दिग्भ्रमितों ने किया पत्रकारिता का बेड़ा गर्क

            पत्रकारिता की दुनियां भी बड़ी अजीब है.यहाँ‘आइटम’ और ‘वेराइटी’ की कोई कमी नहीं है.पहले तो ऐसा महसूस होगा कि पत्रकार महोदय से बड़ा बुद्धिजीवी कोई नहीं होगा.लेकिन जुबां खुलते ही पोल भी खुल जाती है.इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि पत्रकारिता में अल्पज्ञानी और दिग्भ्रमितों की जमात बढ़ती ही जा रही है.यह हाल केवल जिले का ही नहीं बल्कि संपादक स्तर पर मौजूद लोगों का भी है.              देहात में एक कहावत बड़ी प्रचलित है ‘लाचारी का दाल खेसारी’.बतलाना प्रासंगिक होगा कि कभी इस इलाके में दाल की किस्म ‘खेसारी’ का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था लेकिन बाद में जब […]

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बिरादरी पर कुछ तो लाज कीजिये साहेब

वेशक झारखंड में भाजपा-झामुमो-आजसू की तिकड़ी मुंडा सरकार के इधर के शासन काल में पत्रकारों का उत्पीड़न काफी बढ़ गया है। और बात जब सत्तारुढ़ भाजपा के छुटभैये नेताओं तक की भी होती है, तब पुलिस-प्रशासन तो दूर प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले भी अपने खबरचियों के बजाय सरकारी मशीनरी का तलवा चाटने में अधिक मशगुल दिखते हैं। खबर है कि झारखंड के पलामू में दैनिक जागरण के छायाकार को भाजयुमो के एक नेता ने पीट दिया। इस घटना की जानकारी छायाकार ने अखबार प्रबंधकों को दी, परन्‍तु अखबार ने इस खबर के बारे में एक लाइन प्रकाशित करना भी गंवारा नहीं समझा। […]

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बैजू बाबाः वेतन सन्मार्ग से, सेवा न्यूज-११ की

रांची सन्मार्ग के संपादक बैजनाथ मिश्र का एक पावं सन्मार्ग में दूसरा न्यूज-११ में है. वे जितना समय सन्मार्ग में देते हैं उससे ज्यादा  न्यूज-११ को. वह भी डंके की चोट पर.वे प्रतिदिन ११ बजे रिपोर्टरों की मीटिंग के लिए सन्मार्ग आते हैं लेकिन न कोई स्टोरी प्लानिंग होती है और न ही अखबार की समीक्षा.न छूटी हुई ख़बरों पर कोई चर्चा न दूसरे अख़बारों  से कोई तुलना. बैजू पूरे समय बाबा की आत्मप्रवंचना चलती रहती है. रिपोर्टर हाँ में हाँ  मिलाने को विवश रहते हैं. अंत में वे सिर्फ सबसे पूछ लेते हैं की वे आज क्या फ़ाइल करेंगे. फिर सभा विसर्जित कर बैजू बाबा न्यूज-११ […]

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बिहारशरीफ में चल रही है कई अवैध न्यूज चैनल

 अगर कोई कार्य प्रशासन के मेल बिना किया जाए तो वह अवैध कहलाता है। परन्तु वही कार्य प्रशासन के मेल से किया जाए तो वह वैध हो जाता है। ऊपर कही गई बातें सौ फीसदी सही है। वह कार्य हो रहा हैं, सुशासन बाबु के अपने गृह जिले मुख्यालय बिहारशरीफ में । बिहारशरीफ शहर में केबुल के माध्यम से करीव आधे दर्जन लोकल समाचार चैनल चल रहे है, जिनका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हैं और ना ही चलाने के लिए किसी ने आदेश दिया है। परन्तु प्रशासन द्वारा इन्हें सरकारी कार्यक्रमों तथा चुनाव के दौरान आयोग द्वारा समाचार संकलन हेतु पास तक […]

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ज़ी न्यूज ने जिंदल को मानहानि का नोटिस भेजा

नवीन जिंदल एवं जेएसपीएल की  संवाददाता सम्मेलन का कड़ा जवाब देते हुए ज़ी न्यूज ने  नवीन जिंदल एवं जेएसपीएल को 150 करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस भेजा। जिंदल ने ज़ी न्यूज पर अपनी गलत छवि पेश करने का आरोप लगाया है। ज़ी न्यूज ने संवाददाता सम्मेलन में जिंदल द्वारा पेश छेड़छाड़ किए गए साक्ष्यों को पूरी तरह से खारिज करने के साथ ही इसकी निंदा की है। ज़ी न्यूज का मानना है कि टेलीविजन नेटवर्क की विश्वसनीय छवि खराब करने के लिए ऐसा जानबूझकर किया गया है। ज़ी न्यूज ने अपने खिलाफ लगे आधारहीन एवं मानहानि करने वाले सभी आरोपों […]

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राजनीति कर रहे हैं काटजू

पटना। प्रेस काउन्सिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू जब-जब बिहार आते हैं, सूबे के बारे में कोई न कोई नकारात्मक टिप्पणी कर जाते हैं. उन्होंने इस बार तो तमाम हदें पार कर दी हैं और प्रदेश की जनता के द्वारा प्रचंड बहुमत से चुनी गई सरकार की बखिया उधेड़ कर रख दी. उन्होंने सूबे के सर्वप्रिय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बुरी तरह कटाक्ष किया. काटजू ने जेपी की दुहाई देते हुए पूछा – आप कैसे शिष्य हैं? कहां है जेपी का जातिविहीन समाज। कहां गलत रास्ते पर चले गए? क्यों आपका इतना विरोध हो रहा है? सवालों की झड़ी लगाते […]

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जी न्यूज़ का “काला पत्थर”

जी न्यूज ने सोचा नहीं होगा कि कोयले को दागदार खोजते खोजते उसका दामन भी काला हो जाएगा। जी न्यूज बनाम जिंदल में जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी ने  अपना पक्ष अपने चैनल में रखा है। सुधीर चौधरी के साथ जी न्यूज के विशेष कार्यक्रम मीडिया का सौदा में उनके सहयोगी जी बिजनेस के संपादक समीर अहलूवालिया ने अपना पक्ष रखा। अहलूवालिया घटना के सबसे अहम कड़ी के रुप में सामने आए है। लेकिन वो अपना पक्ष बेबाक तरीके से नहीं रख पाए। जी न्यूज कोलगेट पर कई दिनों से काला पत्थऱ सीरीज का प्रसारण कर रहा है। लेकिन इसी कोयले […]

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झारखंड सूचना जन संपर्क विभाग में लूट का नया खेल

उर्दु अखबार के पहले अंक में ही दिया 15 अगस्त का एक फूल पेज विज्ञापनः इन दिनों झारखंड सरकार के सूचना एवं जन-संपर्क विभाग में लूट का आलम बढ़ गया है। एक लंबे समय तक पद खाली रहने के बाद जब एक सीसीएलकर्मी  को निदेशक बनाया गया तो उम्मीद बनी थी कि इस विभाग के दिन बहुरेगें और सरकारी विज्ञापनादि में जो गोरखधंधा चल रहे हैं,वे बंद भले ही न हो, उसमें कमी जरुर आयेगी। दुर्भाग्य कि फिलहाल यहां ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है और भ्रष्टाचार का पानी सिर से उपर बहने लगा है। कहने को तो इस विभाग […]

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पत्रकारिता मिशन नहीं, अब कमीशन का खेल है

पत्रकार के कलम की स्याही और खून में जब तलक पाक़ीज़गी रहती है तब तलक पत्रकार कि लेखनी दमकती है और चेहरा चमकता है. न तो उसकी निगाह किसी से सच पूछने पर झुकती है और न ही उसकी कलम सच लिखने से चूकती है. पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन यह भी कड़वी सच्चाई है के मौजूदा दौर बाजारवाद के हाथों कि कठपुतली है और पूरा नियंत्रण बाजारवाद के पास है. जिसका काम है खरीद-फरोख्त यानी वह हर चीज कि कीमत तय कर बाजार में ला खड़ा कर देता है,जहां आपकी […]

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गलत तस्वीर पेश कर रही है बिहार की मीडिया

सरकार की अच्छाई और बुराई को उजागर करनेकी भूमिका निभाने वाले बिहार के हिन्दी और अंग्रेजी भाषाई आइना इन दिनों चूर-चूर हो गयाहै। मीडिया में बिहार की गलत तस्वीर पेश की जा रहीहै। बिहार की राजधानी पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को खुश करने के लिए प्रथम पृष्ठ पर कुछ उत्साहवर्द्धक और जीवंत खबरें छप जरूर  रही हैं ,परन्तु बिहार के 38 जिलों में जिलाबार छपनेवाले हिन्दी अखबारों में जो खबरें इनदिनों छप रहीं हैं,वह खबरें सरकार के प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारियों के मनोबल को तोड़ने के लिए छापी जा रहीहै । बिहार के जिलों में वितरित होर हे जिलावार […]

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हिन्दी न्यूज चैनल की पत्रकारिता

जंतर-मंतर की आवाज 10 जनपथ या 7 रेसकोर्स तक पहुंचेगी। देखिये इस बार भीड़ है ही नहीं। लोग गायब हैं। पहले वाला समां नहीं है। तो जंतर-मंतर की आवाज या यहां हो रहे अनशन का मतलब ही क्या है। तो क्या यह कहा जा सकता है कि अन्ना आंदोलन सोलह महीने में ही फेल हो गया। थोड़ा इंतजार करना है। यह अन्ना टीम के अनशन की शुरुआत पर न्यूज चैनल में संवाद का हिस्सा है। और चार दिन बाद जब अन्ना हजारे खुद अनशन पर बैठे तो…जंतर-मंतर पर आज क्या हाल है। देखिये लोग जुट रहे हैं। लेकिन वह समां अब […]

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