हाकिमों-नेताओं के दलाल बन गए हैं अखबारों के प्रखंड रिपोर्टर

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बहुत दुःख होता है जब कोई प्रतिष्ठित अख़बार का प्रखंड रिपोर्टर प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों एवं नेताओं के यहाँ सुबह शाम चाय पीने के बहाने उनके समाचार उन्हे दिखाने जाते हैं कि आपके विरोध ने समाचार मिला है, क्या करें, इसे छापे या नहीं छापे।

अधिकारी इसे मैनेज करने की ही बात करेंगे। तो फिर हो गया शुरू मैनेजमेंट का खेल। 

कुछ ऐसा ही हमारे आँखों के सामने गुजरा जब हमे दरभंगा जिला के बहेरी प्रखंड किसी पदाधिकारी के विरुद्ध शिकायत मिली एवं हमने पर्याप्त सबूत भी इकक्ठे किए। हमने अपने एक सहयोगी जो एक प्रतिष्ठित अख़बार के प्रखंड संवाददाता हैं, उनसे भी सहयोग माँगा।

उन्होने तुरंत इस पर उस पदाधिकारी से मिल कर उनका भी राय लेने कि बात कह कर हमे अपने साथ ले गए। बाद मे मैनेजमेंट का खेल ऐसा हुआ कि हमारे विरोध करने पर हमे ही धमका गए और कह गए कि अगर पैसा लेकर नही मानोगे तो क्षेत्र मे घूमना बंद करवा देंगे।

पर हम नहीं माने तो उन्होने हमारे बारे मे अनाप-शनाप बिना किसी के आधार के अख़बार मे छाप कर बदनाम करने की धमकी दे डाली।

आज आप ईमानदारी से सोचिए कि कौन स ऐसा अख़बार का प्रखंड रिपोर्टर है जो जनता की शिकायत पर किसी पदाधिकारी के विरोध मे न्यूज़ लिखता हो?

क्या आप मानेगे कि जनता के बीच अधिकारियों के तानाशाही एवं भ्रष्टाचार को लेकर रोष नही होगा?

क्या कोई प्रखंड संवाददाता अपने प्रखंड के किसी पदाधिकारी की अनियमिता एवं भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाला कोई समाचार छापता है?

क्यूँ नही छापता, क्यूंकी कहीं कोई गरबड़ी नहीं है? सब के सब पदाधिकारी कर्मठ एवं ईमानदार हो गए?

कम से कम दरभंगा जिला के बहेरी प्रखंड के अख़बार के एक पत्रकार तो ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किए। ये महाशय सिर्फ पदाधिकारी का सहयोग ही नही करते, उनके विरोध मे बोलने वाले को फ़साने एवं बदनाम करने का भी ठेका ले रखे होते हैं। विश्वास कीजिये या न कीजिये, पर हमारी बातों पे गौर जरूर कीजिएगा।

…………. Abhishek kumar अपने फेसबुक वाल पर

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