स्टेट 10टॉपर्स में गरीबी को चीरती शामिल हुईं जुलिया मिंज

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jac1झारखंड इंटरमीडिएट काउंसिल द्वारा जारी इस बार के रिजल्ट में पिछले नौ वर्षों का रिकार्ड टूटा है। कुल 83.16 फीसदी स्टूडेंट्स सफल हुए हैं। गत वर्ष की तुलना में 10.24 फीसदी स्टूडेंट्स ज्यादा सफल हुए हैं। जबकि इस बार भी छात्राओं ने ही बाजी मारी है। वहीं स्टेट के तीनों टॉपर रांची जिले के हैं।

उर्सूलाइन इंटर कॉलेज रांची की छात्रा लवली सिंकू 397 अंक लाकर राज्य में पहले स्थान पर रही है। लवली के पिता चाईबासा में शिक्षक हैं। वहीं टेंपो चालक का बेटा शशि कुमार रातू स्थित कार्तिक उरांव इंटर कॉलेज से 386 अंक लाकर राज्य में दूसरे स्थान पर है।

रेजा का काम कर जूलिया ने पाया टॉप टेन में स्थान: एसएस प्लस टू की छात्रा एवं बेड़ो प्रखंड के करांजी गांव निवासी ख्रीस्तीना मिंज की बेटी जूलिया मिंज टॉप टेन में है। रेजा का काम करने वाली जूलिया मिंज ने अपने परिवार व प्रखंड का नाम रौशन किया है। जिस समय उसके रिजल्ट की घोषणा हुई, वह मजदूरी करने गई थी। उसने इस सफलता का श्रेय अपनी मां को दिया है।

रांची की मुन्नावती भी कर चुकीं ऐसा कमाल: रांची के एक कॉलेज के दिक्षांत समारोह में ऐसा ही एक मामला कुछ दिन पहले भी सामने आया था। बरसों रेजा मजदूरी करते वक्त बचपन में जो सपना देखा था, उसके सपने साकार होने में मात्र कुछ ही घंटे बचे थे। मन में बस एक ही ख्याल था कि आज मुझे ईंटें नहीं उठानी, बल्कि सोने का तमगा गले में पहनना है। मुझे यह पदक कोई और नहीं देश के गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे स्वयं देंगे। आखिर क्यों नहीं? मैंने संस्कृत में यूनिवर्सिटी टॉप जो किया है। सोमवार को दिन के 10 बजे मैं छोटे भैया हरेक साहू के साथ रांची विवि पहुंची। कभी दो जोड़ी कपड़े को तरसती थी, लेकिन काला गाउन पहना तो भैया की छाती गर्व से चौड़ी हो गई। चारों ओर ऐसे ही गाउन में छात्र-छात्राएं।

हर कदम पर मिली चुनौतियां:   उनका अब तक का पूरा सफर चुनौतीपूर्ण रहा है। जब मैट्रिक पास किया, तब तीन भाई बेरोजगार थे। मां देव कुंवर देवी किडनी की बीमारी से ग्रस्त। उनका इलाज रांची के करमटोली चौक स्थित डॉ. अशोक कुमार वैद्य से अब भी चल रहा है। घर का गुजारा जैसे-तैसे चल रहा था। इस बीच  2010 में पिता देवी दयाल साहू की मृत्यु हो गई। लेकिन, मुन्नावती ने कभी हिम्मत नहीं हारी। और अब उनकी मेहनत ने रंग लाई।

पांच साल छोडऩी पड़ी पढ़ाई:   मुन्नावती ने एकीकृत बिहार के समय 1998 में बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड से मैट्रिक उत्तीर्ण (प्रथम श्रेणी) किया था। वह मजदूरी के साथ एसएस हाई स्कूल में मैट्रिक के ही छात्रों को पढ़ाने लगीं। पांच साल बाद 2003-05 में केसीबी कॉलेज बेड़ो से इंटर किया। इसी कॉलेज से ग्रेजुएशन (2007-10) की डिग्री  हासिल की। फिर पीजी करने के लिए रांची पहुंची। लेकिन, जब भी अवकाश होता, वह मजदूरी कर आर्थिक जरूरत पूरी करतीं।

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