समाचार प्लस चैनल के Ceo_Cheif Editor ने प्रेस कांफ्रेस कर सत्ता को दी यूं खुली चुनौती

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“जिस अमृतेश सिंह चौहान द्वारा लिखाए मुकदमें के चलते उमेश कुमार को रांची जेल जाना पड़ा, उनसे और सीएम रावत से जुड़ी एक आडियो रिकार्डिंग को उमेश ने प्रेस कांफ्रेंस में पेश किया। वह अमृतेश किसान मोर्चा झारखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं….”

राजनामा.कॉम। समाचार प्लस चैनल के सीईओ और एडिटर इन चीफ उमेश कुमार जब देहरादून और रांची के जेलों से मुक्त होकर बाहर आए तो दबी जुबान ये कहा जाने लगा कि वे अब सत्ता से टकराने की हिम्मत नहीं दिखाएंगे।

पर कल दिल्ली के रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब आफ इंडिया में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से जुड़े कई स्टिंग का सार्वजनिक प्रदर्शन कर उन्होंने विश्लेषकों के इस आकलन को गलत सिद्ध किया।

उमेश कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में स्टिंग का सार्वजनिक प्रदर्शन कर एक तीर से कई निशाने साधे। रांची से लेकर देहरादून तक के अपने विरोधियों को निपटाया जिनके कारण उन्हें जेल जाना पड़ा। साथ ही ये चैलेंज दे दिया कि सत्ता में अगर ताकत हो तो वह उनसे दोबारा भिड़ कर दिखाए।

उमेश कुमार द्वारा दिखाए गए स्टिंग में सीएम त्रिवेंद्र रावत के भाई बंधु उत्तराखंड में काम-धंधा दिलाने-कराने के वास्ते सीएम के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही एक स्टिंग के जरिए बताया गया कि किस तरह सीएम और उनके परिजनों के एकाउंट में अवैध तरीके से पैसे आए। पूरे प्रकरण को समझने के लिए चीजों को सिलसिलेवार देखना होगा, जो यूं है…।

सीएम त्रिवेंद्र रावत पर आरोपों की झड़ी के साथ सामने आए उमेश कुमार ने जो स्टिंग बम फोड़ा है, उसकी गूंज दूर तक और देर तक सुनाई देगी। उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार द्वारा जेल में डाले गए पत्रकार उमेश कुमार कल मीडिया के सामने आए और दिल्ली के प्रेस क्लब में पत्रकारों के सामने त्रिवेंद्र रावत सरकार पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए कुछ स्टिंग भी दिखाए।

उमेश का कहना है कि जिस स्टिंग की आशंका में उनकी गिरफ्तारी हुई, वो स्टिंग दरअसल हो चुकी थी। उस स्टिंग को उमेश कुमार ने मीडिया को दिखाया। स्टिंग में त्रिवेंद्र रावत के भाई वीरेंद्र रावत और उनके भतीजे दिखाए गये हैं। इस स्टिंग में दावा किया गया है कि उत्तराखंड में खनन और शिक्षा व्यवस्था में माफियाराज चल रहा है।

उमेश कुमार ने दावा किया है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी इस स्टिंग के बारे में पता था, इसीलिए उनके घर पर कई बार सर्च की कोशिश की गई। इसके लिए कोर्ट ने कई बार सर्च वारंट लेने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने ऐसा गैर-कानूनी वारंट देने से मना कर दिया। उसके बाद आईओ बनाम सरकार का केस बनाकर कोर्ट को गुमराह करते हुए वारंट लिया गया और घर पर सर्च किया गया।

उमेश कुमार ने आरोप लगाया- ”इनकी मंशा थी कि मेरे घर से सबकुछ ले लें, जितना इन्हें लगता था कि प्रूफ हो सकता है और फिर मुझे जेल में सड़ाएं, लेकिन इन्हें पता नहीं है कि मैं हमेशा लड़ता रहा हूं और लड़ता रहूंगा।”

दावा है कि वे झारखंड में गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए झारखंड भाजपा के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी व उत्तराखण्ड के मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव से पूर्व उनके साढू व उनके परिजनों के तेरह बैंक खातों में 25 लाख रुपए जमा कराए।

जिस दौरान ये 25 लाख रुपए जमा कराए गए उसी समय देश के प्रधानमत्री ने नोटबंदी की कार्यवाही की और 500, 1000 के पुराने नोट बंद कर दिए। एक खाते में दो लाख से ज्यादा की रकम जमा नहीं हो सकती थी।

दूसरी तरफ़ अमृतेश चौहान द्वारा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के दिए गए खातों में 25 लाख रुपए, वो भी पुरानी करेंसी में जमा कराए। एक तरफ तो देश के प्रधानमंत्री काले धन पर लगाम कसने के लिए नोट बंदी कर रहे हैं, वहीं भाजपा के तत्कालीन झारखंड प्रदेश प्रभारी अपने खातों में 25 लाख जैसी मोटी घूस की रकम मंगवा रहे हैं। उमेश ने सवाल पूछा कि यह भ्रष्टाचार नहीं तो और क्या है?

किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अमृतेश सिंह चौहान ने गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए उत्तराखण्ड सरकार के मौजूदा मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के मोबाइल नंबर पर बातचीत की।

उन्हें यह भी बताया कि उन्होंने अब तक 25 लाख रुपए सभी उन्हीं खातों में जमा करा दिए हैं, जिनके खाता नंबर उसे दिए गए थे और जिन खातों में पैसा जमा कराया गया उसकी रसीद भी झारखंड के तत्कालीन भाजपा प्रदेश प्रभारी त्रिवेन्द्र सिंह रावत के नंबर पर व्हाटसएप के माध्यम से भेजी थी।

इसी बीच उत्तराखण्ड में भाजपा की सरकार आने के बाद त्रिवेन्द्र सिंह रावत को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। अमृतेश चौहान को जब गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष नहीं बनाया गया तो उसने त्रिवेन्द्र सिंह रावत से संपर्क साधा लेकिन जब उसे कोई जवाब नहीं मिला तो अमृतेश ने कुछ पत्रकारों से संपर्क साधा और बताया कि उसने मुख्यमंत्री को 25 लाख दिए लेकिन उन्होंने न तो उसे गौ सेवा का अध्यक्ष बनाया और न ही अब वह उसके पैसे लौटा रहे हैं।

उमेश कुमार का कहना है कि अमृतेश ने जिन लोगों से संपर्क साधा था, उन्हें मुख्यमंत्री से व्हाटसएप पर हुई बातचीत व खातों में जमा कराए गैसे पैसे की रसीदें उपलब्ध कराईं। इतना ही नहीं, एक पत्रकार से तो उसने फोन पर अपनी व त्रिवेन्द्र सिंह रावत की कहानी के बारे में पूरी भड़ास निकाली कि कैसे उससे पैसे लिए गए और अब जबकि उसका काम नहीं हुआ तो वह उसके पैसे नहीं लौटा रहे हैं।

इसी बीच इस बात की गूंज जब सरकार के कुछ करीबियों के कानों में पड़ी तो अमृतेश चौहान को दिल्ली में बुलाकर पैसा दिया गया और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के कहने पर अमृतेश चौहान ने रांची में समाचार प्लस के सीईओ उमेश कुमार के खिलाफ फर्जी राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया।  उसके बाद से अमृतेश चौहान लगातार सीएम आवास में दस्तक दे रहा है और वहां की फोटो भी वह अपने फेसबुक पर अपलोड कर रहा है।

यह इस बात का प्रमाण है कि अमृतेश चौहान उत्तराखण्ड सरकार के मुख्यमंत्री का टूल बनकर आगे आया और उसने एक साजिश के तहत उमेश कुमार पर फर्जी राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया।

त्रिवेंद्र रावत बनाम उमेश कुमार प्रकरण में इन स्टिंग को सार्वजनिक किए जाने के बाद फिलहाल पलड़ा उमेश कुमार का भारी हो गया है। इन स्टिंग के जरिए उमेश ने अमृतेश सिंह चौहान और त्रिवेंद्र रावत दोनों को निपटा दिया, जो जेल भेजे जाने के कारण बने थे।

ये स्टिंग करप्शन को लेकर जीरो टालरेंस पालिसी अपनाने का दावा करने वाले एक मुख्यमंत्री के दामन में गहरे दाग हैं। सीएम त्रिवेंद्र रावत को अब खुद सामने आकर अपने उपर लगे आरोपों का जवाब देना चाहिए वरना लोग मानेंगे कि वे करप्शन ढंकने के मकसद से उमेश कुमार को जेल भेजे थे।

साथ ही ये भी माना जाएगा कि सीएम त्रिवेंद्र रावत ने अपने एक साथी से पच्चीस लाख रुपये इसलिए लिए थे, क्योंकि वह उसे एक बड़ा पद दिलाने वाले थे।

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