समाज के लिए खतरा है ऐसे वेबसाइट-पत्रकार

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कल मैंने मीडिया की हलचलों और उससे जुड़े राजनीतिक सुर्खियों की खबर देने वाली वेबसाइट  http://bhadas4media.com/  की एक खबर पर नजर गई तो मैं चौंक पड़ा। वह खबर ही ऐसी ही थी। 

bhadasखबर थी कि देश की प्रथम आइपीएस महिला दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीएम पद की उम्मीदवार किरण बेदी नहीं, बल्कि पंजाब की सुरजीत कौर थी, जिनकी मौत एक सड़क हादसे में हो गई थी।

इस खबर को वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वाल से साभार प्रकाशित की गई है। इस खबर का लेखन और प्रस्तुति इतने रोचक ढंग से की गई है कि कोई सहज अविश्वास नहीं कर सकता (देखें लिंकः ) । 

लेकिन इस खबर के तत्थों को  लेकर जब मैंने अपने फेसबुक वाल पर सबालिया लहजे में एक पोस्ट किया तो उसके नतीजे जिस तरह से सामने आए, वे अधिक चौंकाने वाले निकले। खबर के तत्थ   http://www.fodey.com नामक वेबसाइट से फर्जी तौर पर जुटाए गए प्रतीत हुए। 

faduजाहिर है कि खुद को कथित वरिष्ठ पत्रकार की श्रेणी से विभूषित करने वाले संजय कुमार सिंह ने यह खबर फर्जी तौर पर किसी को फायदा और किसी को नुकसान करने के लिए गढ़ी है। इस लिंक पर जाकर कोई भी यूजर ऐसी भ्रामक खबरें गढ़ सकता हैः http://www.fodey.com/generators/newspaper/snippet.asp। 

अगर संजय कुमार सिंह या भड़ास  के पास किरण बेदी के प्रथम आइपीएस न होने और सड़क हादसे के शिकार सुरजीत कौर की बाबत कोई प्रमाणिक जानकारी है तो उसे सार्वजनिक करनी चाहिये या फिर समाज देश से माफी मांगनी चाहिये। व्यवस्था को भी चाहिए कि ऐसे लोगों की पड़ताल कर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे ताकि कोई अफवाह या भ्रम का महौल उत्पन्न करने का दुःसाहस न कर सके।

सबसे बड़ी बात कि भड़ास के संचालक-संपादक यशवंत सिंह एक सुलझे हुए धारदार पत्रकार माने जाते हैं। हाल के दिनों में उनकी चर्चित साइट की सूचनाओं में वो दम नहीं दिखता है, जैसा कि पहले दिखता था। गली-मोहल्लों में चल रही न्यूज चैनलों जैसी उत्तेजक और मनगढ़ंत खबरों की बहुलता दिख रही है। यशवंत जी को सलाह देने की हिमाकत तो नहीं कर सकते लेकिन गुजारिश जरुर कर सकते हैं कि वे भ्रम फैलाने वाले सूचकों से परहेज करें।  … मुकेश भारतीय

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