सदस्यता के नाम पर लाखों वसूल रहा इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन

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पटना। बिहार में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसियन ने पत्रकारों को सब्जबाग दिखा कर सदस्यता के नाम पर लाखों रुपया कमाने का एक जरिया बना लिया है और सैकडों पत्रकारों से सदस्यता के नाम पर लाखों रूपये की उगाही कर लेने का सनसनी खेज मामला प्रकाश में आया है। इसके पत्रकारों में आक्रोश दिखना शुरू हो गया है।

मालूम हो कि इंडियन जर्नलिस्ट एसोसियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैसी बिहार में कागजी खानापूर्ति कर जोर शोर से सदस्यता अभियान चला रखी है।सदस्यता के नाम पर पत्रकारों से प्रति पत्रकार दो सौ रूपये की उगाही कर रहे हैं। बिहार में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसियन की प्रदेश कमिटि तक गठित नहीं है।

बिहार में यह संग़ठन सिर्फ कागज पर चलती है। पत्रकारों को मोबाईल से बातचीत कर पत्रकार संग़ठन के व्हाट्स एप ग्रुप में पहले जोड़ा जाता है उसके बाद सक्रिय कर सदस्यता के नाम पर पत्रकारों से दो सौ रूपये की वसूली की जाती है। इसका खुलासा दबी जुबान से पहले, अब मुखर रूप से कई पत्रकार कर रहें है।

बिहार संग़ठन में कितने पदाधिकारी हैं ये किसी को भी पता नहीं है और ना ही इसकी कोई सूची प्रदेश कार्यालय में उपलब्ध है। यहाँ तक कि कितने जिले में संग़ठन है, कितने सदस्य है इसकी जानकारी ना तो प्रदेश कमिटि को है और ना ही इसकी सूची उपलब्ध है।कुल मिला कर संग़ठन कागज पर संचालित है। संग़ठन का निबंधन कब और कहाँ से है इसकी जानकारी भी किसी को नहीं है।

बताया जाता है कि बिहार प्रदेश कमिटि में अध्यक्ष के रूप में रामनाथ विद्रोही, उपाध्यक्ष रंजीत सम्राट, प्रदेश मुख्य सचिव दयानंद भारती, सचिव राकेश गुप्ता, संयुक्त सचिव संजय कुमार सुमन ही मुख्य रूप से हैं। जबकि प्रदेश कमिटि में वर्षो से शेष पद सृजित हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि प्रदेश मुख्यसचिव दयानंद भारती महीनों पूर्व अपना इस्तीफा दे दिया है। कुल मिलाकर संग़ठन पर राष्ट्रीय अध्यक्ष कुरैसी का एकाधिकार है। संग़ठन में पर कतरने की पूरी जिम्मेवारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास है। प्रदेश कमिटि को किसी तरह की ना तो कोई निर्णय लेने का अधिकार है और ना ही कोई निर्णय देने का।

लोग व्हाट्स एप पर जुड़ते हैं और ज्यादा सक्रिय होने पर और न्यायसंगत बात करने पर उसे पद समेत गलत आरोप लगाकर संग़ठन से उसे बाहर कर देने का शक्ल बन गया है राष्ट्रीय अध्यक्ष का।

जिसका खामियाजा प्रदेश सचिव राकेश कुमार गुप्ता,संयुक्त सचिव संजय कुमार सुमन, अबोध ठाकुर, संजीव गुप्ता और नालन्दा जिला अध्यक्ष कुमुद रंजन सिंह को भुगतना पड़ा।

श्री गुप्ता और श्री सुमन अपनी बदौलत बिहार के कई जिलों में संग़ठन को तैयार किया और संग़ठन को बिहार में मजबूत किया। इन्हीं दोनों की बदौलत बिहार में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसियन मजबूत और सशक्त हुई।

प्रदेश कमिटि को विस्तार और मजबूती को लेकर संग़ठन में में जब अपनी आवाज बुलन्द की तो तीनों सक्रिय लोगों को इंडियन जर्नलिस्ट एसोसियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुरैसी ने प्रदेश अध्यक्ष रामनाथ विद्रोही और मुख्य महासचिव दयानंद भारती की अनुशंसा पर कमिटि से बाहर कर दिया गया। अब सवाल उठता है कि प्रदेश कमिटि कहाँ है।

मालूम हो कि बिहार में पत्रकारों पर हो रहे हमले को लेकर पटना के गर्दनी बाग में आयोजित धरना प्रदर्शन के आयोजन में प्रदेश सचिव राकेश कुमार गुप्ता, संयुक्त सचिव संजय कुमार सुमन की महती भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। जबकि इस कार्यक्रम से  प्रदेश मुख्य सचिव दयानंद भारती ने अपने आपको अलग रखा।

अब सवाल यह है कि उनपर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वे संग़ठन में पिछले छह माह से किसी तरह की कोई योगदान भी नहीं दे रहें हैं।संग़ठन के सक्रिय लोगों को हटाने के पीछे की जब सच्चाई का पता लगाया गया तो विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि संग़ठन के सक्रिय लोगों को इसलिए बाहर किया जाता है कि संग़ठन में राष्ट्रीय अध्यक्ष की मनमानी चलती रहे और कागज पर संचालित संग़ठन में सदस्यता के नाम पर रुपयों का खेल होता रहा रहे।जो लोग इसका विरोध करेंगे वह बाहर हो जायेगे

उधर, मुख्य महासचिव दयानंद भारती से प्रदेश सचिव राकेश कुमार गुप्ता, संयुक्त सचिव संजय कुमार सुमन, अभय ठाकुर, संजीव गुप्ता और नालन्दा अध्यक्ष कुमुद रंजन सिंह के हटाये जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हटाये गए सभी लोग संग़ठन को मजबूती प्रदान करने में अपनी अहम भूमिका दे रहे थे।

सभी को संग़ठन से हटाये जाने पर कोई राय मशविरा नहीं की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बगैर प्रदेश कमिटि की राय लिए बिना ही अपनी मर्जी से हटाया है।  तीन माह पूर्व ही अपना इस्तीफा राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेज दिया है।

इण्डियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के  पूर्व प्रदेश सचिव मनीष कुमार ने अपनी आप बीती बताते हुए कहा कि इण्डियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन में रामनाथ विद्रोही जी के कहने पर जुड़ा और राष्ट्रीय अध्यक्ष कुरैशी और दयानंद भारती जी के द्वारा बिहार में अपने आप को स्थापित करने के लिए एक समारोह या सम्मेलन की बात की। उन्हें अच्छा लगा कि रामनाथ विद्रोही एक सशक्त व्यक्तित्व के हैं और अपने जीवन के 70 के आस पास उम्र में  समाज और राष्ट्र हितों में चिंतन करते हैं।

तीनों से बात करने के बाद कुरैशी जी के कहने पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की बात होने लगी। 5 अप्रैल 2017 को कार्यक्रम तय हुआ और कुरैशी ने स्मारिका और होटल एवं बुनियादी सुविधाओं की बात कहीं। मैं अपने माध्यम से तैयारी की और सहयोग के लिए कुरैशी जी ने कहा। 1000 पत्रकार की तैयारी की बात कहीं गई, लेकिन आये पत्रकारों की संख्या 383 थी। भारत के बाहर से भी बहुत अच्छे संख्या में पत्रकार भाई शामिल हुए।

लगभग 1 लाख 20 हजार रूपये खर्च कर कार्यक्रम करने के बाद भी महीने ही दिनों बाद मुझे बिना बताए निकाल दिया कुरैशी जी ने। तब मैंने संस्थान के बायोलॉज माँगा तो मुझे पद विमुक्त कर दिया। लगातार अपनी मनमानी चलाते रहने वाले कुरैशी जी ने पत्रकार सम्मेलन में भी सदस्यता अभियान चलाया और 200/- के हिसाब से 310 (62000) लोगों को सदस्य बनाया और पैसा लेकर भाग गया। मैंने सहयोग पर बात की तो सब लोग थोड़ा रूकिये करके आज तक टलता रहा हैं।

वहीं जुलाई में पटना धरना के लिए सभी प्रकार की स्वीकृति लिया और राकेश गुप्ता जी का धरना के दिन बहुत अच्छा खर्च व भारें में खर्च करवाया।जब प्रोमोशन की बात या संस्थान के स्वरूप की बात कोई करें तो उसे तुरंत बाहर निकाल फेंका जाता हैं।

मैंने राष्ट्रीय अध्यक्ष को सूचित भी किया हूँ पैसा और मान सम्मान से खेलने का जो काम आपने किया है वह अच्छा नहीं हैं। मैं कानूनी प्रक्रिया में आऊंगा और आप पर कार्यवाई करूँगा। तो फोन कर जबाव दिया मनीष बाबु इस देश में मुश्लमानों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होती। रामनाथ विद्रोही जी के साथ षडयंत्र के तहत मुझे फसाया गया। आज विद्रोही जी एक मूकदर्शकों की भांति लाईन में खड़े हैं और हमारा तमासा बना दिया। समय रहते विद्रोही जी कार्यवाई करें और राष्ट्रीय अध्यक्ष को बिहार बुलाकर माँफी के साथ मेरा और राकेश गुप्ता का पैसा वापस करावें।

बिहार न्यूज़ लाइव के प्रधान संपादक राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि आईजेए में मुझे लाने वाले प्रदेश संयुक्त सचिव संजय कुमार सुमन थे। आईजेए में आने के बाद हमने संग़ठन को मजबूती प्रदान करने का काम किया। पटना में आयोजित धरना को सफल बनाने को लेकर हमने तन-मन-धन तीनों लगाया और प्रदेश अध्यक्ष ने 21 जुलाई पटना में आयोजित धरना का बिना कोई तैयारी की घोषणा हुई, जिसके फलस्वरूप संग़ठन की इज़्जत बचने हेतु मै और पीड़ित पत्रकार संजीव गुप्ता और संजय कुमार सुमन के साथ महाधरना का आयोजन किया जिसमे मेरे सिर्फ पचास हजार का खर्च आया सभी ने कार्यो को सहारना की।

सभी ने कहा की आपका प्रमोशन होगा ,परन्तु जब संग़ठन की मजबूती के लिए जब राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैसी से निबन्धन की नियमावली, प्रदेश कमिटि, जिला कमिटि के पदाधिकारियों की सूची मांगी तो दोनों अध्यक्ष ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए संग़ठन से बाहर कर दिया। दोनों अध्यक्ष चोर चोर मौसेरे भाई की तरह हैं। आईजेए में पत्रकार बंधू को व्हाट्स एप पर जोड़ा जाता है। सदस्यता के नाम पर दो सौ की।  वसूली की जाती और नियमावली की मांग करने पर संग़ठन से बाहर कर दिया जाता है।

साथ ही इसी प्रकार मुंगेर जिला के अध्यक्ष अबोध ठाकुर और नालंदा जिला के कुमुद सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैसी से निबन्धन की नियमावली, की सूची मांगी तो दोनों अध्यक्ष ने अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए संग़ठन से बाहर कर दिया। (साभारः बिहार न्यूज लाइव पर आर के गुप्ता)  

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