सोशल मीडिया को भी प्रेस परिषद दायरे में लाना चाहिएः अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद

Share Button

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद ने परिषद के कार्य क्षेत्र के विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को अब सोशल मीडिया को भी इस वैधानिक निकाय के दायरे में लाना चाहिए, क्योंकि इसकी पहुंच प्रिंट मीडिया से भी ज्यादा है।

प्रेस क्लब में ‘भारतीय प्रेस परिषद और प्रेस की स्वतंत्रता’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए चंद सेकेंड में पूरी दुनिया में कोई बात प्रसारित की जा सकती है। ऐसा भी कहा जाता है कि देश में कई बुरी घटनाएं सोशल मीडिया पर गलत संदेश प्रसारित किए जाने की वजह से हुईं। उन्होंने दलील दी कि सोशल मीडिया में वर्णमाला के उन्हीं अक्षरों का इस्तेमाल किया जाता है, जिन अक्षरों का उपयोग प्रिंट मीडिया में किया जाता है, इसलिए यदि पत्र-पत्रिकाएं प्रेस परिषद के दायरे में आ सकती हैं, तो सोशल मीडिया क्यों नहीं।

न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा किगहन विचार-विमर्श के बाद हमने सरकार से कई बार ये गुजारिश की है कि प्रेस परिषद का विस्तार कर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी इसके दायरे में लाया जाये और प्रेस परिषद का नाम बदलकर मीडिया परिषद किया जाए।

उन्होंने कहा कि मीडिया परिषद के गठन के लिए कानून बनाए जाने की जरूरत है और कानून तो सरकार ही बनाएगी। न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद ने आगे कहा कि समाचार किसी भी माध्यम पर किसी भी रूप में हो, वह प्रेस परिषद के दायरे में होना चाहिए, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की विषयवस्तु प्रेस परिषद के दायरे में नहीं है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों पर होने वाले हमलों का संज्ञान लेने का प्रस्ताव परिषद में पहले ही पारित किया जा चुका है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रेस परिषद की जांच समिति ने इंदौर में पिछले दो दिनों में 47 मामलों की सुनवाई की। इनमें मुंबई में टाटा समूह के सुरक्षा गार्डों द्वारा फोटो पत्रकारों से मारपीट, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में समाचार कवरेज को लेकर मीडिया पर लगाई गई पाबंदियों और आंध्रप्रदेश के प्रकाशम जिले में एक पत्रकार पर हमले के मामले में शामिल हैं।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *