कहानी

सुमेश दोषी ने अस्सी के दशक में देहरादून से दिल्ली आकर पत्रकारिता की शुरुआत की थी। दिल्ली में उन दिनों आंचलिक पत्रकारों की खूब पूछ थी। सुमेश दोषी ने भी हाथ-पैर मारने शुरू किए, लेकिन किसी ने हाथ नहीं रखने दिया। एक बड़े अंग्रेजी दैनिक के मालिकान ने उन्हीं दिनों अपना हिंदी अखबार शुरू किया। हिंदी अखबार म...
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एक बार एक आदमी को अपने बाग़ में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने ध्यान किया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया है. उस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश क...
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किसी गांव में मित्रशर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था। एक बार वह अपने यजमान से एक बकरा लेकर अपने घर जा रहा था। रास्ता लंबा और सुनसान था। आगे जाने पर रास्ते में उसे तीन ठग मिले। ब्राह्मण के कंधे पर बकरे को देखकर तीनों ने उसे हथियाने की योजना बनाई। एक ने ब्राह्मण को रोककर कहा, “पंडित जी यह आप अपने कंधे प...
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कंचनपुर के एक धनी व्यापारी के रसोईघर में एक कबूतर ने घोंसला बनाया हुआ था। एक दिन एक लालची कौआ उधर आ निकला। वहां मछली को देखकर उसके मुंह में पानी भर आया। तब उसने सोचा, मुझे इस रसोईघर में घुसना चाहिए, पर कैसे? तभी उसकी निगाह कबूतर पर जा पड़ी। उसने सोचा कि यदि मैं कबूतर से दोस्ती कर लूं तो शायद बात बन ...
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एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मजे से रहता था। एक दिन वह दाना पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुंच गया। वहां खाने पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में वहीं बीतने लगे। इधर शाम को एक खरगोश उस पेड़ के पास आया जहां चिड़े का घोंसला था। पेड़ ...
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हर किसी को हर किसी से सीखना चाहिएः यूनानी दार्शनिक अफलातून के पास आए दिन अनेक विद्वानों का जमावड़ा लगा रहता था। सभी उनसे कुछ न कुछ ज्ञान प्राप्त करके जाया करते थे। लेकिन स्वयं अफलातून अपने को कभी भी ज्ञानी नहीं मानते थे और स्वयं कुछ नया सीखने में लगे रहते थे। कई बार तो वह छोटे-छोटे बच्चों व युवाओं स...
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किसी वन में एक विशाल सरोवर था। उसमें तरह-तरह के जीव-जन्तु रहते थे। उन्हीं जन्तुओं में एक बगुला भी था। जवानी के दिनों में तो उसकी गर्दन में इतनी लोच, नजर में ऐसा पैनापन और चोंच में ऐसी पकड़ हुआ करती थी कि भूले-भटके भी कोई मछली उसके पास पहुँच जाती तो उसकी चोंच में दबकर उसके पेट की ओर सरक जाती थी। अब व...
Posted in: अपना भारत, आवाम, इंटरनेट, कहानी, फेसबुक की हलचल, समाचार, साहित्य
Tags: baba ramdeo, story, कथा, जंगल, पंचतंत्र, बाबा रामदेव
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