सर्जिकल अटैक : देशहित में कई सवाल

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दोस्तों, आज का संपादकीय अत्यंत ही महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है। इसका मकसद केवल इतना है कि हम सभी देशवासी अपने प्यारे बहादुर सैनिकों पर विश्वास बनाये रखें और देश की मौजूदा राजनीतिक सत्ता की आंख में आंख डाल कर सवाल कर सकें। याद रखिए सैनिक हमारे अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं। वे कोई और नहीं हमारे-आपके अपने परिजन हैं। यदि देश की मौजूदा राजनीतिक ताकत उनका बेजा इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए करती है तो हमें सवाल पूछने ही होंगे। जम्मू-कश्मीर के उड़ी सेक्टर में आतंकियों के हमले में देश के 17 जवान शहीद हो गये।

इस हमले में घायल एक और जवान की मौत इलाज के दौरान होने की सूचना मिली है। इस आतंकी हमले के बाद पूरा देश एक साथ दिखा और सभी ने सरकार से आतंकियों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की। देशवासियों की यह एकता भारत की बुनियाद है। इसे राजनीतिक रुप देना न केवल मुर्खता है बल्कि देश के साथ गद्दारी भी। खैर उड़ी आतंकी हमले के बाद भारतीय मीडिया ने तमाम तरह की खबरें दिखायीं। इनमें पाकिस्तान सीमा में लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर आतंकियों को मारे जाने की खबरें भी शामिल थी।

दिलचस्प यह था कि हर बार भारतीय सेना द्वारा इसका खंडन किया गया। इस बीच बीते बुधवार को एक खबर दिल्ली से आयी। खबर थी कि घूसकांड मामले में सीबीआई जांच झेल रहे डी जी बंसल ने अपने बेटे के साथ खुदकुशी कर ली। इसके पहले उनकी पत्नी और बेटी भी खुदकुशी कर ली थी। बंसल ने मरने से पहले अपने सुसाइड नोट में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का नाम लिखा। इस तथ्य को भारतीय मीडिया ने पूरी तरह गायब कर दिया। हालांकि सोशल मीडिया पर तोते यानी सीबीआई के गिद्ध बनने की बातें खूब उछली।

गुरुवार की सुबह दिल्ली में भारतीय सैन्य पदाधिकारी ने इस बात का खुलासा किया कि भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर के हिस्से में घुसकर आतंकियों के सात कैंप नष्ट कर दिया। भारतीय सेना द्वारा इस कार्रवाई को सर्जिकल अटैक की संज्ञा दी गयी। उसने दावा किया कि इस कार्रवाई में 38 आतंकी मारे गये। बताते चलें कि इससे पहले सर्जिकल अटैक तब चर्चा में आया था जब अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान की धरती पर जाकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था।

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि तब अमेरिकी सेना ने अपने द्वारा दिये गये अंजाम की वीडियो को सार्वजनिक किया था। लेकिन भारतीय सेना ने अपनी कार्रवाई का कोई वीडियो अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। जबकि सेना का कहना है कि पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकार्डिंग की गयी है।

दूसरी ओर पाकिस्तान ने भारतीय सेना के इस दावे का खंडन किया है कि भारतीय सैनिकों ने पीओके में घुसकर सर्जिकल अटैक जैसी कोई कार्रवाई की है। उसका कहना है कि सीमा पर गोलीबारी दोनों ओर से हुई है। इसमें उसके दो सैनिक शहीद हुए हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम के सभी पहलूओं पर नजर डालें तो कहा जा सकता है कि सीमा पर हरकत तेज हुई है। संभव है कि भारतीय सेना सच कह रही हो।

यदि ऐसा हुआ है तो निश्चित तौर पर हम सभी भारतीयों को अपने सैनिकों पर गर्व होना चाहिए। लेकिन सवाल का उठना लाजमी है। सवाल इसलिए कि जब भारतीय सेना यह कह रही है कि उसने पाकिस्तानी सेना और नागरिकों के खिलाफ़ कार्रवाई न करके केवल आतंकियों को मारा है तो उसे वीडियो रिलीज कर देना चाहिए। ताकि पूरी दुनिया भारतीय जांबाजों की जांबाजी देख सके। पाकिस्तानी सैनिक भी भारतीय सपूतों की बहादुरी देख दहल जायें। लेकिन भारतीय फ़ौज द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। इसके संबंध में तर्क दिये जा रहे हैं। अधिकांश तर्क संदेह को बढाने वाले हैं।

सबसे पहली बात तो यह कि आखिर भारतीय सेना को तामझाम करने की जरुरत क्यों महसूस हुई। बीबीसी के अनुसार भारतीय सैनिकों द्वारा पूर्व में भी सर्जिकल आपरेशन अंजाम दिये गये हैं। लेकिन पूर्व की कार्रवाईयों को इस तरीके से जनमानस के बीच प्रस्तुत नहीं किया गया था। दूसरी बात तो यह कि आखिर भारतीय सेना ने इस पूरी कार्रवाई के सबूत क्यों जुटाने के प्रयास किये। सेना का कहना है कि पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकार्डिंग की गयी। ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल किया गया।

आखिर भारतीय सेना को डर किस बात का है। क्या उसे देशवासियों से मिल रहे समर्थन पर अविश्वास है? सेना में ब्रिगेडियर रह चुके एक व्यक्ति ने पूछने पर बताया कि भारतीय फ़ौज के लिए सर्जिकल अटैक कोई नया शब्द नहीं है। लेकिन इस तरह के अटैक एक बार में एक ही जगह पर होते हैं। एक साथ सात अलग-अलग जगहों पर सर्जिकल अटैक को अंजाम नहीं दिया जा सकता है। खासकर आजकल के अत्याधुनिक संचार तंत्र के जमाने में।

फ़िर इस बात से कैसे इन्कार किया जा सकता है कि भारतीय सेना जब पीओके में घुस रही होगी तब पाकिस्तानी सैनिकों ने उनका विरोध नहीं किया हो। इसके अलावा जब आतंकी कैंपों को भारतीय सेना तबाह कर रही होगी तब क्या आतंकी खामोश बूत बन अपने मारे जाने का इंतजार कर रहे होंगे।

बहरहाल भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अब गंभीर स्थिति में आ गया है। ऐसे में भारत सरकार को पूरी संवेदनशीलता के साथ पहल करनी चाहिए। उसे पूरे देश की जनता को अपने विश्वास में लेना चाहिए ताकि हर भारतीय अपनी सेना के पीछे खड़ी रहे और पाकिस्तान भी यह समझ ले कि भारत अब मौन बैठने वाला नहीं है। लेकिन इसके लिए उसे करारा जवाब मिलना चाहिए, कोई काल्पनिक जवाब नहीं।

 

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