कशिश चैनल की कसाईगिरी चालू आहे

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राजनामा.कॉम। झारखंड की राजधानी रांची से एक बिल्डर सुनील चौधरी ने अपने काले धन की सहायता से काले धन की सुरक्षा के लिए रिहायशी इलाके में “कशिश” नामक एक न्यूज चैनल खोला है।इस चैनल से जुड़े स्वंयभू पत्रकारों-प्रबंधकों की घटियापन से उब कर प्रायः लोग अलविदा कह चुके हैं।मेरा दावा है कि यदि किसी भी पत्रकार में थोड़ा सा भी जमीर जिंदा है तो यहां नहीं टिक सकता।इस चैनल में वही महिला/पुरुष पत्रकार टिक सकता है जो अपना स्वभिमान-प्रतिष्ठा दावं पर लगा दिया हो! हाल ही में इस चैनल के न्यूज हेड गंगेश गुंजन और पूनम पांडे नाम की एंकर की गुल सुर्खियों में रही है।इस चैनल का प्रधान संपादक विजय भाष्कर एक अखबार से रिटार्यट होकर अपनी बचे दिन ऐशोआराम से काटने की मंशा से एक कोना पकड़ कर बैठे हैं। चैनल में इनकी स्थिति न लिपने लायक है और न पोतने लायक।

 सबसे शर्मनाक स्थिति तब बन जाती है,जब किसी भी संपादकीय विभाग से जुड़े किसी भी मसले पर दो टूक जबाव देते हैं कि वे संपादकीय विभाग में कुछ भी हो,हस्तक्षेप नहीं करते। श्री भाष्कर के साला जयदीप सिंह इस न्यूज चैनल के महाप्रबंधक हैं,जो मूलतः बिल्डर के धंधों की मैनेजरी करता है। सच पुछये तो  बिल्डर सुनील चौधरी ने इस मीडिया हाउस का निर्माण ही अपने काले कारनामों को प्रेस के लेबल से छुपाने के लिये ही किया है। जैसा कि पहले से कई बिल्डर करते आ रहे हैं।

बहरहाल,इस चैनल के ठेकेदार पत्रकार रांची से पटना तक एंकर रिपोर्टर ढूंढते फिर रहे हैं। पटना से एक नवोदित पत्रकार बन्धु सुधीर सिंह ने इस संदर्भ में एक रोचक आपबीती व्यंग्य लिख कर भेजा है,जो समूचे मीडिया जगत को शर्मसार कर डालती है।साथ ही यह सवाल भी उठाती है कि क्या हमारे देश में कोई ऐसी संवैधानिक संस्था नहीं है,जो ऐसे धंधेबाजों पर लगाम कस सके। ……………..

“ब्रेकिंग न्यूज: इंटरव्यू की जगह से रिज्यूम गायब!”

एक भाई साहब बड़ी उम्मीद लेकर एक समाचार चैनल मे गए इंटरव्यू देने के लिए। पहले तो गेट पर घुसते हीं गार्ड ने धमाकेदार आवाज़ में कहा की कहां जा रहे हैं, पहिले रजिस्टरवा पर साइनवा त करते जाइए। चलिए जनाब वहां से आगे बढ़े तो एक सज्जन से दिखने वाले साहब आए और बोले की बैठ जाओ जाकर उधर आगंतुक कक्ष में, ये जनाब जाकर बैठ गए, बैठ तो गए पर तुरंत हीं वापस खड़े भी हो गए। आप सोच रहे होंगे की क्या बात है कि बैठे और खड़े भी हो गए । हुआ ये था कि जिस आगंतुक कक्ष में उनको बैठाया गया था उसमे तिल रखने की भी जगह नहीं थी, ये इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि एक पद के लिए कितने योग्य औऱ कर्मठ उम्मीदवार होते हैं । चलिए साहब किसी तरह से एडजस्ट कर लिय़ा और आसन ग्रहण कर लिया। तभी एक और अति सुशील और महा सज्जन महापुरुष का पदार्पण हुआ आगंतुक कक्ष में सभी की आंखे ऐसे चमक उठी जैसे की किसी भूखे के सामने छप्पन भोग रख दिए गए हों। आगे उन महापुरूष ने अतिशालीनता के साथ कहा की तुम लोग अपना-अपना सीवी यानी की दूसरी जन्मपत्री निकालो और एक तस्वीर के साथ मुझे दे दो। सभी ने दे भी दिया और महापुरूष जी एक बड़ा सा बंडल लेकर चल दिए दूसरी जन्मकुंडली का। जाते-जाते कह गए की तुम लोग यहां बैठ कर मख्खी मारो मैं तुम लोगो को एक-एक करके बुलाउंगा तुम गुड़ की मख्खी की तरह आ जाना। कुछ देर बाद लोगो का जाना शुरू हो गया। एक, दो, तीन, चार इसी तरह पता नहीं कितने लोग अंदर गए। हमारे जनाब भी इंतज़ार में लगे रहे की उनकी बारी आएगी।

 इसी तरह से उनके पीछे वाले लोग भी बहती गंगा में हांथ धोकर निकल गए पर जनाब की बारी नहीं आई । कुछ देर और इंतज़ार किया जनाब ने फिर जब संयम नहीं रहा तो उठे और अंदर जाकर महापुरूष जी से कहा की सर मेरा नंबर कब आएगा मैने तो काफी पहले आपको अपनी दूसरी जन्मकुंडली दी थी। तो उन महापुरूष ने प्रवचन देना शुरू किया की आपने कब दिया था हमे तो नहीं मिला। तो हमारे जनाब ने कहा की काफी पहले दिया था और सबसे पहले दिया था। बहस शुरू हो गई, तो कुछ देर के बाद महापुरूष जी चल दिए अंदर और जब लौट कर आए तो कहने लगे की आप जाकर मिल लिजिए। जनाब चल दिए अंदर और जब साक्षात्कार कक्ष में घुसे तो महाशय जी गर्मा-गर्म चाय की चुस्की लेते हुए कहने लगे की नाम क्या है, जनाब ने नाम बताया तो महाशय अपनी मेज़ पर कुछ ढ़ूंढ़ने की फ्लॉप एक्टिंग करने लगे फिर जब लगा की ओवरएक्टिंग कर रहे हैं तो बोले की आपकी रूची किस तरह की है पहले तो जनाब डर गए की क्या सवाल पूछ लिया की आपकी रूची किस तरह की है। वो तो किसी रूची को नहीं जानते और किसी लड़की को जानते भी हैं तो उसका नाम तो कुछ और हीं है। फिर उनकी समझ में आया की ये पूछना चाहते हैं की आपकी रूची किस क्षेत्र में है। तो जनाब ने काफी गर्व के साथ कहा की जी डेस्क वर्क में है। तो महाशय बोले की क्या कर रहे है अभी आप तो जनाब ने कहा की जी अभी तो फिलहाल आपके प्रश्नो का उत्तर दे रहा हूं। तो महाशय ने कहा की काफी हाज़िर जवाब हैं आप तो मैं पूछ रहा था की क्या काम धाम कर रहे हैं । तो जनाब ने कहा की जी

अभी लास्ट इयर की परीक्षा चल रही है। तो फिर महानुभव ने फरमाया की आपने कभी काम किया है। तो जनाब ने मन ही मन सोचा की क्या बात है कहने को तो काफी बड़े ओहदे पर काम कर रहे है और इतना बचकाना सवाल कर रहे है कि काम धाम किया है कि नहीं। मैने कहा कि जी सर देश के एक काफी प्रतिष्ठित समाचार चैनल में मैने इंटर्नशिप की है और मैं किसी भी बीट पर डेस्क पर काम कर सकता हूं। तो महाशय ने कहा की ठीक है आप हमारे समाचार चैनल के मुख्यालय में आइए और आकर कुछ दिन काम किजिए हमारे साथ अगर आपका काम हमे अच्छा लगा तो आपकी नौकरी पक्की समझिए और फलाने तारीख को आ जाइएगा और मेरे ईमेल आईडी पर अपना रिज्यूम भेज दिजीए। और आने से पहले कॉल कर लिजिएगा। जनाब ने भी सोचा की चलो क्या हर्ज है चलकर देखते हैं की क्या हो सकता है। जनाब ने कहा की ठीक है महाशय मै आता हूं और काम करके दिखाता हूं। बाहर निकलते ही महापुरूष को पकड़ा जनाब ने और कहा की महाशय जी ने कहा है कि आप उनका नंबर और आईडी दे दीजिए । सबकुछ मिल गया और जनाब जाकर बैठ गए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान जो कुछ जनाब ने देखा की उस समाचार चैनल का हर एक आदमी यानी की उस चैनल में काम करने वाले लोग कई लोगो को समझा रहे है कि तुम एसे करना वैसे करना । यानी की कुल मिलाकर जितने भी लोग वहां गए थे साक्षात्कार के लिए सामने के दरवाजे से उससे कहीं ज्यादा लोग वहां आये थे पिछले दरवाज़े से।सब के सब किसी ना किसी के संपर्क से।

खैर जनाब जब घर आए तो सोचा की मेल कर दिया जाए दूसरी जन्मकुंडली को मिले पते पर। लेकिन जब मेल भेजा तो गूगल बाबा की छोटी बहन जी मेल जी ने कहा की पता गलत है आपका मेल नहीं

जा सकता क्योंकि पता गलत है । सब जीत कर भी हार गए जनाब। अब सोच मे पड़ गए की क्या हुआ क्यो गलत पता दिया, अगर काम नहीं देना था तो साफ मना कर देते की मेरे किसी जानकार को रख लिया गया है। आपलोग आराम किजिए या फिर किसी दूसरी जगह कोशिश किजीए। फिर से जनाब कोशिश में लगे हुए हैं की काम की व्यवस्था हो जाए कही ना कहीं काम मिल जाये।

…..मुकेश भारतीय

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