स्कूल संचालक पर ‘माही का बेटा’ के कलम की धार

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”खींचों ना कमानो को, ना तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो”   मशहूर शायर अकबर इलाहबादी ने अपनी यह शायरी जिस अंदाज में कही हो लेकिन यह सोलह आने सच है कि मध्य प्रदेश के कस्बाई हल्के से प्रकाशित हो रह साप्ताहिक समाचार पत्र के संदर्भ में तो बिल्कुल ही न कही होगी।

हालांकि यह सब कोई एक अखबार की कथा-व्यथा नहीं है। देश में ऐसे हजारों अखबार जी-मर रहे हैं, जिनका मकसद कुछ और नजर आती है।

मध्य प्रदेश के धार-सरदारपुर से अक्षय भण्डारी ने माही का बेटा की तस्वीर के साथ जो खबर भेजी है, वह पत्रकारिता के अनेक पहलुओं पर चिंतन करने को बाध्य कर देती है।

mahi ka betaअक्षय भण्डारी की खबर है कि  वर्तमान में पत्रकारिता का परिदृश्य किस ओर चला जा रहा है यह तो समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार से पता चल ही जाता है।

मध्यप्रदेश के इन्दौर, धार, झाबुआ एंव राजगढ़ से हर सोमवार माही का बेटा प्रकाशित होता है। अनेक समाचारो में तो वो करोड़ों पाठकों का बताता है।

चलो यहां तक तो ठीक है। बाजार में इसकी चर्चा रहती है तो कोई इसे अलग नजरिये से देखते है। अभी एक स्कूल संचालक पर अपनी कलम चला रहे है उन पर वे ऐसे ताने कस रहे है कि बाजार में उसकी चर्चा ना हो ये हो नहीं सकता।

धार जिले के राजगढ़ में स्कूल संचालक रोहित भण्डारी यह संचालक न्यू मधुकर हाई सेकेण्डरी स्कूल चलाते है। अभी तक तो ये समाचार पत्र किस्त के रुप में समाचार प्रकाशित कर रहा था।  बस संचालक के खिलाफ कुछ भी कलम चलना चाहिए । प्रकाशित  समाचार के पहले जिले के कथित शिक्षा माफिया पप्पू डॉन ने लिखा आता है यानि शिक्षा माफिया का डॉन बताता है, लिखता है कि सरकारी और एक गरीब की जमीन पर लापरवाही एंव अनियमिता का महल खड़ा किया।

इसके पहले एक र्शीषक से गोलमोल तरीके से समाचार प्रकाशित कर रहे हैं। यहां तक तो ठीक है। संचालक सहित अन्य लोगो पर मधुकर मैरिज गार्डन और फर्जी स्कूल व कॉलेज खोलकर वर्षो से जो करोड़ो रुपया बटोरा है, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिये। यहीं नहीं चवनीछाप पत्रकारों की सलिपतता पर भी कठोर कारवाई होना चाहिये। आखिर कौन पत्रकार है,जिसका जिक्र माही का बेटा समाचार पत्र कर रहा है।

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