काश रामजीवन बाबू की ‘संचिका’ को चिदम्बरम तक समझ पाते!

“वर्ष1990: बिहार में कांग्रेस को हटाकर जनता दल सत्ता में आयी थी। लालू प्रसाद मुख्य मंत्री बने थे। उनके एक मंत्री थे पुराने सोशलिस्ट रामजीवन सिंह। उन्हें कृषि, पशुपालन, मत्स्य सहकारिता मंत्री बनाया गया था……………..” हर नई सरकार की तरह पुरानी सरकार की फाईल खंगाली जा रही थी। सत्ता के गलियारे […]

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वेशक यह व्यंग्य मात्र नहीं, कतिपय सरकारी स्कूल का आयना है

“मंगरुआ सहमा हुआ, एक कोना में देवाल से चिपका जा रहा था और फुलेसर मास्टर एक हाथ मे डंडा तो दूसरे हाथ मे मंगरुआ की काँपी लेकर उसकी ओर बढ़े आ रहे थे………….” मास्टर साहेब फिर चिचियाये- अबे बोलता काहे नहीं है? क्या एहि पढ़ाए थे हम्म ? मंगरुआ हिम्मत करके […]

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