सरकारी पैसे से राजनेताओं की मार्केटिंग पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

राजनामा.कॉम। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी पैसे से थोक भाव में मंत्रियों और नेताओं की मार्केटिंग पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि सरकारी विज्ञापनों में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर अन्य किसी भी व्यक्ति की फोटो या विजुअल न लगाया जाए। जिन तस्वीरों की छूट कोर्ट ने दी है, उनका इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह फैसला सरकार पर ही छोड़ दिया गया है, लेकिन इनमें से किसी के भी फोटो का इस्तेमाल करने से पहले उसकी सहमति लेना जरूरी होगा। साफ है कि विज्ञापन प्रकाशित होने पर एक तरह की जवाबदेही उस व्यक्ति विशेष पर […]

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विवाद ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’ रहित संविधान के विज्ञापन का

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस विज्ञापन को लेकर आज विवाद उत्पन्न हो गया जिसमें 42वें संविधान संशोधन से पहले वाले संविधान की प्रस्तावना छपी हुई है जिसमें ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्द नहीं हैं। कांग्रेस नेता और पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर केंद्र पर हमला करते हुए दावा किया कि सरकार के विज्ञापन में दो शब्द ‘‘हटा दिए गए.’’ बहरहाल सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके मंत्रालय ने प्रस्तावना के ‘‘मूल’’ चित्र का प्रयोग किया, जो संशोधन के पहले का है ताकि पहली प्रस्तावना […]

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न कोई नैतिकता और न कोई समर्पण !

मानना पड़ेगा कि इस देश में मीडिया के पास न तो कोई नैतिकता है और न ही वह इस देश के लिए समर्पित है। प्रमाण यह है कि 26 जनवरी की पूर्व संध्या राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने देशवासियों को संबोधित किया और पटना में प्रकाशित तथाकथित बड़े और राष्ट्रवादी अखबारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के आगे अपने देश के राष्ट्रपति को नकार दिया और पहले पन्ने पर एक ईंच भी जगह नहीं दी। वैसे बात केवल इतनी होती कि भारतीय मीडिया ने “घर का जोगी जोगरा, आन गांव का सिद्ध” वाली कहावत को चरितार्थ किया तो बात समझ में आती। लेकिन केंद्र […]

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देश के लिये खतरनाक है प्रधानमंत्री की चुप्पी

विपक्ष में रहकर नरेन्द्र मोदी तत्कालीन केंद्र सरकार पर अतार्किक तंज कसते थे । भरी दुपहरी में बड़ी-बड़ी बातों के तारे दिखाते थे। बातों ही बातों में तमाम सामाजिक बुराईयों, अपराधों को खत्म करने के साथ-साथ 56 इंच का सीना दिखाने का दावा करते थे। पाकिस्तान और चीन को तो पता नहीं दिन में कितनी बार इस्लामाबाद और शंघाई जाकर हरा कर आते थे।  कितने ही भ्र्ष्टाचारियोँ को चित करते थे, बलात्कारियों को सरेआम सजा दिलवाने का वादा करते थे। युवाओं के लिए महज चंद दिनों में लाखों नौकरियों की बात करते थे। हरेक भारतीय के बैंक खातों में एक बहुत बड़ी […]

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मेहमानों को भी बेइज्जत करने से नहीं चूके झारखंडी अफसर

राजनामा.कॉम।  सैफ खेलों के उद्घाटन के दौरान आम जन को पहले तो निमंत्रण देकर बुलाया गया फिर सुरक्षा का हवाला देकर पूरी बेइज्जती की गयी। मुख्य द्वार के पास लोगों को पानी के बोतल लेकर फेंक दिए गये, कैमरा ले जाने की अनुमति नहीं दी गयी और हेलमेट तक बाहर रखवाया गया। जिसके कारण अनेक लोगों के हेलमेट चोरी चले गये। ऐसा क्यों किया जा गया, इसका जवाब कोई नहीं दे सका। कहा जाता रहा कि ऊपर से आदेश है। अब ऊपर से आदेश देने वाले क्या कुछ सोचते समझते नहीं। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर लोगों को बुलाया गया, फ्री […]

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कानू सान्याल की तस्वीर से मचा हड़कंप

राजनामा.कॉम।   पश्चिम बंगाल सरकार के विज्ञापन में ही नक्सली नेता कानू सान्याल की तस्वीर लग जाने से हड़कंप मच गया है. जीते जी कानू सान्याल ने चरम आर्थिक संकट में जीते रहने के बावजूद दूसरे माओवादी या नक्सली नेताओं की तरह सरकारी मदद नहीं ली और न उन्होंने अपनी विचारधारा बदली. जाहिर है कि दिवंगत नक्सली नेता के परिजनों ने सरकारी विज्ञापन में कानू सान्याल की तस्वीर लगाने का कड़ा विरोध किया है. यह विज्ञापन लगभग सभी बड़े अखबारों में प्रकाशित हुआ है और इस मामले को यूं ही रफा दफा करने का कोई उपाय भी नहीं है. दरअसल इस साल […]

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गलत तस्वीर पेश कर रही है बिहार की मीडिया

सरकार की अच्छाई और बुराई को उजागर करनेकी भूमिका निभाने वाले बिहार के हिन्दी और अंग्रेजी भाषाई आइना इन दिनों चूर-चूर हो गयाहै। मीडिया में बिहार की गलत तस्वीर पेश की जा रहीहै। बिहार की राजधानी पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को खुश करने के लिए प्रथम पृष्ठ पर कुछ उत्साहवर्द्धक और जीवंत खबरें छप जरूर  रही हैं ,परन्तु बिहार के 38 जिलों में जिलाबार छपनेवाले हिन्दी अखबारों में जो खबरें इनदिनों छप रहीं हैं,वह खबरें सरकार के प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारियों के मनोबल को तोड़ने के लिए छापी जा रहीहै । बिहार के जिलों में वितरित होर हे जिलावार […]

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पत्रकारों के शोषण का अड्डा बना सन्मार्ग मीडिया हाउस !

झारखंड की राजधानी रांची का एक मीडिया समूह प्रसार संख्या का फर्जी आंकड़ा दिखाकर सरकारी विज्ञापन तो बड़े अख़बारों के समकक्ष उठा रहा है,लेकिन कर्मियों को तयशुदा वेतन और सुविधाएं देने में भी टाल-मटोल का रवैया अपना रहा है। कहते हैं कि रांची से प्रकाशित दैनिक सन्मार्ग समाचार पत्र का फ्रेंचाइजी होने के नाते इस बैनर के नाम पर आने वाले विज्ञापन का एक तयशुदा प्रतिशत मूल प्रकाशक को देना पड़ता है। इसलिए इसके डाइरेक्टर प्रेम ने एक उर्दू और एक अंग्रेजी दैनिक का प्रकाशन भी शुरू किया। उर्दू दैनिक आवामी न्यूज़ का डीएवीपी और आईपीआरडी हो चूका है लेकिन, अंग्रेजी अखबार मॉर्निंग […]

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झारखंड जागरण: तीन राज्यों से उड़ा रहा सरकारी विज्ञापन

आज रांची, पटना, लखनऊ जैसे शहरों में सैकड़ों ऐसे समाचार पत्र-पत्रिकायें प्रकाशित हो रही है ,जिसका मूल मकसद प्रति माह लाखों के विज्ञापन लूटना मात्र है। इसी की एक कड़ी में ताजा उदाहरण बन कर सामने आया है एक हिन्दी दैनिक झारखंड जागरण का नाम। प्राप्त सूचना के अनुसार  रांची से झारखंड जागरण नाम का एक दैनिक अखबार पिछले कई वर्षों से प्रकाशित हो रहा है, जिसे झारखंड,बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों के लाखों के विज्ञापन  प्रतिमाह मिलते हैं। यह अखबार सिर्फ सरकारी दफ्तरों के लिए छपता है। वह भी बमुश्किल डेढ़-दो हज़ार। क्योंकि  तीनो राज्यों समेत केंद्र सरकार के सूचना-प्रसारण मंत्रालय […]

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संजीवनी के इस महाभोज में सबने छक कर खाया

बोलने और सुनने में बड़ा प्यारा लगता है कि ‘‘शिक्षा वही, जो सच्चा इंसान बनाए’’, लेकिन क्या ऐसा कभी संभव है? समाज और राज के चरित्रा में दिनों-दिन क्षरण जारी है। उनका नैतिक क्षरण बहुत तेजी से हो रहा है। जिन पर कानून बनाने की जिम्मेदारी है, वही घोड़े की तरह बिक रहे हैं। इस खरीद-फरोख्त के रेस में वे गर्व से शामिल होते हैं। तनिक लज्जा नहीं कि मनुष्य होकर भी जानवरों की तरह बिकते हैं। ये कैसी विडंबना है? पिछले माह पूरे देश के जनमानस में निर्मल बाबा द्वारा की गयी ठगी की चर्चा छायी रही, तो राँची में […]

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झारखंडी सत्ता वनाम मीडिया मैनेजमेंट

राज़नामा.कॉम। समझ में नहीं आता है कि आखिर एक हाई प्रोफाइल मैनेजमेंट के तहत  झारखंड में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे भाजपा के अर्जुन मुंडा को हो क्या गया है। सबसे बड़ी बात कि यहां की मीडिया को सत्ता के तलवे चाटते-चाटते उसकी जीभ के लार कम क्यों नहीं होते। गौर से देखिये इस तस्वीर को। यह तस्वीर बिल्कुल धोखा खाने वाली ही है।  यह तस्वीर है मुख्यमंत्री सचिवालय की सीढ़ियों पर बैठे श्री मुंडा एंव उनके लाव-लश्कर की।  और सामने है पूर्व प्रायोजित एक नहाई-धुहाई एक गंवई जीवन शैली वाली बच्ची की।  बात चाहे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की हो या प्रिंट मीडिया […]

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