्रवाई करने की जरूरत बढ़ती ही जा रही है। अगर सरकार या प्रशासन सोशल मीडिया पर जारी गतिविधियों पर निगरानी की कोई व्यवस्था कर रही है तो पहली नजर में इसे स्वाभाविक और उचित ही कहा जाएगा। लेकिन….. -:  मुकेश भारतीय :- नालंदा पुलिस-प्रशासन ने संयुक्त रुप से सामाजिक सद्भाव बनाये रखने के लिये सोशल मीडिया को लेकर विशेष एहतियात वरतने का फरमान जारी किया है। […]

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गुजरात के ‘प्रेस वाहन’ से नालंदा में शराब की यूं तस्करी होना गंभीर बात

“मीडिया जगत में प्रेस शब्द का जितना अलग महत्व है, शासन-प्रशासन में उसका उतना ही अलग पहचान। बहुतेरे लोग या तो प्रेस के नाम पर अपराधिक कुकृत्य को अंजाम दे रहे हैं या फिर मीडिया में येन-केन-प्रकेरेन प्रवेश कर, चाहे उसे एक लाइन समाचार लिखना तक क्यों न आता हो। समय आ गया है कि पुलिस-प्रशासन के साथ समाज के जिम्मेवार लोग इसे गंभीरता से लें”। -: मुकेश भारतीय :- नालंदा जिले के खुदागंज (इस्लामपुर) थाना क्षेत्र में थानाध्यक्ष राम प्रकाश सिंह ने प्रतिबंधित शराब की तस्करी करने में जुटी एक मारुति कार को जब्त की है। उस मारुति कार की […]

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एक था ‘अखबारों की नगरी’ मुजफ्फरपुर का ‘ठाकुर’

‘बुलंदी देर तक किस शख्स के हिस्से में रहती है,बहुत उंची ईमारत हर वक्त खतरे में रहती है ’….मुनव्वर राणा की यह पंक्ति ‘मुजफ्फरपुर महापाप’ के मास्टर माइंड कहे जाने वाले ब्रजेश ठाकुर पर सटीक बैठती है। पटना ( जयप्रकाश नवीन)। ब्रजेश ठाकुर कुछ दिन पहले तक ‘अखबारों की नगरी’ मुजफ्फरपुर का बेताज बादशाह कहलाता था। लेकिन एक पल में उसका साम्राज्य बिखर गया। उस शख्स पर अपने ही बालिका होम शेल्टर की लड़कियों से यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे। जिसके बाद से वह जेल में है। बिहार विधानसभा का दो बार चुनाव लड़ने वाले ब्रजेश ठाकुर को जब राजनीति […]

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मीडिया के लिए नहीं होना चाहिए कोई दिशा-निर्देशः चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा

राजनामा.कॉम। ‘लोकतांत्रिक समाज में प्रेस की आजादी तमाम आजादी की जननी है। इसमें कोई शक नहीं कि ये संविधान में दिए गए सबसे मूल्यवान अधिकारों में से एक है। इसमें जानने का अधिकार और सूचित करने का अधिकार भी समाहित है’ यह कहना है देश के मुख्य न्यायधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा का। उन्होंने कहा कि मेरा अटूट विश्वास है कि ‘(मीडिया के लिए) कोई दिशा-निर्देश नहीं होना चाहिए। उन्हें (मीडिया) को खुद पर नियंत्रण के लिए अपनी गाइडलाइंस बनानी चाहिए। प्रेस के निजी या समन्वित दिशा-निर्देश से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। किसी भी प्रकार से कुछ थोपना नहीं चाहिए […]

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पत्रकारिता दिवस पर विशेष: मीडिया तेरे कितने प्रकार?

‘बिना मीडिया की सरकार चाहिए या बिना सरकार का मीडिया‘ “सामाजिक सरोकारों तथा सार्वजनिक हित से जुड़कर ही पत्रकारिता सार्थक बनती है। सामाजिक सरोकारों को व्यवस्था की दहलीज तक पहुँचाने और प्रशासन की जनहितकारी नीतियों तथा योजनाओं को समाज के सबसे निचले तबके तक ले जाने के दायित्व का निर्वाह ही सार्थक पत्रकारिता है। लेकिन पिछले दिनों ‘कोबरा पोस्ट’ के स्टिंग ऑपरेशन मीडिया की एक ऐसी गाथा है,जो लोकतंत्र के लिए वाकई एक खतरे की घंटी कह सकते है।” राजनामा डॉट कॉम / जयप्रकाश नवीन। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा पाया (स्तम्भ) भी कहा जाता है। पत्रकारिता ने लोकतंत्र में यह महत्त्वपूर्ण […]

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‘न तू अंधा है, न अपाहिज है, न निकम्मा है तो फिर ऐसा क्यूं’?

-: मुकेश भारतीय :- इसको भाव शून्यता कहिये, चाहे कहिये निर्बलता, नाम कोई भी दे सकते हैं आप मेरी मजबूरी को। कि जंगल-जगल ढूंढ रहा हूं, मृग बनके कस्तूरी को, बड़ा मुश्किल है तय करना, खुद से खुद की दूरी को।। कभी मेरी द्वारा रचित-प्रकाशित कविता के उपरोक्त अंश आज फिर एक बार मन-मस्तिष्क को झकझोर रही है। हर तरफ इस तरह की माहौल बन गया है कि किसी के दुःख-दर्द को उकेरना भी बड़ा मुश्किल है। ऐसा इसलिये कि हम जिस वर्ग की बात करते हैं, वे वर्ग ही सर्वहारा है। उसमें कोई खुद अपनी लड़ाई लड़ने को सामने नहीं […]

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