न्यूज पोर्टलो में निष्पक्षता का अभाव

अखबार और टीवी चैनलो की तो पोल खुल चुकी है । अधिकांश पढे-लिखे लोगो का मानना है कि ये दोनों माध्यम अपने स्वार्थ को सर्वोपरि रखकर कोई भी समाचार प्रकाशित करते है। निष्पक्षता की बात बेमानी है। इनके कंटेट, समाचार से यह साफ़ झलकता है। एक दुसरे की प्रशंसा ये नही कर सकते क्योंकि व्यवसायिक प्रतिद्वंदिता है। एक दुसरे के खिलाफ़ भी खुलकर नही लिखते सिवाय नंबर एक वाले सर्वेक्षण के जो ग्राहक यानी विग्यापनदाता को फंसाने के लिये होता है। इन दोनो माध्यमो की असलियत को सामने लाने एवं विश्वसनियता को समाप्त करने मे मास मीडिया यानी व्यापक स्तर पर […]

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मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं

ज़िक्र भी करदूं ‘मोदी’ का तो खाता हूँ गालियां अब आप ही बता दो.. मैं इस जलती कलम से क्या लिखूं ?? कोयले की खान लिखूं या मनमोहन बेईमान लिखूं ? पप्पू पर जोक लिखूं या मुल्ला मुलायम लिखूं ? सी.बी.आई. बदनाम लिखूं या जस्टिस गांगुली महान लिखूं ? शीला की विदाई लिखूं या लालू की रिहाई लिखूं ‘आप’ की रामलीला लिखूं या कांग्रेस का प्यार लिखूं भ्रष्टतम् सरकार लिखूँ या प्रशासन बेकार लिखू ? महँगाई की मार लिखूं या गरीबो का बुरा हाल लिखू ? भूखा इन्सान लिखूं या बिकता ईमान लिखूं ? आत्महत्या करता किसान लिखूँ या शीश कटे […]

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द्रौपदी की रक्षा के लिये प्रकट हुये भगवान

पुराने साल की समाप्ति और नये साल के आगमन के साथ बहुत कुछ ऐसा घटित हुआ जिसने गया नगर निगम को शर्मसार कर दिया। 6 जनवरी की रात को पटना पुलिस ने उप मेयर मोहन श्रीवास्तव को रेप के आरोप मे अन्य दो पार्षदो के साथ गिरफ़तार किया । पटना से लेकर गया तक के अखबार एवं टीवी न्यूज चैनलो ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया और गया की जनता भी आक्रोश मे सडको पर उतर आई। सभी गुस्से मे थें, खुद को छला हुआ महसूस कर रहे थे । मैं स्तब्ध थी। समझ नही पा रही थी क्या […]

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‘आप’ से देश की अर्थव्यवस्था को खतरा

अगर अरविन्द केजरीवाल की ‘आप’ बढ़ती गयी तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार को काफी नुकसान हो सकता है, यह मानना है देश के ब्रोकर्स और व्यापारियों का। अंग्रेजी अखबार इकनोमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार उनके संवाददाताओं ने जिन ब्रोकर्स और ट्रेडर्स से बात की, उन्होंने आप की इकनॉमिक पॉलिसी की आलोचना की, लेकिन यह भी कहा कि साफ-सुथरी छवि के कैंडिडेंट्स पर पार्टी के जोर से देश की सियासत पूरी तरह बदल सकती है। केआर चोकसी शेयर्स एंड सिक्योरिटीज के एमडी देवेन चोकसी ने कहा, ‘आप की शुरुआत गलत ढंग से हुई है। अगर यह पार्टी […]

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सरकार, पुरस्कार और घाघ साहित्यकार !

-: अरुण कुमार झा  :- समाज में रचते-बसते साहित्यकार समाज के सुख-दुख से परिचित होते हैं। इसी परिचय के अनुभव को वे रचना में उतारते हैं। यह साहित्य की एक परम्परागत बात है, जिसके अनुसार साहित्य समाज का दर्पण कहा जाता है। लेकिन आज का साहित्य समाज का दर्पण कतई नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उनके साहित्य में तुरत-फुरत घटी अखबारी घटनाओं का ही विस्तार होता है और झूठ की बुनियाद पर कल्पना के सहारे रची गई मनलुभावन तस्वीर का प्रस्तुतिकरण ही मात्र होता है। आज का साहित्य सिर्फ साहित्य रचने वालों के लिए ही लिखा जा रहा है,चाहे नेट पर लिखा जा रहा […]

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एनएआई से भड़ास4मीडिया को बेस्ट न्यूज पोर्टल का अवार्ड !

बीस वर्ष पुरानी संस्थान न्यूजपेपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एनएआई) की नजर में भड़ास4मीडिया डॉट काम बेस्ट न्यूज पोर्टल है. एनएआई की तरफ से जारी एक मेल में बताया गया है कि संस्था के सदस्यों द्वारा दिए गए वोट के आधार पर ये फैसला लिया गया कि भड़ास4मीडिया को बेस्ट न्यूज पोर्टल कैटगरी का एवार्ड दिया जाए और इसके लिए तीस अक्टूबर को पोर्टल के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह को एक समारोह में सम्मानित किया जाएगा. पुरस्कार समारोह का आयोजन तीस अक्टूबर को दिल्ली में रफी मार्ग पर स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में शाम चार बजे से किया जाएगा. भड़ास के कर्ताधर्ता […]

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सूचना आयोग के सवालों में घिर गया सुप्रीम कोर्ट

आम तौर पर ऐसा नहीं होता कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ही किसी अन्य संवैधानिक एजेंसी के सवालों के घेर में आ जाये, पर आ गया है.  मामला यह है कि मुख्य सूचना आयोग को शिकायत मिली है कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने सूचना अधिकार के तहत पूछे गये एक गंभीर मामले का सवा क्या टाल गया कि मुख्य सूचना आयोग ने उसे नोटिस जारी कर दिया और निर्देश दिया है कि आइंदा 30 अक्टूबर को अपना पक्ष रखने के लिए सर्वोच्च अदालत के सीपाईओ स्तर के अधिकारी सूचना आयोग के समक्ष उपस्थित हों. अमर उजाला डॉट कॉम  की खबर के अनुसार […]

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क्या अरविंद केजरीवाल का संघर्ष एक छलावा है ?

आम जनता की हालत में अहम परिवर्तन लाने के मकसद से कभी टीम अन्ना के सदस्य रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल बिजली-पानी के दामों में हुई बढ़ोत्तरी के विरोध में अनशन पर बैठे किंतु उन्हें अपेक्षित जन समर्थन हासिल नहीं हुआ। जबकि पिछली बार जब जनलोकपाल जैसे मुद्दे को उठाकर अन्ना हजारे भूख हड़ताल पर गए थे तो मीडिया के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजरें उन पर टिकी थीं। किंतु अब अलग-थलग पड़ गए अरविंद केजरीवाल किसी भी परिदृश्य में नहीं रहे। ना ही उन्हें मीडिया फोकस कर रही है और ना ही जिस जनता के लिए उन्होंने […]

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मीडिया में घुमती सीडीः कांग्रेस और सेक्स का है पुराना रिश्ता

लोग अब मजाक में कहने लगे हैं कि जिसके पास खूब पैसा हो, सत्ता का रसूख हो और सेक्स के लिए रोज नया पार्टनर तलाश लेता हो तो समझो वो कांग्रेसी है. सेक्स और कांग्रेस का बड़ा पुराना रिश्ता रहा है. एनडी तिवारी कांड को सब लोग जानते ही हैं. राज्यपाल रहते हुए इस नेता की सेक्स सीडी बन गई थी. तब उन्हें राज्यपाल के पद से हाथ धोना पड़ा था और बाद में राजनीतिक बनवास भोगना पड़ा. ताजा कांड कांग्रेस के एक अन्य बुजुर्ग नेता का है. ये एक प्रदेश के सबसे ताकतवर कांग्रेसी नेता माने जाते हैं. इनके सुपुत्र […]

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सबाल पत्रकारिता के जातिगत ताने-बाने का

कई बार मन प्रश्न करता है कि दबंग फ़ेम सलमान खान यदि चुलबुल पांडे के स्थान पर चुलबुल चमार होते तो क्या तब भी उनकी फ़िल्में इतनी ही सुपरहिट होती? यह सवाल मेरे मन ने उस समय भी किया जब संजीव जायसवाल की फ़िल्म शुद्र द राइजिंग का बिहार में कहीं भी प्रदर्शन नहीं हुआ। सवाल उस समय भी उठता है जब बिहार सरकार अपने कार्यकाल का वर्षगांठ मनाती है और सूबे के अखबारों में सरकारी उपलब्धियों के मूल्यांकन के बजाय अभिनंदन पत्र प्रकाशित किए जाते हैं। मन पुछता है कि क्या यही पत्रकारिता है? निस्संदेह पत्रकारिता एक मुकम्मिल विषय है […]

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देश हांकने लगा है इलैक्ट्रॉनिक मीडिया

 वे दिन लद गए, जब या तो आकाशवाणी पर देश की हलचल का पता लगता था या फिर दूसरे दिन अखबारों में। तब किसी विवादास्पद या संवेदनशील खबर के लिए लोग बीबीसी पर कान लगाते थे। देश के किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर राय कायम करने और समाज को उसका आइना दिखाने के साथ दिशा देने का काम अखबार किया करते थे, जिसमें वक्त लगता था। आजादी के आंदोलन में समाचार पत्रों की ही अहम भूमिका रही। मगर अब तो सोसासटी हो या सियासत, उसकी दशा और दिशा टीवी का छोटा पर्दा ही तय करने लगा है। और वह भी लाइव। […]

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उषा मार्टिन ग्रुप के आदित्यपुर मिल से बढ़ता प्रदुषण

रेल जैसे ही धीमे-धीमे झारखंड के जमशेदपुर नगर की ओर बढ़ती है वैसे-वैसे आकाश लाल होता दिखाई देने लगता है। इसका कारण है औद्योगिक इकाई से उड़ती घनी लाल धूल जिसमें कि बिना जले कोयले की धूल एवं राख का अंबार है। यह इकाई है उषा मार्टिन समूह के स्वामित्व की एक मध्यम स्तर की लौह एवं स्टील मिल।  जमशेदपुर के एक उपनगर आदित्यपुर में करीब 120 हेक्टेयर में फैली यह मिल सन् 1974 से कार्यरत है। इस इकाई में दो छोटी (ब्लास्ट) भट्टियां, तीन कोयला आधारित स्पंज आयरन भट्टियां जिनकी क्षमता 350 टन प्रतिदिन है और तीन बिजली चलित भट्टियां […]

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