काली कमाई के बल चल रहा है दैनिक सन्मार्ग

राज़नामा.कॉम (संवाददाता)। झारखंड में हिन्दी दैनिक सन्मार्ग शराब-शबाब के कारोबारियों के काली कमाई के बल चल रहा है। इसका खुलासा राजधानी की सड़कों पर पटे एक “बीयर बार-रेस्टुरेंट” और इस अखबार के संयुक्त विज्ञापन की पड़ताल के बाद सामने आया है।  अमुमन पुलिस-यातायात स्थल पर शोभयान दोनों धंधे का विज्ञापन रैक्सिन के एक ही टुकड़े पर प्रकाशित है। अखबार जहां खुद को झारखंड का नं.1 बता रहा है, वहीं ओवर ब्रीज के सटे स्थित “बीयर बार-रेस्टुरेंट” का विज्ञापित दृश्य किसी को भी शर्मशार करने के लिये काफी है। यह दीगर बात है कि पूरे ताम-झाम के बीच अखबार की कीमत मात्र […]

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राजनीति की पोल खोलता एक पत्रकार

राज़नामा.कॉम। काले धन की महिमा अपरंपार है। नेताओं का काला धन भले ही विदेश से नहीं आ पाया लेकिन राजनीति और काले धन में किस कदर गठजोड़ है इसका अंदाजा चुनाव आयोग की सख्ती से पकड़़े गए करोड़ों रुपए को देखकर लगाया जा सकता है। टिकट बेचने की बात राजनीतिक गलियारों में अब खेल नहीं है, लेकिन काले धन का सियासी गणित समझने के लिए कैनविज टाइम्स के विशेष संवाददाता दिनेश चंद्र मिश्र पहुंच गए टिकटार्थी बनकर राजनीतिक पार्टियों की मंडी में। यह संवाददाता जब टिकटार्थी बनकर उत्तर प्रदेश विधानभवन के सामने दारुलशफा जाने वाले गेट के रास्ते सत्याग्रह मार्ग पर […]

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“बाबा” को दबोचने सन्मार्ग पहुंचे “बब्बर”

राज़नामा.कॉम, मुकेश भारतीय। झारखंड की राजधानी रांची की पत्रकारिता में एक से एक धुरंधर भरे पड़े हैं, जो बिल्डरों- माफियाओं के इशारों पर नाचते फिर रहे हैं। ऐसा ही ताजा उदाहरण है- न्यूज़11 चैनल के एडीटर इन चीफ हरिनारायण सिंह का अचानक एक बिल्डर-माफिया प्रेम शंकरण की रहनुमाई में प्रकाशित दैनिक अखबार सन्मार्ग पहुंचना। कहते हैं कि मधु कोड़ा के लूटराज में डूबकी लगाने वाले आला पत्रकार हरिनारायण सिंह पत्रकारिता के सेक्रेट बाबा यानि प्रधान संपादक बैजनाथ मिश्र को दबोचने के लिये सन्मार्ग पहुंचे हैं। चूकि श्री सिंह का श्री मिश्र की अपेक्षा वित्तीय राज प्रबंधन काफी मजबूत है, इसलिये उनका […]

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न सरकार न पुलिस, सिर्फ दैनिक जागरण

राज़नामा.कॉम (मुकेश भारतीय)। बिहार हो या झारखंड। पटना हो या रांची। महिला हो या हरिजन। थाना से लेकर मुख्यालय तक। हर जगह एक ही नज़ारा। न कहीं बिहार-झारखंड पुलिस और न कहीं बिहार-झारखंड सरकार का नाम! सिर्फ और सिर्फ दैनिक जागरण का नाम। अब आप इसे क्या कहेगें? क्या सरकार या उसके पुलिस विभाग के पास अपना नामाकंरण करने के पैसे नहीं है या अखबार के सामने उसकी सिट्टी-पिट्टी गुम है। जबकि आम नागरिक के एक बड़ी आबादी पर इसका कुप्रभाव यह पड़ रहा है कि वे इस अखबार से जुड़े एक अदद संवाददाता/कर्मी को पुलिस विभाग से सीधा जुड़ा महसुस […]

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कंटेंट को फिल्टर-ब्लॉक करना प्रैक्टिकली असंभव :गुगल

राज़नामा.कॉम। आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने के मुकदमे की सुनवाई के दौरान गूगल इंडिया ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि इंटरनेट पर मौजूद सामग्री को फिल्टर करके ब्लॉक करना प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है क्योंकि एक शब्द को ब्लॉक करने पर उससे जुड़े सभी कंटेंट ब्लॉक हो जाएंगे। जैसे अगर सेक्स शब्द को ब्लॉक किया जाए तो पासपोर्ट आदि जहां-जहां इस शब्द का इस्तेमाल होगा, उसकी डिटेल ब्लॉक हो जाएगी। गूगल इंडिया की ओर से पेश वकील एन.के. कौल का कहना था कि भारत लोकतांत्रिक देश है। अभिव्यक्ति की आजादी यहां नागरिकों का मूल अधिकार है। यहां की तुलना चीन से नहीं हो […]

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टाइम्स ऑफ इण्डिया ग्रुप की वेशर्मी की हद

राज़नामा.कॉम। टाइम्स ऑफ इण्डिया अखबार ने एक नई मीडिया संस्कृति को प्रचारित की है। वह सैलीब्रिटी लोगों को कवरेज देने के नाम पर पोर्न स्टारों से लेकर नग्नता तक सबका महिमामंडन कर रहा है। स्वस्थ संस्कृति और लोकतांत्रिक पत्रकारिता में नग्नता का कोई स्थान नहीं है।यह अखबार नग्नता का अखबार में कम इंटरनेट पर ज्यादा प्रचार कर रहा है। सवाल यह है कि नग्नता का प्रदर्शन सरकार रोक क्यों नहीं रही है ? अत्यंत चिंतनीय बात तो यह है कि कामुकता-स्नान के इस तरह फोटोग्राफ किस तरह के लोगों के हैं , ये फोटो कहीं समानान्तर अंधलोक के कामुक मस्तानों के […]

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उपेक्षा न गई भारतीय खेलों की दर से

राज़नामा.कॉम (दिलीप)। भारतीय कबड्डी टीम ने इस बार कबड्डी का वर्ल्डकप जीता तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई. सच मानो तो मै फुला नहीं समा पाया. बचपन में मै भी कबड्डी खेला करता था लेकिन वो मेरा देहाती खेल था इसीलिए में उसको ज्यादा… तवज्जो देता था. लेकिन यह कभी नहीं सोचा था कि भारतीय टीम कभी कबड्डी में भी वर्ल्डकप जीतकर लाएगी वो भी महिला टीम . एक बार पुरुषो से तो उम्मीद की जा सकती थी लेकिन महिलाओ से नहीं, हमारे भारतीय ग्रामीण खेल गुल्ली डंडा, कबड्डी, खो – खो और हाकी ये तमाम ऐसे खेल है जो विदेशी खेलो […]

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अन्ना एंड बाबा का गुल्ली डंडा

राज़नामा.कॉम (कमल कुमार सिंह) ।  भावना एक एसी भावना है, जिसमे एक होने कि पूरी “संभावना” होती है, भारत पाकिस्तान को ही देख लीजिए, जब तक आपस में न खेले, एक होने कि नौबत ही नहीं आती है, चाहे क्रिकेट का खेल हो या बोर्डर का. बोर्डर की खेल भावना जादा प्रबल है, दोनों समान भावना के साथ एक दूसरे पे ठायं – ठायं और दोनों तरफ के सैनिक पृथ्वी छोड़ स्वर्ग में एक हो जाते है. क्रिकेट में तो फिर भी दान- दक्षिणा का प्रभाव है. दान -दक्षिणा प्रभाव की तो जितनी भी प्रशंशा कि जाए कम है. राजा बलि […]

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भारतीय दवा कारोबार पर विदेशी कंपनियों का कसता शिकंजा

राजनामा.कॉम। देश के दवा कारोबार पर विदेशी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ता ही जा रहा है, एक के बाद एक छोटी-बड़ी भारतीय दवा कंपनियाँ विदेशी कंपनियों के हाथों बिकती जा रही है, जिससे भारतीय दवा कंपनियों पर विदेशी कंपनियों का कब्जा शुरू हो गया है वर्ष 2001 में दवा क्षेत्र को सौ फीसदी विदेशी निवेश के लिये खोला गया था और उस समय से लेकर अब तक कई भारतीय कंपनियाँ विदेशी हाथो में जा चुकी है छोटी कंपनियों में निर्णायक हिस्सेदारी खरीदने का चलन तो नब्बे के दशक से ही शुरु हो गया था लेकिन बड़ी कंपनियों के बिकने का सिलसिला पिछले […]

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भारतीय संस्कृति का मूल आधार है गाय

गाय एक महत्त्वपूर्ण पालतू जानवर है। इससे हमें उत्तम किस्म का दूध प्राप्त होता है। रेड सिन्धी, साहिवाल, गिर, देवनी, थारपारकर आदि नस्लें भारत में दुधारू गायों की प्रमुख नस्लें हैं। भारत में गाय की 28 नस्लें पाई जाती हैं। हिन्दू, गाय को ‘माता’ (गौमाता) कहते हैं। हिन्दू धर्म में यह विश्वास है कि गाय देवत्व और प्राकृतिक कृपा की प्रतिनिधि है, और इसलिए इसकी रक्षा तथा पूजा की जानी चाहिए। हिन्दू धर्म में गाय की पूजा का मूल आरंभिक वैदिक काल में खोज जा सकता है। भारोपीय लोग, जिन्होंने दूसरी सहस्राब्दी ई.पू. में भारत में प्रवेश किया, वे पशुपालक थे। […]

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