स्थानीय नीति और सीएनटी एक्ट में बदलाव स्वीकार्य नहीं

Share Button

madhukodaमुकेश भारतीय

रांची। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वे राज्य में सत्तारुढ़ भाजपानीत रघुबर सरकार द्वारा परिभाषित स्थानीय नीति एवं सीएनटी एक्ट को लेकर मुखर हुए हैं। बतौर निर्दलीय दो साल तक मुख्यमंत्री रहे मधु कोड़ा अपनी जय भारत जन समानता पार्टी संगठन के अध्यक्ष भी हैं। दूरभाष पर उनसे इन मुद्दों के साथ कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई की पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन से पूछताछ की तैयारी को लेकर  दो टूक बात की। प्रस्तुत है उसके प्रमुख अंशः

सबालः रघुबर सरकार द्वारा परिभाषित स्थानीय नीति को आप किस रुप में लेते हैं ?

जबाबः रघुबर सरकार द्वारा जो स्थानीय नीति लाई गई है, वह यहां के लोगों के बिल्कुल हित में नहीं है। आदिवासी और मूलवासी के अधिकार का सीधा हनन है।

सबालः आपकी राय में स्थानीय नीति का क्या स्वरुप होनी चाहिए ?

जबाबः देखिए, झारखंड बना ही था कि यहां  का सर्वांगिन विकास हो। नौकरी पेशा में आदिवासी मूलवासी जगह मिले। और स्वभिमान के साथ वे जी सकें। हम चाहते हैं कि स्थानीत नीति का मुख्य आधार खतियान होनी चाहिए। और जिसके पास खतियान नहीं है उन्हें स्थानीय स्तर पर ग्राम प्रधान है, ग्राम सभा है, वे उनकी भाषा सहित उनके रीती रिवाज पहचान करे और इसी आधार पर स्थानीयता परिभाषित होनी चाहिए। जिस पर रघुवर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है।

सबालः खतियान को लेकर भी कई तरह की बातें होती है। आपकी राय में उसका कट ऑफ डेट क्या हो ?

जबाबः देखिए, लास्ट स्टेज में सर्वे जहा जहां भी हुआ है,उसको आधार मानना चाहिए। ऐसे राइट सेटेलमेंट सर्वे राज्य में जो हुआ था, वह अंतिम 60 के दशक में हुआ है। हम उसी को आधार मानते हैं। और यही आधार होना चाहिए।

सबालः स्थानीय नीति को लेकर आपकी योजना रणनीति क्या है ?

जबाबः यहां के जन भावनाओं को नजरअंदाज कर सरकार जिस नीति को जबरन लागु करने पर आमादा है, हम लोग उसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। बड़े पैमाने पर जन आंदोलन चलाएगें। यह कोई सरकार पर दबाव की बात नहीं है। झारखंडियों के अधिकार की बात है। जो कोई भी इसे लेकर खड़ा होगा, हम उसके साथ होगें। अभी जो भिन्न-भिन्न संगठनों के लोग आवाज उठा रहे हैं, हम उनको एक मंच पर लाने का हरसंभव प्रयास करेगें। किसी हाल में झुकने का प्रश्न ही नहीं है।

सबालः आप दो साल तक झारखंड के सीएम रहे हैं। क्या उस वक्त आपने स्थानीय नीति को लेकर कोई पहल की थी, योजना बनाई थी ?

जबाबः हम लोगों की सरकार करीब दो साल तक चली। इस दौरान हम लोगों ने स्थानीय नीति बनाने को लेकर आस-पड़ोस के सभी राज्यों की स्थानीय नीति का अध्ययन करने के लिए एक कमिटि भेजी। उसकी रिपोर्ट को हम मूर्त रुप देने ही वाले थे कि हमारी सरकार चली गई। हमने ईमानदारी से यह प्रयास किया था कि सारे राज्यों की स्थानीय नीति की एक समीक्षा हो जाए और यहां एक ठोस नीति उभर कर सामने आए।

सबालःवर्तमान रघुवर सरकार को लेकर आपकी बेबाक नजरिया क्या है  ?

जबाबः वर्तमान सरकार के क्रियाकलापो से साफ जाहिर होता है कि वह यहां के आदिवासी मूलवासी के खिलाफ काम कर रही है। जिस तरह से स्थानीय नीति का निर्णय लिया गया। उसके बाद सीएनटी एक्ट में छेड़छाड़ की गई है, वह राज्य हित में नहीं है।

सबालःहाल ही में सीएनटी एक्ट जो बदलाव किए गए हैं। आपकी राय में आदिवासी मूलवासी पर क्या असर पड़ेगा ?

जबाबः हम समझते हैं कि इसकी आड़ में आदिवासियों की जमीने छीनी जाएगी। सबसे बड़ी बात कि आदिवासियों की जमीन उसे देने के निर्णय हे रहे हैं, जो बड़े-बड़े बिल्डर है। डेवलपर है। पूंजीपती है। अगर सरकार इस मामले में वाकई चिंतित है तो आदिवासियों को पैसा दे या दिलवाए, वह खुद बनाएगा। यह सब न करके उसके जमीन को महाजन के हवाले कर रहे हैं। स्थानीय नीति और सीएनटी एक्ट में कन्वर्जन की नीति दोनों बिल्कुल अनुचित है। यह किसी कीमत पर स्वीकार योग्य नहीं है।

सबालःमीडिया की सुर्खियों के मुताबिक कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और शिबू सोरेन से पूछताछ की तैयारी में हैं। इसे आप किस रुप में लेते हैं ?

जबाबः देखिए, यह सब करने को कोई भी जांच एजेंसी स्वतंत्र है। वह किसी से कुछ पुछना चाहती है, उन्हें जबाव देनी चाहिए।

 सबालः आप भी तो हमेशा कुछ ऐसा ही कुछ मांग करते रहे हैं  कि सिर्फ हमें टारगेट किया जा रहा है जबकि अन्य सीएम काल में भी फैसले लिए गए हैं ?

जबाबः देखिए, (हंसते हुए)। कभी हमने यह नहीं कहा। हम सिर्फ यह कहते रहे कि हम लोग सॉफ्ट टारगेट पहले हो गए। पहले की जिन सरकारों ने भी निर्णय लिए हैं, उसकी भी जांच होनी चाहिए। निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। किसी को टारगेट करके जांच नहीं होनी चाहिए।

Share Button

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.