सोशल मीडिया मजा भी और सजा भीः फेसबुक ने यूं खोला कई सफेदपोशों का राज

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सोशल मीडिया मसलन फेसबुक, वाह्टऐप और ट्यूटर का प्रचलन में पिछले आठ वर्षों में काफी तेजी आई। बिहार के तो अधिकांश नेता  जिन्हें कम्प्यूटर और नेट की जानकारी तक नहीं थी मासिक पारिश्रमिक और मासिक ठेके पर आपरेटरों को रख सोशल मीडिया में बनाए अपने एकाउंट को ऑपरेट कराते रहे हैं…”

पटना (विनायक विजेता)। सोशल मीडिया: मजा भी है, तो सजा भी है! इसे सिद्ध कर दिया है हाल में ही घटी मुजफ्फरपुर ‘अल्पावास गृह’ और पटना के ‘आश्रय होम’ और एक अन्य एजेंसी के संचालक व गिरफ्तार कर जेल भेजे गए बबन यादव के मामले ने।

ऐसे मामलों में पुलिस एवं पत्रकारों के लिए जिन तस्वीरों के लिए नाक रगड़ने पड़ते वो तस्वीरों ऐसे मामलों के आरोपितों के फेसबुक वॉल में सहजता से हासिल हो गए।

अगर मुजफ्फरपुर अल्पावास गृह मामले का दोषी ब्रजेश ठाकुर और पटना के आश्रय होम की संचालिका मनीषा दयाल के फेसबुक नहीं टटोले जाते तो मीडिया और जांच एजेंसियों को वह तस्वीरें और साक्ष्य नहीं मिल पाते, जिनसे इन मामलों में बवाल मचा।

ब्रजेश ठाकुर तथा मनीषा दयाल एंड कंपनी ने सोशल मीडिया पर अपने कुत्सित फायदे के लिए तस्वीरें डाल रखी थीं। ऐसी ही कुद तस्वीरें भाजपा से निष्काषित एक एनजीओं के गिरफ्तार संचालक बबन यादव ने भी डाल रखी थीं।

पर तब शायद यह उसे पता नहीं था कि जिस मजा के लिए वे इन तस्वीरों को डाल रहे हैं यह मजा उनके लिए बाद के दिनों में सजा भी साबित हो सकती है। परिणाम सामने है। दोनों कंपनी के लोग आज जेल में ‘ऐ फेसबुक-आज तेरे नाम पर रोना आया का प्रलाप कर रहे हैं।’

सोशल मीडिया मसलन फेसबुक, वाह्टऐप और ट्यूटर का प्रचलन में पिछले आठ वर्षों में काफी तेजी आई। बिहार के तो अधिकांश नेता  जिन्हें कम्प्यूटर और नेट की जानकारी तक नहीं थी मासिक पारिश्रमिक और मासिक ठेके पर आपरेटरों को रख सोशल मीडिया में बनाए अपने एकाउंट को ऑपरेट कराते रहे हैं।

नेताजी के पीए नेताजी की तस्वीर और स्क्रीप्ट ऐसे ऑपरेटरों को उपलब्ध करा देते हैं और बाद में वह उनके नाम से सोशल मीडिया पर आ जाता रहा है। राजधानी पटना में ही एक दो ऐसी एजेंसी है, जहां दर्जनों की संख्या में बेरोजगार युवाओं को इस काम के लिए रोजगार मिला हुआ है।

पूर्व में राजनेताओं और समाजिक संगठनों से जुड़े लोगो और अधिकारियों और उनकी पत्नियों ने जितनी तेजी से सोशल मीडिया को अपनाया अब उसी तेजी से इससे अपना पीछा छुड़ाने की जुगत में लग गए हैं। कारण कि भय है कि गलती से ऐसी कोई विवादित तस्वीर न लग जाए जिसके कारण उन्हें अब लेने के देने पड़ जाएं।

इसके साथ राजनेता, अधिकारी व वीआईपी अब ‘सेल्फी’ को भी ‘सेफ’ नहीं मान रहे। लगातार घटी कुछ घटनाओं से सीख लेकर ऐसे लोग अब सेल्फी से भी सावधानी बरतने का निर्णय लिया है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पटना आश्रय होम मामले में जेल भेजी गई मनीषा दयाल का फेसबुक भी उसका सहयोगी व कथित पत्रकार प्रेम कुमार ही हैंडल करता था। मनीषा के जेल जाने के बाद उसके फेसबुक एकाउंट को डिलीट करने वाला भी प्रेम कुमार ही है जो अभी भूमिगत है।

इस घटना के बाद प्रेम कुमार ने अपने फेसबुक एकाउंट में भी हेरफेर कर वैसी काफी तस्वीरों को डिलीट कर दिया जो चर्चा में थीं। मुजफ्फरपुर मामले की भी जांच कर रही सीबीआई को ब्रजेश के फेसबुक एकाउंट से ही काफी जानकारियां मिली हैं।

जेल में ब्रजेश के पास से मिली टेलीफोन नंबरों की पर्ची के आधार पर ब्रजेश के फेसबुक दोस्तों का भी मिलान किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई जल्द ही ब्रजेश के ऐसे कुछ खास दोस्तों के घर और कथित कार्यालयों पर ‘दस्तक’ देने वाली है।

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