क्या अरविंद केजरीवाल का संघर्ष एक छलावा है ?

आम जनता की हालत में अहम परिवर्तन लाने के मकसद से कभी टीम अन्ना के सदस्य रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल बिजली-पानी के दामों में हुई बढ़ोत्तरी के विरोध में अनशन पर बैठे किंतु उन्हें अपेक्षित जन समर्थन हासिल नहीं हुआ। जबकि पिछली बार जब जनलोकपाल जैसे मुद्दे को उठाकर अन्ना हजारे भूख हड़ताल पर गए थे तो मीडिया के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजरें उन पर टिकी थीं। किंतु अब अलग-थलग पड़ गए अरविंद केजरीवाल किसी भी परिदृश्य में नहीं रहे। ना ही उन्हें मीडिया फोकस कर रही है और ना ही जिस जनता के लिए उन्होंने […]

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मीडिया में घुमती सीडीः कांग्रेस और सेक्स का है पुराना रिश्ता

लोग अब मजाक में कहने लगे हैं कि जिसके पास खूब पैसा हो, सत्ता का रसूख हो और सेक्स के लिए रोज नया पार्टनर तलाश लेता हो तो समझो वो कांग्रेसी है. सेक्स और कांग्रेस का बड़ा पुराना रिश्ता रहा है. एनडी तिवारी कांड को सब लोग जानते ही हैं. राज्यपाल रहते हुए इस नेता की सेक्स सीडी बन गई थी. तब उन्हें राज्यपाल के पद से हाथ धोना पड़ा था और बाद में राजनीतिक बनवास भोगना पड़ा. ताजा कांड कांग्रेस के एक अन्य बुजुर्ग नेता का है. ये एक प्रदेश के सबसे ताकतवर कांग्रेसी नेता माने जाते हैं. इनके सुपुत्र […]

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सबाल पत्रकारिता के जातिगत ताने-बाने का

कई बार मन प्रश्न करता है कि दबंग फ़ेम सलमान खान यदि चुलबुल पांडे के स्थान पर चुलबुल चमार होते तो क्या तब भी उनकी फ़िल्में इतनी ही सुपरहिट होती? यह सवाल मेरे मन ने उस समय भी किया जब संजीव जायसवाल की फ़िल्म शुद्र द राइजिंग का बिहार में कहीं भी प्रदर्शन नहीं हुआ। सवाल उस समय भी उठता है जब बिहार सरकार अपने कार्यकाल का वर्षगांठ मनाती है और सूबे के अखबारों में सरकारी उपलब्धियों के मूल्यांकन के बजाय अभिनंदन पत्र प्रकाशित किए जाते हैं। मन पुछता है कि क्या यही पत्रकारिता है? निस्संदेह पत्रकारिता एक मुकम्मिल विषय है […]

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देश हांकने लगा है इलैक्ट्रॉनिक मीडिया

 वे दिन लद गए, जब या तो आकाशवाणी पर देश की हलचल का पता लगता था या फिर दूसरे दिन अखबारों में। तब किसी विवादास्पद या संवेदनशील खबर के लिए लोग बीबीसी पर कान लगाते थे। देश के किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर राय कायम करने और समाज को उसका आइना दिखाने के साथ दिशा देने का काम अखबार किया करते थे, जिसमें वक्त लगता था। आजादी के आंदोलन में समाचार पत्रों की ही अहम भूमिका रही। मगर अब तो सोसासटी हो या सियासत, उसकी दशा और दिशा टीवी का छोटा पर्दा ही तय करने लगा है। और वह भी लाइव। […]

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उषा मार्टिन ग्रुप के आदित्यपुर मिल से बढ़ता प्रदुषण

रेल जैसे ही धीमे-धीमे झारखंड के जमशेदपुर नगर की ओर बढ़ती है वैसे-वैसे आकाश लाल होता दिखाई देने लगता है। इसका कारण है औद्योगिक इकाई से उड़ती घनी लाल धूल जिसमें कि बिना जले कोयले की धूल एवं राख का अंबार है। यह इकाई है उषा मार्टिन समूह के स्वामित्व की एक मध्यम स्तर की लौह एवं स्टील मिल।  जमशेदपुर के एक उपनगर आदित्यपुर में करीब 120 हेक्टेयर में फैली यह मिल सन् 1974 से कार्यरत है। इस इकाई में दो छोटी (ब्लास्ट) भट्टियां, तीन कोयला आधारित स्पंज आयरन भट्टियां जिनकी क्षमता 350 टन प्रतिदिन है और तीन बिजली चलित भट्टियां […]

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हिंदी ब्लॉगिंग के समक्ष उत्पन्न संकट

हिंदी ब्लॉगिंग का एक साल और गुज़र गया लेकिन  फिर भी 10 साल पूरे नहीं हुए। इसके बावजूद हिंदी ब्लॉगिंग के 10 वर्षीय उत्सव मना डाले गए। हिंदी ब्लॉगिंग की इस प्री-मेच्योर डिलीवरी या भ्रूण हत्या को पूरे ब्लॉग जगत ने देखा और सराहा। संवेदनशील काव्यकारों और बुद्धिकारों ने इसमें सक्रिय सहयोग दिया और बदले में सम्मान आदि पाया। इसमें जो ख़र्च आया, उसे भी सहर्ष स्वीकार किया गया और यह परंपरा आगे भी जारी रहे, इसके लिए वे प्रयासरत हैं। इस तरह नाम और शोहरत के ग्राहकों और सप्लायरों ने हिंदी ब्लॉगिंग का व्यापारीकरण कर दिया। यह एक दुखद घटना […]

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यमराज और स्वर्ग प्राप्ति के नये नियम

राज़नामा.कॉम। यमराज  अपने सिंहासन पर विराजमान हो,  उंघ रहे थे कि चिंतित चित्रगुप्त ने आकर उन्हे डिस्टर्ब कर दिया। यमराज बोले-  “चित्रगुप्त हमारी रानी की तरह तुम्हे भी क्या हमारा सुख देखना पसंद नही।” चित्रगुप्त ने सफ़ाई दी – “महाराज, दो आपात कालीन पत्र आये हैं एक स्वर्ग से दूसरा नर्क से।” यमराज ने पत्र सुनाने का इशारा किया। सो चित्रगुप्त ने पहला पत्र स्वर्गाधिपति इंद्र का पढ़ना शुरू किया- ” मेरे प्यारे मित्र यमराज, आपके रहते हुये स्वर्ग के साथ ऐसा अन्याय क्यों हो रहा है। आज कल कोई भी मनुष्य स्वर्ग नही भेजा जाता। अप्सरायें त्राही त्राही कर रही […]

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बहुत कठिन है डगर न्याय की

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे हैं. इंसान खत्म हो जाता है, लेकिन म़ुकदमा बरक़रार रहता है. इसकी वजह से बेगुनाह लोग अपनी ज़िंदगी जेल की सला़खों के पीछे गुज़ार देते हैं. कई बार पूरी ज़िंदगी क़ैद में बिताने या मौत के बाद फैसला आता है कि वह व्यक्ति बेक़सूर है. ऐसे में उसके साथ हुई नाइंसा़फी के लिए कौन ज़िम्मेदार है, कहने की ज़रूरत नहीं है. […]

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थैंक गॉड, मैं कलेक्टर हुआ न नेता

क्या कभी आपके मन में ये अफसोस हुआ है कि आप या आपके पति/पत्नी कलेक्टर क्यों न हुए? क्या आप या आपके बच्चे कलेक्टर बनने का सपना पाले हुए हैं? यदि हाँ, तो अफसोस भूल जाएं, और उस तुच्छ सपने को त्याग दें – अभी, तुरंत. आधुनिक भारत के दो प्रमुख, टॉप प्रोफ़ेशनों – कलेक्टरी और नेतागिरी के बीच अंतरंग संबंध की है ये बानगी ! पेश है (आमतौर पर होने वाले?) बेहद मनोरंजक वार्तालाप के मुख्य अंश जो एक अखबार में छपे: गुड्डू और भूरिया बोले- हमें समझा रहे हो कलेक्टर  रतलाम जिला सतर्कता समिति की बैठक में कलेक्टर के देरी […]

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मेरे निर्णयों के खिलाफ गये अरविन्द केजरीवाल :अन्ना हजारे

अरविंद केजरीवाल पर परोक्ष हमला करते हुए अन्ना हजारे ने कहा है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को राजनीति ने बांट दिया और पार्टी समर्थक समूह उनकी इच्छा के खिलाफ चला गया। अन्ना ने ब्लॉग पर लिखा है कि केजरीवाल के ही कारण उनका आंदलोन भटक गया। टीम अन्ना में दो फाड़ हो गयी। अन्ना ने कहा कि उन्होंने कभी भी राजनैतिक पार्टी की वकालत नहीं की। यह सब कुछ केजरीवाल के ही कारण हुआ और आंदोलन अपने मुद्दे से भटक गया। अन्ना ने कहा कि साल 2011 में जब आंदोलन शुरू हुआ था तो पास में कोई भी चुनाव नहीं था […]

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