विदेशी लहर है भारत पहुंची “बेशर्मी मोर्चा”

स्‍लट वॉक यानि “बेशर्मी मोर्चा”। क्‍या आपको पता है कि स्‍लट वॉक का असल मतलब क्‍या होता है और इसका जन्‍म कहां हुआ। अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं। स्लट वॉक यानी बेशर्मी मोर्चा की नींव कनाडा के टोरंटो शहर में उस समय पड़ी, जब दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं के लिए एक पुलिस अधिकारी ने भड़काऊ कपड़ों को प्रमुख कारण बताया। अधिकारी ने महिलाओं को संयमित परिधान पहनने की सलाह दी थी। ……. आगे पढ़े

Read more

दिल्ली से लखनऊ पहुंचा "बेशर्मी मोर्चा" :किया भौंडा प्रदर्शन

महिलाओं से छेड़छाड़ की बढ़ती वारदातों, बलात्‍कार, यौन शोषण और छिटाकशी की घटनाओं को रोकने के लिये दिल्‍ली में पहली बार स्‍लट वॉक यानी कि बेशर्मी मोर्चा निकाला गया। दिल्‍ली के बाद अब इस मार्च ने उत्‍तर प्रदेश की तरफ रुख किया है।आगामी दिनों में राजधानी लखनऊ में यह मोर्चा निकाला जायेगा…… आगे पढ़े

Read more

सावधान !! सुअर की चर्बी खा रहे हैं हम और हमारे बच्चें

“Laysचिप्स के पैकेट में दरअसल सूअर की चर्बी है ” इस बात को लेकर कुछ अरसे पहले पाकिस्तान में काफी हंगामा हुआ था,जिस पर ढेरों आरोप और सफाइयां दस्तावेजों सहित मौजूद हैं। हैरत की बात यह दिखी कि इस पदार्थ को कई देशों में प्रतिबंधित किया गया है किन्तु अपने देश में धड़ल्ले से उपयोग हो रहा। मूल तौर पर यह पदार्थ सूअर और मछली की चर्बी से प्राप्त होता है और ज्यादातर नूडल्स, चिप्स में स्वाद बढाने के लिए किया जाता है। रसायन शास्त्र में इसे Disodium Inosinate कहा जाता है जिसका सूत्र है C10H11N4Na2O8P1 होता यह है कि अधिकतर […]

Read more

भारतीय मीडिया के खेवनहार या खिचड़ी परिवार

मीडिया दो तबके के ही लोगों के लिए है। एक तो आर्थिक रुप से बहुत कमजोर…औरदूसरा जो आर्थिक तौर पर मजबूत है और तीसरा तबका जो मध्यवर्गीय है, जो मीडिया में तो आ जाता है, लेकिन अपने को भंवर में फंसा महसूस करता है इसका राज है… अरुंधती रॉय, प्रणय रॉय (नेहरु डायनेस्टी टीवी- NDTV) की भांजी हैं। -प्रणय रॉय “काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशन्स” के इंटरनेशनल सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं। -इसी बोर्ड के एक अन्य सदस्य हैं मुकेश अम्बानी। -प्रणय रॉय की पत्नी हैं राधिका रॉय। -राधिका रॉय, वृन्दा करात की बहन हैं। -वृन्दा करात, प्रकाश करात (CPI) की पत्नी […]

Read more

पत्रकार वनाम झारखंड सरकार की रेवड़ियां

झारखंड सरकार की मीडिया फेलोशिप समिति द्वारा अनुसंशित जिन 30 में 26 उम्मीदवारों (पत्रकारों) को सरकार ने 50-50 हजार रुपए की फेलोशिप प्रदान करने की घोषणा की है, उनका गहन अवलोकन करने पर यह साफ जाहिर होता है कि मुंडा सरकार ने झारखंड की पत्रकारिता के एक खास वर्ग के चहेतों के बीच मात्र रेवड़ियां बांटने का कार्य की है। जिन पत्रकारों को इसका लाभ मिलनी चाहिए, उसे नहीं मिलने की परंपरा कायम रखते हुये इसमें पारदर्शिता नहीं बरती गई है और यदि इसकी न्यायपूर्ण जांच की जाए तो सबकी कलई खुलनी तय है। चयन समिति में कई ऐसे लोग हैं,जिनसे […]

Read more

सीएम अर्जुन मुंडा के प्रेस कॉन्फ्रेस में हावी रहे झारखंड के चिरकुट पत्रकार

आज झारखंड के सीएम अर्जुन मुंडा की प्रेस कॉन्फ्रेंस था। उसे देखकर यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि यहां के पत्रकारों में जनमुद्दों पर सवाल खड़े करने की इच्छाशक्ति ही नहीं बची है । वेशक यह एक सरकारी आयोजन था, जिसे हर मोर्चे पर विफल सीएम ने अपनी कामयाबी का ढिंढोरा पीटने के लिए आयोजित किया गया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेस में पत्रकारों एक बड़ा समुह लीक से हटकर सवाल कर रहे थे। उससे साफ जाहिर होता है कि यहां के पत्रकार कितने बड़े चिरकुट हैं। बात यही खत्म नही होती। सत्ता पक्ष से जुड़े़ एक खास वर्ग […]

Read more
1 197 198 199