हाय री नालंदा की मीडिया, भ्रष्ट्राचार के विस्फोटक न्यूज को यूं पचा गये!

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राजनामा न्यूज डेस्क। बिहार के नालंदा जिले की मीडिया को लेकर एक बड़ी रोचक खबर सामने आई है। जिप अध्यक्षा तनुजा देवी ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण कर भारी गड़बड़ियां पकड़ीं। कल ये गड़बड़ियां उस दौरान उजागर हो रहे थे, जब जिला के डीएम-डीडीसी को लेकर राष्ट्रीय मनरेगा पुरस्कार की सुर्खियां लहरा रही थी।

वेशक जिप अध्यक्षा की जमीनी पड़ताल काबिले तारीफ है। उन्होंने ग्रामीण विकास के साथ अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के हितकारी इस योजना का आयना सामने लाने का सार्थक प्रयास किया, जोकि उनका अधिकार, कर्त्वय और जबावदेही भी है।

लेकिन इस मामले को लेकर नालंदा की मीडिया में जो कुछ नजर आया है, वह कई सबाल खड़े करते हैं। जिप अध्यक्षा का गांवों के खेत-खलिहान और गलियों में जाकर विकास योजनाओं का मुल्यांकण करने के बाद बनी परिस्थियां कोई छोटी बात नहीं है। फिर भी आज के एक अखबार नव बिहार टाइम्स को छोड़ कर किसी भी अखबार में कोई जिक्र नहीं है। इस खबर को मुख्य धारा के सभी अखबारों ने अपनी एकजुटता का परिचय देते बड़ी वेशर्मी से दबा दिया।

जबकि जिन क्षेत्रों में जिप अध्यक्षा ने मनरेगा समेत मुख्यमंत्री की महात्वाकांक्षी सात निश्चय योजनाओं की कड़वी सच्चाई सामने लाई, उस क्षेत्र के सभी संवाददाताओं ने उससे जुड़ी खबरें प्रेषित की थीं, लेकिन ब्यूरो कार्यालय और ब्यूरो प्रमुख क्षत्रपों ने उस खबर को डकार गये।

एक लोकप्रिय हिन्दी दैनिक के संवाददाता ने बताया कि अमुमन सभी स्थानीय संवाददाताओं ने अपने बिहारशरीफ स्थित कार्यालयों को समाचार प्रेषण किये थे, लेकिन वैसे महत्वपूर्ण खबर क्यों प्रकाशित हुये, यह समझ से परे है।

एक अन्य अखबार के प्रखंड स्तरीय संवाददाता ने तो यहां तक बताया कि अखबार के बिहारशरीफ ब्यूरो कार्यालय से खबर भेजने के घंटा भर बाद बताया गया कि इस खबर में बिना डीएम या डीडीसी के कोट के खबर छापना संभव नहीं है।

इस संदर्भ में जब नालंदा के जिला परिषद अध्यक्ष तनुजा देवी से बात की गई तो उन्होंने मीडिया द्वारा एकजुट होकर में इस तरह की खबर के अप्रकाशन पर घोर आश्चर्य व्यक्त की।

श्री देवी ने कहा कि वे आज सुबह जब सारे अखबारों से एक लाइन भी खबर नहीं छपी तो खुद हैरान रह गई। क्योंकि निरीक्षण के दौरान प्रायः सभी अखबारों के संवाददाता उपस्थित थे। उसमें एक नामी न्यूज चैनल के रिपोर्टर भी शामिल थे। फिर भी कहीं एक लाइन खबर न छपी और न दिखी। सिर्फ सहारा और नव बिहार टाइम्स को छोड़ कर।

बकौल जिप अध्यक्षा, उन्हें लगता है कि यहां कोई कॉकस जरुर है, जो यह नहीं चाहता है कि जिले के विकास योजनाओं के व्याप्त भारी अनियमियता और भ्रष्टाचार के मामले उभर कर सामने आये। उनका मीडिया मैनेजमेंट भी मजबूत दिखता है।

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