ऐसे सिरफिरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं ?

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बड़े मियां तो बड़े मियां- छोटे मियां भी सुभान अल्लाह। जी हां, हम बात कर रहे हैं विश्व हिन्दू परिषद के स्वंयभू अशोक सिंघल और उनके चहेते उग्रपंथी चेला प्रवीण तोगड़िया की।

हाल ही में अशोक सिंघल ने मुसलमानों का खौफ दिखाते हुये प्रत्येक हिन्दू को पांच बच्चे पैदा करने की सलाह तक दे डाली, वहीं उनके चेले प्रवीण तोगड़िया ने कहा है कि यदि वे प्रधानमंत्री बने तो  देश के मुस्लिमों से वोट देने का अधिकार छीन लेगें।

यही नहीं, तोगड़िया ने यहां तक कह डाला है कि वे देश के किसी भी संवैधानिक पद पर मुसलमानों को नहीं रहने देगें। उनके राज में कोई भी मुसलमान प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री, प्रधान सचिव, सचिव, एसपी, कलेक्टर सहित अन्य किसी भी पद पर नहीं रह पायेगा। वे उनसे सभी पद छीन लेगें। बकौल प्रवीण तोगड़िया, यह सब वे प्रधानमंत्री बनने के दूसरे दिन ही कर डालेगें।

ऐसे में सबाल उठता है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में क्या सिंघल-तोगड़िया सरीखे लोगों को ऐसा कहने-बोलने का अधिकार है ?  हालांकि प्रवीण तोगड़िया का प्रधानमंत्री बनने और एक खास समुदाय के विरुद्ध इच्छित कार्रवाई करने की बात कोरी कल्पना से अधिक कुछ नहीं है। फिर भी आपसी भाईचारे को नष्ट कर देश में दो समुदाय को भड़काने को लेकर कानून के रखवाले खामोश क्यों है ?

वेशक देश के ऐसे सिरफिरे कट्टरवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिये। इन्हें किसी भी हालत में देश में आग लगाने की छूट नहीं मिलनी चाहिये। इस तरह की भाषा का प्रयोग खुला राष्ट्रद्रोह है। देश की एकता-अखंडता को नष्ट करने की एक सोची समझी साजिश है।

………… मुकेश भारतीय

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