दैनिक जागरण के ऐसे सांप्रदायिक खबर पर कार्रवाई कर दिखाएं नालंदा डीएम-एसपी

“मीडिया का अपना दायित्व है। संकट काल में उसकी जबावदेही कहीं अधिक बढ़ जाती है। लेकिन हाल के दिनों में पटना से प्रकाशित नामचीन अखबार दैनिक जागरण को न जाने कौन सा जीव सुंघ गया है कि उसके करींदे छद्म सुर्खियां की लालसा में ऐसी खबरे गढ़ रहे हैं, जो समाज […]

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पढ़ेंः मीडिया की जड़ उधेड़ती नैतिकता

“मीडिया हमेशा दूसरों के ऐब ही देखा करती है। उसको अपना ऐब भी तो देखना चाहिए। उस पर चिंतन/मनन करना चाहिए। इस घूसखोरी प्रकरण को मीडिया में उस तरह नहीं दिखाया गया जिस तरह तहलका प्रकरण को दिखाया गया था…” राज़नामा डेस्क।  मीडिया में दैनिक संवाददाता/रिपोर्टर भी अपने आपको पत्रकार कहता […]

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क्या हम बिहारी मराठी तमिलियन मणिपुरी नहीं हो सकते ?

“ये चाहते हैं सिर्फ बैल या शेर ही रहे।  क्या ये संभव है ?  और अगर संभव भी है तो क्या हम अपनी विरासत के साथ न्याय कर पायेंगे…………” -:  सिने-टीवी लेखकः धनंजय कुमार :- भारत विविधताओं का देश है। अलग रंग, अलग रूप, अलग बोली, अलग खानपान, अलग पहरावा, अलग […]

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विकल्प है, लेकिन अंधे हैं आप !

“लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों जनता ही होती है। इसलिए जो सवाल पूछते हैं कि विकल्प क्या है, वो या तो मूर्ख हैं या धूर्त हैं………….” राजनामा.कॉम। लोकतंत्र में विकल्प ही विकल्प होते हैं। क्योंकि चुनाव लड़ने का अधिकार देश के हर नागरिक को है। विशेषकर भारत तो असीमित विकल्प […]

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ऐसे मनबढ़ू अभद्र महिला इंस्पेक्टरों ने एक निरीह पत्रकार को सरेआम घेरकर बेइज्जत किया

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। एक ह्वाट्सप ग्रुप पर सरकुलेट जिस कंटेंट को लेकर ये महिला पुलिसवाली सागर (मध्य प्रदेश) जिले के टीवी पत्रकार गोलू शर्मा को हड़का रही हैं, वो पोस्ट गोलू ने लिखी ही नहीं थी। जिस विनय सागर नामक सज्जन ने संबंधित कंटेंट पोस्ट किया है, वो खुल कर […]

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काश रामजीवन बाबू की ‘संचिका’ को चिदम्बरम तक समझ पाते!

“वर्ष1990: बिहार में कांग्रेस को हटाकर जनता दल सत्ता में आयी थी। लालू प्रसाद मुख्य मंत्री बने थे। उनके एक मंत्री थे पुराने सोशलिस्ट रामजीवन सिंह। उन्हें कृषि, पशुपालन, मत्स्य सहकारिता मंत्री बनाया गया था……………..” हर नई सरकार की तरह पुरानी सरकार की फाईल खंगाली जा रही थी। सत्ता के गलियारे […]

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पता नहीं कब हम अर्थ और व्यर्थ का अर्थ समझ पायेंगे!

“आज प्रेमचंद जीवित होते, तो देशद्रोही कहलाते। सोशल मीडिया पर ट्रोल होते और माँ बहन की ऐसी ऐसी गालियाँ खाते कि अपनी रचनाशीलता को कमतर मान लेते….” कल खबर पढ़ रहा था, उनके गाँव के घर की बत्ती गुल कर दी है बिजली विभाग ने। बिल नहीं भरा होगा। नियति देखिये, […]

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सुलगते सवालों का अजायब घर है अवनीन्द्र झा की ‘मिस टीआरपी’ पत्रकारिता

“प्रखर और धारदार लेखनी से पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अवनीन्द्र झा द्वारा लिखित मिस टीआरपी’ हास्य-व्यंग्य की शैली में लिखी गयी है। वे एनडीटीवी इण्डिया, मौर्या, ज़ी पुरवैया, दैनिक भाष्कर ,डीएलए और आउट लुक आदि में अपना योगदान दे चुके हैं…” एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क (दीपक विश्वकर्मा)। […]

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