स्वंय प्रकाश सरीखे चरणपोछु संपादक हो सकते हैं, पत्रकार नहीं

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इन दिनों सोशल मीडिया में पॉलटिक्स और मीडिया गठजोड़ को नंगा करता एक वीडियो  खूब वायरल हो रहा है। जिसे लेकर तरह-तरह की तीखे आलोचनाओं का बाजार गर्म है।  इस वीडियो में जी न्यूज़ का एक संपादक बिहार के सीएम नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सुशील मोदी के पैर छूते नजर आ रहे हैं।

मामला चैनल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम का है। इस वीडियो में जी मीडिया के प्रादेशिक चैनल जी बिहार-झारखंड के संपादक स्वयं प्रकाश सीएम और डिप्टी सीएम का स्वागत करते हुए उनके पैर छूते दिख रहे हैं।

बीते 26 मार्च को सेना के जवानों के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम का नाम था- एक शाम जवानों के नाम। यह कार्यक्रम बिहार की राजधानी पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में तमाम बड़ी हस्तियों के साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी भी आमंत्रित थे।

इस कार्यक्रम का जो वीडियो सामने आया है उसमें जी बिहार के संपादक स्वयं प्रकाश कार्यक्रम स्थल के गेट पर मेहमानों के स्वागत के लिए खड़े दिख रहे हैं।

वीडियो में दिख रहा है कि वहां गाड़ी से सुशील मोदी पहुंचते हैं। सुशील मोदी जेसे ही उतरने के लिए अपनी गाड़ी का गेट खोलते हैं स्वयं प्रकाश उनके पास पहुंचते हैं और उनके पैर छू लेते हैं।

इसके बाद वहां पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का काफिला पहुंचता है। नीतीश कुमार के आने पर भी स्वयं प्रकाश उनके स्वागत के लिए उनकी कार के पास पहुंचते हैं। कार से उतरने से पहले ही स्वयं प्रकाश नीतीश कुमार का भी पैर छूकर उनका अभिनंदन करते हैं।

जाहिर है कि स्वंय प्रकाश सरीखे चरणपोछु पत्रकारों के रहते किसी भी मीडिया हाउस से निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती। ऐसे संपादकों की जितनी भी भ्रत्सना की जाये, वह काफी कम है।

लेकिन यह भी सच है कि आज कल अखबारों और न्यूज चैनलों में चरणपोछु लोग ही अधिक संपादक बनाये जा रहे हैं। जो संपादक सिर्फ पत्रकार ही होता है, इस अवधारणा पर कड़े सबाल खड़ा करते हैं।

स्वंय प्रकाश के मामले में सबसे रोचक तत्थ यह है कि सीएम और डिप्टी सीएम का चरण पोछने की जो वीडियो वायरल हुई है, वह स्वंय के संपादकत्व में जी न्यूज बिहार-झारखंड चैनल पर प्रमुखता से प्रसारित समाचार से ही ली गई है।

इसे बेशर्मी की हद ही कहेगें कि चैनल का संपादक राजनेताओं का चरण-पोछण करता है और उसी चैनल पर उसकी प्रमुखता से समाचार प्रसारित होता है। बिहार-झारखंड समेत देश भर में इस चैनल की कैसी छवि बनी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

इससे जुड़े संवाददाताओं को भी निष्पक्षता से कार्य करने में भी मुश्किलें आयेगी। संभव है कि प्रायः वे भी चरणपोछु की भूमिका में ही अधिक होगें।

ऐसा ही एक मामला पिछले साल भी सामने आया था। तब लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान सामाचार एजेंसी एएनआई के एक रिपोर्टर ने यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ के पैर छू लिये थे। वो वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। और उसकी भी आलोचना खूब हुई थी। एजेंसी की भद पिट गई थी।

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