800 अखबारों को अब नहीं मिलेंगे सरकारी विज्ञापन, 270 पर FIR दर्ज

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सरकारी विज्ञापन पाने वाले 800 प्रकाशनों को विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) की सूची से हटा दिया गया है, जबकि 270 फर्जी अखबारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इस बात की जानकारी मंगलवार को केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने दी।

उन्होंने कहा कि ‘विकास’ सुखिर्यों में रहना चाहिए, न कि ‘अवरोध में।’ केंद्रीय मंत्री नायडू ने आगे कहा, ‘मैं चाहता हूं कि वास्तविक प्रकाशकों को ही सरकार का समर्थन मिले।’ उन्होंने बताया कि 800 से अधिक प्रकाशनों को सरकारी विज्ञापन प्राप्तकर्ताओं की सूची से हटा दिया गया और 270 फर्जी अखबारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।’

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र में 18,000 पंजीकृत प्रकाशकों में से केवल 2,000 प्रकाशकों ने ही पिछले पांच सालों में वार्षिक विवरण दाखिल किया है। फर्जी अखबारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात करते हुए नायडू ने कहा कि अन्य सभी अखबारों की स्क्रीनिंग की जाएगी और जो फर्जी पाया गया उनके विज्ञापन रोक दिए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि छोटे अखबार सहीं है, लेकिन उनका भी कुछ कर्तव्य बनता है। नायडू ने आगे कहा कि सार्वजनिक धन उन समाचारपत्रों पर बिल्कुल खर्च नहीं किए जाएगा, जो प्रकाशित ही नहीं होते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि लखनऊ में एक प्रेस में सिर्फ 65 अखबार छपे हुए पाए गए थे।

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