सीएम को कवर करने से रोका तो फर्जी सूचना वायरल पर चला दी खबर

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राजनामा.कॉम. बिहार के नालंदा में पत्रकारिता की बेशर्मी कहें या नालायकी कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल फर्जी सूचना की बिना जांच पड़ताल किए एक न्यूज चैनल के संवाददाता तक ने लपक लिया और उसे अपने चैनल में फूल प्लेट पट्टी ब्रेकिंग चला दी। इस खबर से जिला प्रशासन तथा राजनीतिक दलों में हडकंप मच गया।

मामला नालंदा के राजगीर से जुड़ा है, जहाँ सीएम नीतीश कुमार अपने प्रवास के दौरान ऐतिहासिक घोड़ा कटोरा झील की सैर को निकले हुए थे। जहाँ नालंदा तथा पटना के आलाधिकारी भी थे।

सीएम के घोड़ा कटोरा झील जाने के दौरान कुछ पत्रकार न्यूज कवरेज के लिए पहुँचे हुए थे। लेकिन उन्हें वन विभाग द्वारा अनुमति नहीं मिली। यहां तक कि सीएम के काफिले में जदयू नेताओं को भी जाने की अनुमति नहीं मिली थी।

इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफार्म (व्हाट्सएप्प ग्रुपों) पर एक खबर वायरल हो जाती है कि…..

“सता के संरक्षण में चल रहे थे सीसीए लगे लोग, घोड़ा कटोरा जाने के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले में सीसीए लगे लोग हुए शामिल, कार्यकर्ता ने सुनाई खरी खोटी”

इस खबर को एक क्षेत्रीय न्यूज चैनल ने खबर की बिना पुष्टि किए उसे फुल प्लेट पट्टी के रूप में चला दी। खबर चलते ही जिला प्रशासन तथा जदयू कार्यकर्ताओं में खलबली मच गई।

पुलिस प्रशासन भी इस खबर की पुष्टि में लग गई। लेकिन प्रशासन को उन शख्स के बारे में जानकारी नहीं मिल पाई। जबकि सीएम के काफिले में गिने चुने आम आदमी ही शामिल हुए थे। नालंदा जिला प्रशासन तथा राजगीर डीएसपी ने खबर का खंडन करते हुए कहा कि उक्त खबर बेबुनियाद है।

इधर जदयू के युवा जिला अध्यक्ष तथा राजगीर प्रखंड अध्यक्ष मीरा कुमारी ने भी इस खबर का खंडन करते हुए कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता है। यह खबर बिल्कुल निराधार है। इस तरह की फर्जी खबरों का वे सार्वजनिक तौर पर खंडन करते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि अगर कोई सत्ता के संरक्षण में सीसीए लगा व्यक्ति सीएम के काफिले में शामिल हो सकता है तो इस मामले में पूरी की पूरी पार्टी दोषी कैसे हो सकता है।

सत्ता संरक्षण का आशय, उनमें शामिल व्यक्ति (पार्टी से जुड़ा कोई सदस्य) या जनप्रतिनिधि (वार्ड पार्षद / एमएलए / एमपी / मंत्री) होते हैं। यहाँ प्रश्न हीं नहीं उठता कि सत्ता से जुड़ा कोई ऐसा अपराध कर वो करा सकते हैं। 

रही बात  सीसीए लगे लोगो के काफिले में शामिल होने की तो  दुर्गा पुजा से जुड़ा कोई भी मामले मे सीसीए लगा व्यक्ति अथवा अन्य किसी भी अपराध में शामिल चार्जशीट दाखिल व्यक्ति जिस पर राज्य के किसी भी जिला में पुलिस अधीक्षक से अनुसंधानों उपरांत अनुशंसित-पत्र जिला अधिकारी को सीसीए की कार्रवाई हेतु दी जाती है।

जबकि वायरल खबर में  “लोग” शब्द का प्रयोग कर पार्टियों से जुड़े सभी लोगों को चौका दिया है। उन्हें असमंजस में डाल रखा है कि आखिर ऐसे कौन-कौन लोग थे, जो सीसीएधारी शामिल हो गए और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।

इधर नालंदा में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। खबरों की बिना जांच पड़ताल किए प्रकाशित और प्रसारित करने में नालंदा के तथाकथित लोग काफी माहिर है।

जब जिला प्रशासन ने इस खबर का खंडन कर दिया तो मीडिया के लोग यह बताने में तथा उनकी पहचान करने में बिल्कुल नकारा साबित हुए हैं। आखिर कैसे कोई किसी का महिमा मंडन कर दे कि सीसीए धारी लोग सीएम के काफिले में चल रहे थे। उनका संरक्षण प्राप्त है।

यह सबक है पत्रकारों के लिए कि ब्रेकिंग की होड़ में अपनी मर्यादा न भूलें। तभी पत्रकारिता की विश्वसनीयता कायम रहेंगी। अन्यथा ऐसों की रहेगा न कभी कोई रोवनहारा।

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