सीएम नीतिश के चहेते जदयू विधायक के गांव में अवैध शराब पर पुलिस का गंदा खेला !

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नालंदा (संवाददाता)। बिहार के सीएम नीतिश कुमार के चहेते विधायक एवं पूर्व मंत्री हरिनारायण सिंह के गांव महमदपुर में पुलिस और शाराब का एक बड़ा गंदा खेल उभरकर सामने आया है।

nagarnausa-ps-incharj-kamlesh-singh-with-wineबीते दिन नगरनौसा थाना प्रभारी कमलेश ने पदभार ग्रहण के तुरंत बाद अवैध अंग्रेजी शराब के खिलाफ लगातार दो छापे मारे और खबरों के मुताबिक विधायक के घर के बगल में एनएच के आसपास से छः बोतल तथा कैला गांव से एक बोतल अंग्रेजी शराब एवं दो लीटर देशी शराब बरामद की। इस दौरान अवैध शराब के कारोबारी फरार होने में सफल हो गये।

आगे इस मामले के रोचक पहलु उजागर करने से पहले स्पष्ट करने वाली बात यह है कि महमदपुर गांव नालंदा जिले के चंडी और नगरनौसा थाना के ठीक सीमा रेखा पर अवस्थित है। नगरनौसा थाना के थाना प्रभारी को एक उपरी गेम प्लान के तहत अचानक हटाकर चंडी थाना के सहायक अवर निरीक्षक कमलेश सिंह को नगरनौसा थाना प्रभार दे दिया गया। वर्षों से क्षेत्र में जमे कमलेश सिंह की छवि भ्रष्टतम पुलिसकर्मी की रही है। फिर भी पड़ोस के नगरनौसा थाना का प्रभार मिलना पुलिस महकमा के वरीय अफसरों पर कई तरह के सबाल खड़ा करते हैं।

बहरहाल, नगरनौसा थाना के महमदपुर गांव में शराब की बरामदगी एनएच सड़क के आसपास नहीं हुई थी बल्कि, एक घर से हुई थी। शराब बरामदगी के साथ तीन लोग पकड़े भी गये थे। उसी में एक जगदीश साव नामक अवैध शराब के धंधेबाज के गांव कैला स्थित मकान से भारी पैमाने पर अवैध शराब की बरामदगी हुई थी। इस कारोबार में जुड़े सभी लोग एक ही परिवार के हैं।

कहा जाता है कि अवैध शराब बरामदगी और कारोबारी के मामले में नगरनौसा पुलिस ने बड़े पैमाने पर लेन-देन किया और अपने उपर के एक अधिकारी के साथ मिलकर मामले को पलट दिया। सूत्रों के अनुसार अवैध शराब के कारोबारियों को छोड़ने एवं केस हल्का करने की एवज में नगरनौसा थाना प्रभारी कमलेश सिंह ने 40 हजार रुपये लिये।

bhaskar-newsइस मामले का सबसे अहम सबाल है कि जब पुलिस ने अवैध शराब के कारोबारियों  के महमदपुर गांव स्थित किराये के मकान के बाद उसके पैत्रिक गांव कैला में छापामारी की तो फिर दोनों को अलग-अलग मामले क्यों ठोक डाले। थाना प्रभारी द्वारा स्थानीय अखबारों को भी इस तरह के गुमराह करने वाली सूचनायें उपलब्ध कराई गई कि सबों में दो अलग-अलग खबरें प्रकाशित हुईं।

दरअसल, नगरनौसा थाना प्राभारी ने जिस गोपनीय सूचना के आधार पर छापेमारी करने की बात बताई है, वह सत्य से बिल्कुल परे है। सच्चाई तो यह है कि थाना प्रभारी को सब कुछ पहले से पता था और सीमा पर गांव होने के कारण उन्हीं के वसूली में अवैध शराब का कारोबार हो रहा था। इस आड़ में वरीय अफसरों की चिरौंदी कर वह पूर्व थाना प्रभारी को हटा कर खुद प्रभारी बन गया। अगर इसकी उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच हुई तो जदयू विधायक के गांव में पुलिस विभाग का एक बड़ा अंदरुनी गेम प्लान उभर कर स्वतः सामने आ जायेगा।

bhaskar-news-1बहरहाल, चाहे चंडी थाना क्षेत्र हो या नगरनौसा थाना क्षेत्र, दोगुनी-तिगुनी कीमत पर हर जगह अवैध अंग्रेजी शराब उपलब्ध है। इसमें पुलिस की खुली संलिप्तता से इंकार नहीं किया जा सकता है। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के घर-जिले और उनके चहेते जदयू विधायक एवं पूर्व मंत्री हरिनारायण सिंह के क्षेत्र होने के थाना प्रभारी की पहुंच डीएसपी-एसपी से भी उपर मानी जाती है। एक थाना प्रभारी का तो यहां तक दंभ है कि एसपी उनका तबादला क्या करेगा, करने से पहले उसका ही हो जायेगा। क्योंकि, उसकी पहुंच चरम तक है।

 

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