संदर्भ झारखंडः एक राजा था…

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हां जी, एक राजा था। वो बहुत सनकी था। उसके राजदरबार में कनफूंकवों की संख्या ज्यादा थी। राजा कनफूंकवों की मदद से राज संचालन किया करता था। राजा को लगता था कि उसके राज्य में सर्वाधिक बुद्धिमान और सारे शास्त्रों के ज्ञाता कनफूंकवे ही है। इसलिए राजा कनफूंकवों की बातों को कभी नजरंदाज नहीं करता था। कनफूंकवें भी जानते थे कि राजा को आत्मप्रशंसा के अलावा, उसे राज्य और राज्य की जनता की कोई फिक्र नहीं, इसलिए वे बेमतलब की बातों को ही लेकर राजा के पास जाते और उसकी तारीफ में कुछ सुना दिया करते, जिससे राजा प्रसन्न हो जाता और कनफूंकवों की उसकी काबिलियत की खुब प्रशंसा करता।

वरिष्ठ लेखक-पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र अपने फेसबुक वाल पर……

एक दिन उसी राजा के राज में एक ठग आया। उसने जब राजदरबार की हकीकत देखी, तो उसे समझ में आ गया कि यहां का राजा सनकी और महामूर्ख है, यहां कनफूंकवे राज चला रहे है। ऐसे में उसकी दाल यहां आसानी से गल जायेगी, साथ ही वह खूब धन इकट्ठे करके वह अपने नगर को भी जा सकता है। उसने सर्वप्रथम पूरे राज में यह अफवाह फैलायी कि उसके पास ऐसा पतला कपड़ा है कि जिसे पहननेवाले को पता ही नहीं चलेगा कि उसने कुछ पहन रखा है, ये कपड़ा ऐसा है कि जो इसे पहनता है, उसकी शारीरिक सौंदर्य और बढ़ जाती है। बुढ़ा जवान और आकर्षक हो जाता है।

वह ऐसा दिव्य कपड़ा यहां के राजा को भेंट करना चाहता है। जब राजा के कनफूंकवों की इस बात की जानकारी मिली तो वे लोग उस ठग के पास पहुंचे। कनफूंकवों ने ठग से कहा कि वे लोग, उसे राजा के पास ले जा सकते है, पर इसके बदले में कनफूंकवों को वह क्या देगा? ठग ने कहा कि राजा इस दिव्य कपड़े के बदले में जो भी राशि देगा, उसका दस प्रतिशत वह कनफूंकवों को दे देगा।

फिर क्या था… कनफूंकवों ने राजा से ठग को मिलवाने की हामी भर दी। जल्दी ही कनफूंकवों ने राजा को बताया कि यहां इस राज्य में एक ऐसा आदमी है, जो एक दिव्य कपड़ा लाया है, जिसे पहनने से पता ही नहीं लगता कि कोई कपड़ा पहना है और उस कपड़े को पहनने से व्यक्ति और सुंदर दिखता है। राजा ने कनफूंकवों से उस व्यक्ति को बुलाने का संदेश भिजवाया। ठग जल्द ही राजा के पास पहुंचा। राजा को वह पतली पारदर्शी प्लास्टिक की बनी कपडों को भेंट किया।

साथ ही यह भी कहा कि इसकी सबसे बड़ी दुर्गुण यह है कि जो भी व्यक्ति इस कपड़े की आलोचना करता है या पहननेवाले की आलोचना करता है, या शिकायत करता है या हंसी उड़ाता है, वह पलक झपकते ही अंधा हो जाता है। राजा ने और कनफूंकवों ने जनहित में यह ढिंढोरा पिटवा दिया कि राजा जब ये विशेष कपड़े पहनकर निकले तो कोई भी ऐसा काम न करें, नहीं तो उसे अँधा होने का खतरा है।

इधर ढिंढोरा पीटवाने के बाद, राजा जब प्लास्टिक के बने पारदर्शी कपड़े पहनकर नगर परिभ्रमण को निकला तो सभी यह देखकर आश्चर्यचकित हो गये, राजा जो कपड़े पहना था, उससे राजा नंगा दिख रहा था, पर कनफूंकवें और राज्य की जनता अंधे होने के भय से राजा के खिलाफ कुछ बोल नहीं रहे थे। सभी राजा की वाह-वाह करने में लगे थे, तभी कहीं से कोई बच्चा, दौड़ता हुआ आया, जहां राजा था, उसने राजा को जब देखा तो कहा कि ये राजा कैसा कपड़ा पहना है, जो पूरी तरह से नंगा दीख रहा है, और वह देखते ही देखते चिल्लाने लगा – राजा नंगा है, राजा नंगा है….

बच्चे को इस तरह चिल्लाते और बच्चे पर कोई अँधापन का असर नहीं देख, राजा को समझते ये देर नहीं लगी कि उनके दरबारियों-कनफूकवों और उस व्यक्ति ने जिसने कपड़े दिये, राजा को उल्लू बनाया। राजा तुरंत राजमहल गया, और उन कनफूंकवों को एक महीने तक पूरे नगर में नंगे होकर परिभ्रमण करने की सजा सुनाई। यह कहानी मैंने बचपन में सुनी थी। आज प्रत्यक्ष रूप से देख रहा हूं, अनुभव कर रहा हूं, ठीक उस राजा की तरह, झारखण्ड का भी हाल है। कनफूंकवों ने पूरे राज्य को हंसी का पात्र बना दिया है, स्थिति ऐसी है कि जनता त्रस्त है पर अधिकारी और कनफूंकवे मस्त है।

सब को लगता है कि झारखण्ड मस्ती में डूबा राज्य है, पर सच्चाई से सब वाकिफ है, फिर भी कोई सच को स्वीकार करने को तैयार नहीं है, क्या हम समझे कि कोई बच्चे की आवाज यहां के राजा तक पहुंचेगी और यहां का राजा सच को स्वीकार करेगा और उन्हें दंडित करेगा, जो राज्य को दुख के सागर में ढकेलने के जिम्मेवार है।

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