21 दिन बाद भी सुपरविजन नहीं, बीडीओ पर मेहबान है रांची पुलिस !

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रांची। झारखंड के सीएम जो भी मंशा रखते हैं, उसका कहीं कोई खास असर देखने को नहीं मिलता। बात जब पुलिस महकमे की हो तो स्थिति और भी वद्दतर नजर आती है।

सीएम रघुवर दास ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि पुलिस महकमा सुपरविजन के नाम पर खेला न करे। इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और पुलिस के प्रति आम लोगों के मन में अविश्वसनीयता बढ़ती है।

लेकिन यदि हम रांची पुलिस की ही बात करें तो यहां सुपरविजन के नाम पर सिर्फ खेला होता है। ऐसे कई उदाहरण हैं।

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सीडब्ल्यूसी के सहायक श्रमायुक्त लक्ष्मी कुमारी के साथ नाबालिग पीड़िता

बहरहाल, बीआईटीके गौतम ग्रीन सिटी से 20 सितंबर को बीडीओ रजनीश कुमार सिंह के आवास से मुक्त कराई गई आठ साल की बच्ची के मामले में अबतक सुपरविजन रिपोर्ट नहीं हो सकी है। इसकी वजह से उनकी गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है।

जबकि बच्ची का 164 के तहत बयान दर्ज कराया जा चुका है और 27 सितंबर को मेडिकल टेस्ट भी हो चुका है। इसके साथ ही बीडीओ ने श्रम विभाग में एक्ट के अनुसार 20 हजार रुपए जुर्माने की राशि भी जमा करा दी है।

इस मामले में 21 सितंबर को मेसरा ओपी में बीडीओ के खिलाफ एफआईआर ( धारा 341, 342, 323, 325, 370, 34, जेजे एक्ट 75/79, चाइल्ड लेबर एक्ट और एसटी- एससी एक्ट) दर्ज हुई थी। बीडीओ के घर से सीडब्ल्यूसी के निर्देश पर सहायक श्रमायुक्त लक्ष्मी कुमारी, चाइल्ड लाइन के सुजीत गोस्वामी और मेसरा ओपी पुलिस ने बच्ची को मुक्त कराया था।

इधर, इस मामले में डीएसपी सदर का कहना है कि मामले का सुपरविजन नहीं हो सका है। जल्द ही सुपरविजन रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई हो सकेगी।

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उल्लेखनीय है कि बीडीओ के घर से मुक्त कराई गई बच्ची को 20 सितंबर से ही प्रेमाश्रय में रखा गया है। बच्ची से उसके माता -पिता 15 दिनों के अंदर ही दो बार मिल चुके है, जबकि प्रावधान है कि 15 दिन में एक ही बार बच्ची से माता- पिता मिल सकते हैं।

बार -बार बच्ची से मिलने से यह भी संभावना जताई जा रही है कि कहीं उस पर अपना बयान बदलने का दबाव तो नहीं बनाया जा रहा है।

बच्ची ने पहले दिन जो बयान सीडब्ल्यूसी मेंबर्स के समक्ष दिया था, वहीं बयान उसने 164 के तहत भी दिया है। उसका बयान 26 सितंबर को न्यायिक दंडाधिकारी लक्ष्मीकांत के कोर्ट में दर्ज हुआ। बयान दर्ज होने के बाद बच्ची को पुन: दोबारा पांच अक्टूबर को कोर्ट में बुलाया गया। लेकिन तब भी बच्ची उसी बयान पर कायम रही।

बच्ची ने बयान दिया है कि बीडीओ की पत्नी मोनालिसा उसे कलछुल से बुरी तरह से मारती-पीटती थी। रोज सुबह छह से रात 10.00 बजे तक घरेलू काम कराया जाता था। आठ साल की नाबालिग बच्ची बीडीओ के घर में सितंबर 2015 से ही नौकरानी का काम कर रही थी।

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