हजारीबाग कोर्ट में गैंगवार, झारखंड में जंगल राज !

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राजनामा.कॉम। हजारीबाग व्यवहार न्यायालय में अपराधियों ने दिन दहाडे एके-47 जैसे स्वचालित हथियार का उपयोग कर ना सिर्फ सजायफ्ता गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव समेत तीन लोगों को मार डाला बल्कि कोर्ट की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खडे कर दिए हैं।

 ak 47इस तरह की घटना को रोकने के लिए पूर्व में कई बार कवायदें होती रही हैं। सुरक्षा के दंभ भी भरे जाते रहे हैं लेकिन इस घटना ने सुरक्षा मे सेंध को प्रमाणित कर दिया है। अपराधी बोलेरो से आए और गाडी को ठिक ऐसी जगह पार्क किया जहां से सुशील श्रीवास्तव को आसानी से निशाना बनाया जा सकता था।

सवाल यह है कि भारी भरकम पुलिस व्यवस्था होने के बावजूद बडे स्वचालित हथियार को लेकर वाहन में सवार अपराधी मेन गेट से डेढ सौ मीटर दूरी तक पहुंचे जबकि इन वाहनों को रोकने के लिए गेट पर हीं हथियारबंद जवान तैनात किए गए हैं।

अगर वहीं पर जांच होती तो ये अपराधी गेट पर हीं धर लिए जाते और इतनी बडी घटना को न्यायालय परिसर में रोका जा सकता था।

पूरे न्यायालय परिसर में लगभग 50 की संख्या मे सुरक्षा के लिए जवानों की तैनाती की गई है। यहां सादे लिबास में छोटे हथियारों से लैस जवानों को भी तैनात किया गया है। मंगलवार की घटना में भी सादे लिबास में तैनात जवान ने हीं अपराधियों पर फायरिंग भी की।

न्यायालय परिसर में यह कोई पहला वाक्या नहीं है। पूर्व में भी अपराधियों ने गुप्तेश्वर पाण्डेय के एसपी रहते पुलिस जवानों के आंखों मे मिर्चा पाउडर डालकर भागने का प्रयास किया था।

एसपी आशीष बत्रा के समय भी बंदियों ने भागने की साजिश की थी लेकिन बम फट जाने के कारण कोशिश में नाकाम हुए थे।

एसपी प्रवीण सिंह के कार्यकाल में हाजत में एक-एक कर कई बम धमाके किए गए थे और कैदियों को भगाने की साजिश रची गई थी। जिसमें 17 कैदी हाजत से फरार हो गए थे। हालांकि उस वक्त पुलिस ने भी अपराधियों के विरूद्ध जमकर गोलीबारी की थी।

एसपी पंकज कंबोज के समय में व्यवहार न्यायालय परिसर में किसी भी वाहन का प्रवेश वर्जित कर दिया गया था जो लंबे समय तक चला लेकिन बाद में धीरे-धीरे यह प्रक्रिया रूक गई जिसका परिणाम यह घटना है। विशेष शाखा ने भी कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने की रिपोर्टिंग की थी।

यूं घटी कोर्ट में गैंगवार की घटनाः मंगलवार समय 10:46 मिनट, यह वह समय है जो पूरे व्यवहार न्यायालय को थर्रा दिया। आम दिनों की तरह न्यायालय में मामले की सुनवाई चल रही थी। अधिवक्ता विभिन्न कोर्ट में जिरह करने में मशगूल थे। किसे क्या पता था कि पूरा व्यवहार न्यायालय में अफरा-तफरी मच जाएगी।

ak47_crimeअपराधी व्यवहार न्यायालय के रजिस्ट्रार आवास के पास स्थित गेट से घुसे थे और अचानक अंधाधूंध गोली चलाना शुरू कर दिया। अपराधियों ने 70 राउण्ड गोलियां चलाकर गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव और उसके दो साथियों को छलनी कर दिया।

इसके पूर्व अपराधियों ने एक आंसू गैस का प्रयोग किया और कुछ ही क्षणों में गोलियां चलानी शुरू कर दी। शुरू में तो लोग गोलियों की आवाज से सन्न रह गए। लोग इधर-उधर भागने लगे। हर तरफ अपरा-तफरी मच गई। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था।

अपराधी महज 3 से 4 मिनट में घटना को अंजाम देकर फरार हो गए। कुछ लोग दौड़े-दौड़े परामर्शी केंद्र की ओर पहुंचे, जहां देखा तीन लोग जमीन पर गिरे हैं और दर्जनों गोलियां उनके शरीर पर लगी है। घटना स्थल खून से लथपथ हो गया।

बाद में कुछ लोगों ने सुशील श्रीवास्तव की पहचान की। तब लोगों को समझ में आया कि यह आपसी रंजीश का परिणाम है। घटना के बाद डीआइजी उपेन्द्र कुमार, एसपी अखिलेश झा दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे, जहां अपराधियों द्वारा प्रयोग में लाया गया एक बोलेरो को जब्त किया।

पुलिस के अनुसार बोलेरो विकास तिवारी का बताया जा रहा है, जिसमें आंसू गैस का एकगोला, बैग, फाइलें और कई जरूरी कागजात भी पाया गया।

कोल माफिया की आपसी रंजिश का मामला: सुशील श्रीवास्तव के लोगों ने गैंगस्टर भोला पांडेय और किशोर पांडेय की हत्या की थी। इससे पहले पांडेय गिरोह के लोगों ने सुशील श्रीवास्तव की पत्नी की रांची में गोली मारकर हत्या कर दी थी। सुशील के रांची स्थित डोरंडा आवास पर भी फायरिंग हुई थी। सुशील श्रीवास्तव कभी भोला पांडेय का शूटर हुआ करता था।

भोला की हत्या 2010 में की गई। इसके बाद उसके भतीजे किशोर पांडेय ने गिरोह की कमान संभाली। उसकी हत्या भी पिछले साल जमशेदपुर में कर दी गई थी। ये दोनों गिरोह रामगढ़ और हजारीबाग में पिछले कई सालों से सक्रिय हैं। ये कोल माफिया हैं, जिनका करोड़ों का कारोबार है। माना जा रहा है कि ताजा वारदात के पीछे किशोर पांडेय के भाई विकास तिवारी का हाथ है। उसे पांडेय गिरोह का नया सरगना माना जा रहा है।

वहरहाल, झारखंड प्रदेश में इन दिनों जिस तरह की अपराधिक-उग्रवादी घटनाएं घट रही है, उससे साफ होता हैं कि यहां शासन-सरकार का कहीं कोई खौफ नहीं है। सर्वत्र जंल राज का नजारा दिखता है। उधर भाजपा की  रघुवर सरकार अपनी हंसनी चाल में मस्त है।

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