सेलरी नहीं दे सकते तो बंद करो अपनी ठगी और गोरखधंधे की दुकान

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pk-tiwariअभी घर लौटा हूं नोएडा फिल्म सिटी से. करीब सवा सौ मीडियाकर्मियों ने तीन महीने से सेलरी न मिलने से नाराज होकर महुआ न्यूज का आफिस कब्जा लिया है. कामकाज ठप है. न कोई घर जाएगा और न कोई काम करेगा. सबकी एक मांग है. तीन महीने का पुराना बकाया चुकता करो और दो महीने का एडवांस वेतन दो. इतना लेकर सब कर्मी घर चले जाएंगे, ये चैनल सदा के लिए छोड़कर. फिर महुआ का मालिक पीके तिवारी महुआ न्यूज को चलाए या बंद करे, उसकी बला से.

ट्रेजडी ये दिखी कि महुआ के फिल्म सिटी स्थित आफिस के आधे हिस्से में महुआ एंटरटेनमेंट के शो ‘सुर संग्राम’ की शूटिंग चल रही थी, जहां मालिनी अवस्थी, मनोज तिवारी, रवि किशन आदि बड़े बड़े लोग बैठे कर युवा गायकों के गाने सुनकर वाह वाह कर रहे और लंबी लंबी बातें फेंक रहे.

वहीं महुआ के आफिस के बाकी आधे हिस्से में कर्मचारी सेलरी न मिलने से हड़ताल किए हुए बैठे थे, भूखे-प्यासे, ये ठानकर कि अब आरपार होगा…. सच कहते हैं, टीवी में जो रियल्टी शो आदि दिखाए जाते हैं, उनके पीछे की असलियत कुछ अलग ही होती है, जिसे कोई नहीं जान पाता…

मालिनी के पति यूपी के बड़े आईएएस अफसर हैं. उनको चाहिए कि वो इस मामले में हस्तक्षेप करतीं-करातीं और महुआ न्यूज के कर्मियों को उनकी सेलरी दिलाने के लिए दबाव बनवातीं. पर इस सुविधाभोगी दौर में कौन किसी के संकट की परवाह करता है.. सब अपने अपने सुख देखते हैं और अपने अपने सुखों के लिए तमाम समझौते करते हुए विद्रूपों, उलटबांसियों, दुर्भाग्यों, दुखों पर चुप्पी साधे रहते हैं….

 जब महुआ न्यूज के आफिस से और फिल्म सिटी के दूसरे न्यूज चैनलों के साथियों की तरफ से फोन आया कि महुआ न्यूज में कर्मचारी हड़ताल पर हैं, तो मैं एक एवार्ड फंक्शन के समारोह के बाद प्रेस क्लब में आयोजित छोटी-सी पार्टी से दौड़ा-दौड़ा फिल्म सिटी की तरफ भागा. भड़ास से जुड़े साथियों ने खबरों के प्रकाशन का मोर्चा अलग से संभाला. फिल्म सिटी पहुंचकर मैं महुआ न्यूज के आफिस के अंदर घुस गया, सिक्योरिटी गार्डों के मना करने और रोकने-टोकने के बावजूद. रिसेप्शन के पास जाकर लोगों से मिला और बात की. उन्हें अपना समर्थन दिया.

उसके बाद फिल्म सिटी के कई चैनलों के कर्मियों से मिलकर इस लड़ाई को गोलबंद होकर आगे बढ़ाने का अनुरोध किया ताकि कल कोई चैनल अपने इंप्लाइज की सेलरी रोकने की हिम्मत ना कर सके… अरे यार, जब सेलरी नहीं दे सकते तो बंद करो अपनी ठगी और गोरखधंधे की दुकान….

……. भड़ास के संपादक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से

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