सीओ, बीडीओ, थाना प्रभारी, समाजसेवी और पत्रकार ने एनएचएआई के दावे को किया खारिज

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nh 33 roadमुकेश भारतीय

रांची। नेशनल हाईवे ऑथिरीटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा नेवरी विकास रांची से हजारीबाग तक बनाई गई एन.एच 33 फोरलेन सड़क पर  पिछले 6 माह के दौरान किसी हादसे में कोई मौत नहीं हुई है। एनएचएआई के अधिकृत वेबसाईट के इस दावे पर सरकारी व गैर सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों ने कड़ा आश्चर्य व्यक्त किया है।

वेबसाईट पर उल्लेख है कि रांची-हजारीबाग एन.एच.33 के फोरलेनिंग होने के बाद 9 अगस्त, 2015 से 1 जनवरी, 2016 के बीच कुल 452 सड़क हादसे हुए हैं लेकिन, उसमें किसी की मौत नहीं हुई है।

एक आकड़े के अनुसार सिर्फ ओरमांझी क्षेत्र में फोरलेन सड़क पर प्रति वर्ष 50 से उपर मौतें हो रही है। रांची से हजारीबाग तक सड़क हादसों में मरने वालों की तादात सैकड़ों में है। कई हादसे ऐसे हुए हैं, जिसमें एनएचएआई के अधिकारी स्वंय घटना स्थल पर आकर मुआवजा दिया है।

इस बाबत ओरमांझी थाना प्रभारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचलाधिकारी से बात की गई तो सब आश्चर्य में दिखे।

ormanjhi thana prabhari suman kumar sumanथाना प्रभारी सुमन कुमार सुमन ने कहा कि हालांकि वे कुछ माह पहले ही यहां पदास्थापित हुए हैं लेकिन सड़क हादसों में मौत नहीं होने की बात कोरी कल्पना है। मौतें तो हुई ही हैं। अध्ययन करने के बाद वे बताएगें कि अब तक कितनी मौते हुई हैं।

bdo rajnish kumarप्रखंड विकास पदाधिकारी रजनीश कुमार ने कहा कि ओरमांझी क्षेत्र में फोरलेन से जुड़े हादसों में मौते हुई है। ओरमांझी बाजार में ही हुआ है। ट्रक मकान में घुस गई थी। ऐसे तीन-चार केस है, जिसमें तत्काल मौत के बाद मुआवजा दी गई है।  मौतें न होने की बात कहना बिल्कुल गलत बात है।

अंचलाधिकारी अमर प्रसाद ने एनएचएआई के वेबसाईट पर जारी सूचना की बाबत कहा कि एनएचएआई द्वारा किस केटेगेरिया में रख कर आकड़ा प्रस्तुत किया गया है, यह देखना होगा। हालांकि मौते तो हुई ही हैं। इसे नकारा नहीं जा सकता। हाल के दिनों में भी कई मौते हुई है। हो सकता है कि एनएचएआई को जो लोग रिपोर्टिंग कर रहे हों, उन्होंने गलत आकड़े प्रेषित किये हों और एनएचएआई का उस पर ध्यान नहीं गया हो।

shailendra mishraएनएचएआई के वेबसाईट पर सड़क हादसों को लेकर जारी सूचना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए समाजसेवी शैलेन्द्र मिश्र ने कहा कि अगर एनएचएआई कहती है कि कोई मौते नहीं हुई है तो इससे वे पूरी तरह असहमत हैं। एनएच 33 के फोरलेनिंग के बाद निश्चित तौर पर सड़क हादसों में कमी आई है लेकिन यह कहना कि मौतें नहीं हुई है, कोरा बकबास है।

बकौल मिश्रा, उनके गांव के ही एक मुस्लिम युवक की मौत हो गई थी और खुद एनएचएआई के अधिकारी उसे 2 लाख रुपये मुआवजा दिया है।  ऐसे दर्जनों मामले हैं। दरअसल सड़क फोरलेनिंग का जो मापदंड होनी चाहिए थी, जो स्टैंडर्ड होनी चाहिए थी, उसे नहीं अपनाया गया है। ब्लॉक चौक को देखिए। यहां बनना था जक्शन लेकिन इतना संकीर्ण है कि हादसा होना स्वभाविक है। कांके रोड की सड़क से आने पर दोनों ओर कुछ भी दिखाई नहीं देता। अतिक्रमण भी इतना है कि सड़क पार करना बहुत मुश्किल है। यहां सड़क के पानी की निकासी की भी व्यवस्था तक नहीं की गई है। राजराम राम महतो के घर का अभी तक मुआवजा तक मिला है। उस घर के बने रहने से सड़क किनारे गुजरना तक मुश्किल है। जहां साईड रोड बननी चाहिए थी, वहां नहीं बनी है।

sanjay sriwastavपिछले 16 साल से ओरमांझी क्षेत्र से अखबार जगत (फिलहाल दैनिक हिन्दुस्तान) के लिए रिपोर्टिंग कर रहे संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि एनएचएआई वाले मूर्ख बना रहे हैं। फोरलेन बनने के बाद सड़क हादसों में कमी तो आई है लेकिन शून्य बताना समझ से परे है। रोजाना की बात है। सब देखते हैं कि कोई यहां मर गया तो कोई वहां मर गया। हमेशा कहीं न कहीं कोई मर रह है। एक नजर डालें तो साफ स्पष्ट है कि पिछले एक साल के भीतर सिर्फ ओरमांझी थाना क्षेत्र में 40 से उपर सड़क हादसे में अकाल मौत मरे हैं। एनएचएआई का दावा बिल्कुल झूठा है।

amod kumar sahuवहीं पिछले एक दशक से क्षेत्र से रिपोर्टिंग (फिलहाल दैनिक खबर मंत्र ) कर रहे आमोद कुमार साहू कहते हैं कि यहां दुर्घटनाएं तो बहुत होती है। उसमें मौतों की गणना करना काफी मुश्किल है। होता यह है कि सड़क हादसों में मृत या गंभीर रुप से घायल लोगों को अस्पताल ले जाया जाता है। वहीं जिस किसी की भी मौत होती है, उसकी सूचना नहीं मिल पाती है। अगर वर्ष 2015-2016 की बात करें तो यहां दर्जन भर लोग जरुर घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिए होगें। यह एनएचएआई की सूचना-तंत्र की कमजोरी है कि मौते हो रही है और सही सूचना नहीं पहुंच पा रही है।

आमोद बताते हैं कि एनएच 33 के फोरलेनिंग के निर्माण में इतनी मनमानी हुई हैं कि अपेक्षा से अधिक घटनाएं घट रही है। एक आम आदमी भी देख-समझ सकता है कि हर तरफ गड़बड़िया ही गड़बड़ियां हैं।

बहरहाल, एनएचएआई एवं उसके मातहत रांची-हजारीबाग एन.एच 33 फोरलेन सड़क निर्माण करने वाली कंपनियों ने एक सुनियोजित योजना के तहत व्यापक पैमाने पर लूट-खसोंट मचाई है और इसकी आंच से बचने की जुगत में व्यापक पैमाने पर प्रोपगंडा तैयार की गई है। उसी की एक कड़ी है राष्ट्रीय स्तर पर फोरलेन पर किसी हादसे में मौत का न होना।

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