समझिये भ्रष्टाचार के खिलाफ केदार नाथ का संघर्ष !

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व्यवस्था में फैले भ्रस्टाचार से आमजन किस कदर त्रस्त इसे देखना है समझना है तो राजभवन के सामने अनशन पर बैठे बोकारो के इस केदार नाथ को देखिये और समझिए।

kedar2008 में ग्राम शिक्षा समिति से गोमियो प्रखंड में पारा शिक्षक में नियुक्ति हुई लेकिन जब केदार का नाम प्रखंड में आया तो केदार से 50 हज़ार रुपये घुस माँगा गया. जब उसने देने से मना कर दिया तो उसकी नियुक्ति रोक दी गयी.

यही से शुरू होता है केदारनाथ का संघर्ष। केदार मामले को लेकर लोकायुक्त पहुंचा। जाँच हुई जिसमे केदार सही पाया गया. फिर भी केदार की नहीं सुनी गयी. फिर केदार ने आंदोलन शुरू किया।

6 साल के आंदोलन में केदार को फर्जी केस में सरकारी कर्मियों ने फसाया और जेल भी भेजा लेकिन जब केदार जेल से निकला तो देश के राष्ट्रपति से मिला। राष्ट्रपति ने भी केदार को सही ढहराया और सरकार को कारवाही करने को कहा।

इसी वर्ष जनवरी में जब केदार इस राजभवन के सामने अनशन पर बैठा था तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिखित आश्वासन दिया था कि जल्द नियुक्ति होगी लेकिन आजतक कुछ नहीं हो पाया इसलिए केदार एक बार फिर अपनी मांग को लेकर अनशन करने को मजबूर है.

आप समझ सकते हैं जिस झारखण्ड में BDO और DSP तक के पद हाथो हाथ बिक जाते हों उसी झारखण्ड एक अदद 4 हज़ार की नौकरी के लिए एक शख्स को 6 सालों तक व्यवस्था से लड़ना पड़ता है.

दरअसल केदार एक बानगी भर है यह बताने के लिए की कैसे झारखण्ड में लोगों को मजबूर किया जाता है व्यवस्था के खिलाफ खड़े होने के लिए और हथियार उठाने के लिए.

….रांची से पत्रकार सन्नी शरद अपने फेसबुक वाल पर।

 

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