सीएम ने कहा- ए भागो..मीडिया वाले सब भागो, सब निकल गये, लेकिन दुबके रहे दो बड़े वेशर्म पत्रकार

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राजनामा न्यूज डेस्क। ‘ए भागो…मीडिया वाले सब भागो..यहां से सब निकलो,भागो ’…. जी हां, ऐसे शब्द-वाक्य के प्रयोग कोई आम आदमी या बौखलाती भीड़ के नहीं है। बल्कि, झारखंड सूबे के मुखिया सीएम रघुवर दास के हैं। सीएम के इस अवांछित टिप्पणी सुनते के बाद सारे मीडियाकर्मी भरी सभी से अपमानित होकर बाहर निकल आये लेकिन दो धुरंधर पत्रकार मुंह छुपाये जमे रहे। वे हैं रांची से प्रकाशित दैनिक आजाद सिपाही के संपादक हरिनारायण सिंह और प्रभात खबर के ब्यूरो प्रमुख सलाउद्दीन। इन्हें लेकर आम चर्चा बन गई है कि कहीं ये दोनों भाजपा के होनहार तो नहीं बन गये हैं!

कहते हैं कि आज हजारीबाग में भाजपा का प्रमंडलीय कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसके 2-3 दिन पहले से ही पार्टी के मीडिया प्रभारी अनील सिन्हा ने हजारीबाग प्रमंडल के प्रायः पत्रकारों को कवरेज के लिये वाकायदा निमत्रंण भी दिया था। कार्यक्रम स्थल पर मीडियाकर्मियों के लिये प्रेस दीर्घा भी बनाये गये थे।

लेकिन, सीएम रघुबर दास जैसे ही कार्यकर्ताओं को संबोधित करने लगे और उपस्थित प्रमुख लोगों के नाम गिनाने लगे कि अचानक प्रेस दीर्घा में बैठे मीडियाकर्मियों पर उबल पड़े… “ए भागो…मीडिया वाले सब भागो..यहां से सब निकलो,भागो ”

इतना सुनते ही सारे मीडियाकर्मी कार्यक्रम सभागार से बाहर निकल आये। लेकिन वहीं रांची से प्रकाशित दैनिक आजाद सिपाही के संपादक हरिनारायण सिंह और प्रभात खबर के ब्यूरो प्रमुख सलाउद्दीन कार्यकर्ताओं की कुर्सी पर मुंह छिपाये बैठे रह गये।

हजारीबाग के वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह…

इस मामले को लेकर हजारीबाग के वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह कहते है, ‘ देखिये आज भाजपा की केन्द्र की सरकार हो या यहां राज्य की सरकार हो। वे मीडिया को जरखरीद गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं। और इसकी प्रक्रिया उन्होंने स्टार्ट कर रखी है। बड़े घरानों की मीडिया का वौद्धिक अपहरण कर लिया गया है। और जो पत्रकार लोग हैं, वे खुद को अकेला महसूस कर रहा है।’

वे आगे कहते हैं, ‘आम पत्रकार क्या कर सकता है। संपादक वही करता है, जो मालिक कहता है। और पत्रकार भी वही करने को वाध्य हो जाता है, जो संपादक कहता है। और अखबार का मालिक वही करता है, जो सरकार कहता है।’

टीपी सिंह बताते हैं कि जो परंपरा चली आ रही है, उसके अनुसार यहां (हजारीबाग) की भाजपा के स्थानीय लोगों ने कवरेज के लिये मीडिया को बुलाया। लेकिन सीएम रघुवर दास समझते हैं कि बड़े मीडिया घराने और उसके संपादक उनकी जेब में रहते हैं। ऐसे में नीचे स्तर के पत्रकारों का क्या सम्मान रह जाता है।

बकौल टीपी सिंह, सीएम द्वारा विल्कुल भद्दी बात बोलने के बाद यहां सारे मीडियाकर्मी बाहर निकल आये, वहीं वरिष्ठ संपादक-पत्रकार हरिनारायण सिंह सरीखे लोग कार्यकर्ताओं के बीच मुंह छुपाकर बैठे कर नये पत्रकारों को क्या संदेश देना चाहते हैँ? यह बड़ी शर्म की बात है।

यदि सीएम पार्टी कार्यकर्ताओं के सममेलन से मीडियाकर्मियों को बाहर ही निकालना चाहते थे तो वे सभ्य तरीके से भी स्थानीय पार्टी नेताओ से कहवा सकते थे कि चलिये आप सबों का फोटो-शोटो हो गया, बाद में बाहर ब्रीफ ले लीजियेगा। लेकिन सीएम के अभद्र व्यवहार पर पत्रकारों ने काफी संयम बरता और अपमान का घूंट पीकर बाहर निकल गये।

इसके पहले भी सीएम रघुवर दास ऐसा व्यवहार कर चुके हैं। लेकिन वह व्यवहार मीडिया के प्रति न होकर ग्रामीणों के प्रति था। इसके पहले सीएम का एक कार्यक्रम कंडसार गांव में हुआ था। वहां भी सीएम ने ग्रामीणों के बीच अचानक अपना तेवर दिखाते हुये बोले कि ‘ ए चलो, यहां से उठो। दूसरे गांव वाले यहां से भागो, सब भागो ’।

लेकिन उस समय ग्रामीण भी यह कह कर आक्रामक तेवर में आ गये थे कि ‘ ए निकलो कहां। तुम यहां से निकलो। घर मेरे बाप का। जमीन मेरे बाप का….और तुम हमको निकलने को बोलता है।’ इसके बाद सीएम साहेब ने गांव वालों को यह कह कर चुप करा दिया था कि ‘ नहीं-नहीं, बैठो भाई। हम नहीं जानते थे कि तुम ही लोग का जमीन है। सब बैठो-बैठो।’

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