हे मोदी जी! इस कानून को ख़त्म कीजिये, देश मुस्कुरा उठेगा

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न्याय का शासन, न्याय पर आधारित अर्थव्यवस्था और कल्याणकारी राज सबको चाहिए लेकिन सरकार ऐसा नहीं चाहती। अगर ऐसा हो गया तो संपत्ति के मालिक और सम्पत्तिहीन में भला अंतर कैसे होगा ? फिर धन और धनधारी की क्या विसात ? कौन पूछेगा इन्हें ? समानता की बात कहने के लिए तो ठीक है लेकिन समानता लाना भला कौन चाहता ? क्या लोकतंत्र के चारो स्तम्भ से जुड़े धनधारी समानता चाहते है ? क्या सरकार वाकई में समानता पर आधारित समाज चाहती है ?

 अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ लेखक पत्रकार 'अखिलेश अखिल '
अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ लेखक पत्रकार ‘अखिलेश अखिल ‘

इन तमाम सवालो के उत्तर ना में है। कोई नहीं चाहता की समाज में गरीबी और अमीरी की खाई कम हो। जिस दिन कमजोर होगी धनधारियो की राजनीति , सम्पती लुटेरो के खेल उसी दिन दलाल संस्कृति समाप्त हो जायेगी।

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जाता है कि वे संत प्रवृति के है और संपत्ति से उन्हें कोई लोभ ,मोह नहीं है। वे देश को शक्तिशाली बनाना चाहते है और आर्थिक रूप से मजबूत भी । देश के बहुत सारे लोग भी यही चाहते है। फिर दिक्कत क्या है ?

 सबसे बड़ी दिक्कत है देश में बिराजमान निजी सम्पाती गोपनीयता का कानून। अगर इस कानून को ख़त्म कर दिया जाय तो देश आर्थिक रूप से चंगा हो जाएगा। सम्पत्तिवान १२ लाख लोगो की संपत्ति से होने वाली आय से कोई २ लाख करोड़ की आय होगी।

हमारा बजट तो महज २५ से ३० लाख करोड़ का ही बनता है, वह भी घाटे का बजट। कर्ज पर आधारित बजट। देश में अमन चैन। लेकिन सरकार के लोग ऐसा नहीं चाहते। इसलिए देश को जरुरी है गरीबी रेखा की बजाय अमीरी रेखा बनाने की।

हमारे देश में निजी संपत्ति की गोपनीयता का कानून बना हुआ है। इस कानून के मुताविक देश के नागरिक जो केंद्र सरकार को अपना आयकर रिटर्न भरते है , उसके बारे में देश का कोई अन्य नागरिक न तो कोई जानकारी ले सकता है और न ही उसकी प्रतिलिपि प्राप्त कर सकता है।

एक आजाद देश में ऐसा कला कानून। यह कानून देश के नागरिको के सम्मान ,देश की संपत्ति के स्वामित्व के अधिकार , गरिमा। स्वतन्त्रता और लोकतंत्र की पारदर्शिता के प्रावधानों के विपरीत है।

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