‘सरगुन’ की दर कब पहुंचेगें झारखंड के ‘दास’

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सोशल साइट पर जमीन से जुड़ी कई सूचनाएं मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देती है। एक ऐसी ही सूचना फेसबुक के मित्र बॉबी सिंह ने पोस्ट की है।

“ झारखण्ड में आज भी गरीब गरीब ही है। सभी जगह व्याप्त है कागजी खेल। ग्राम पंचायत सिर्फ नाम के नहीं मिला ग्राम पंचायत को कोई अधिकार। देखिये सरकार के दोरंगे नीति का खेल।

यह है राकेश रौशन दास उर्फ़ सरगुन दास। यह हरिजन वर्ग से ग्राम पंचायत लखनपाहाड़ी, पथरगामा, गोड्डा, झारखण्ड के रहने वाले है। इन्होंने 10+2 तक की पढाई किया है। इसके बाद शारीरिक बीमारी और गरीबी की वजह से आगे नहीं पढ़ पाये।

sargunवर्ष 1996 में इन्होने नवोदय विद्यालय ललमटिया, गोड्डा से 10वीं पास किया और वर्ष 1999 में पथरगामा कालेज से इंटर पास किया है अच्छे अंको के साथ। कम उम्र में ही इनकी शादी होगई। विवाह उपरांत इनकी सौतेली माँ और सौतले भाई ने इन्हें बिना पैत्रिक सम्पति के घर से पत्नी सहित इन्हें निकाल दिया। नके दो संतान भी है,जो आज अपनी माँ के साथ अपने ननिहाल में है और इनकी पत्नी दूसरों के घर जूठा साफ़ कर अपना और अपने बच्चो का पेट पाल रही है तथा खुद सरगुन दास माता योगिनी दरबार में सरण लिये हुये है।

अपने शरीर से लाचार सरगुन दास सरकार के दरबार में अपना फरियाद करते करते थक गए है। इनका नाम बीपीएल सूची में आज तक शामिल नही किया गया है। इनके भोजन वस्त्र का व्यवस्था माँ योगिनी मंदिर के संचालक द्वारा किया जा रहा है।

आज कल सरगुन दास दिन भर भीख मांगकर दो पैसे का जुगाड़ करने में लगे हुए हैं ताकि, उन पैसो से अपने और अपने परिवार के लिए एक छोटा सा घर बना सकें। “

bobby…… अपने फेसबुक वाल पर पथरगामा के बॉबी सिंह

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