संजीत के ऐसी ‘संदिग्ध मौत’ के बाद बाइलाइन छापने वाला दैनिक प्रभात खबर ने नहीं माना पत्रकार

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वेशक इससे ज्यादा शर्मनाक क्या होगा कि एक पत्रकार जिस अख़बार के लिए मर गया, वही अखबार अब उसे अपना पत्रकार नहीं मानता। इस मुद्दे पर सरकारी दलाली खाने वाले न कोई पत्रकार क्लब बोलेगा और न ही कोई संगठन-ऐसोसिएशन।?”

खबर है कि भोजपुर आरा में प्रभात खबर के ब्यूरो ऑफिस में काम करने वाले पत्रकार संजीत उपाध्याय की संदिग्ध मौत हो गई है।

शनिवार की सुबह प्रभात खबर के रिपोर्टर संजीत उपाध्याय का शव बिहियां स्टेशन के करीब रामानंद  हाल्ट के पास क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। पहली जानकारी ये दी गई कि संजीत की मौत तब हुई जब वे शुक्रवार की रात को आरा से काम खत्म कर अपने घर बक्सर लौट रहे थे, और रेल से गिर गए।

मगर यह घटना का आधा सच है। क्योंकि संजीत‌ की मौत जिन परिस्थितियों में हुई है और प्रथम दृष्टया पुलिस ने जो बयान दिया है, उससे शक गहराता जा रहा है

पुलिस कहती है कि संजीत‌ बक्सर जाते समय रेल से गिरकर दुर्घटना के शिकार हो गए।  लेकिन, यदि संजीत की मौत‌ रेल से गिरकर बक्सर जाने के क्रम में हुई है तो उनका शव उल्टी दिशा में जाने वाली‌ पटरी यानी डाउन लाइन‌ पर क्यों मिला?  बक्सर के लिए ट्रेन तो अप लाइन से‌ जाती है।

हालांकि, संजीत के साथियों के सवालों और संदेहों के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। मामले की जांच शुरु हो गई है।

संजीत की मौत कैसे हुई!  इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। स्थानीय पत्रकार अपने साथी की मौत के पीछे एक साजिश बता रहे हैं।

इन सबके बीच पूरे मामले में सबसे गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक रवैया उस अखबार प्रबंधन का है जिसके साथ जुड़ कर संजीत पत्रकारिता कर रहे थे।

वही‌ संजीत‌ जो कल तक प्रभात खबर के लिए काम‌ कर रहे थे, आज उनकी मौत‌ के बाद अखबार प्रबंधन ने उन्हें अपना मानने से भी इन्कार कर दिया है।

संजीत‌ की मौत के बाद खुद प्रभात खबर अखबार ने जो सिंगल कॉलम की खबर छापी, उसमें संजीत को “एक अखबार  का रिपोर्टर” बता दिया है। जबकि दू‌सरे अन्य अखबारों ने उन्हें प्रभात खबर का रिपोर्टर‌ लिख कर संबोधित‌ किया है।

संजीत‌ के करीबी पत्रकार मंगलेश‌ तिवारी ने संजीत‌ की मौत पर कड़ा सबाल उठाया है।  उन्होंने अपने फेसबुक पर लिखा है…..

“प्रभात खबर आरा के पत्रकार संजीत उपाध्याय देर रात काम कर लौट रहे थे। लौटने के लिए ट्रेन अपलाइन से ही आती है। लेकिन, संजीत की बॉडी डाउनलाइन पर मिली। साथ ही बॉडी में कोई कटने के निशान भी नहीं है। वे इतने सरल व शांत स्वभाव के थे कि गेट पर यात्रा तो नहीं कर सकते। स्थानीय साथी बता रहे हैं कि उन्होंने अपने गांव के एक लड़के के साथ घर जाने की बात बताई थी। लेकिन, वह किसके साथ थे? कौन लड़का था? उसने इसकी सूचना गांव में क्यों नहीं दी?  यह सब सवाल हैं। यह भी सत्य है कि वे अगर उतरते भी तो टुड़ीगंज स्टेशन पर उतरते। लेकिन, बॉडी तो बिहियां के पास रामानंद तिवारी हाल्ट के समीप बरामद हुई है। ऐसे में शक गहराता जा रहा है।

यह मौत नहीं हत्या का मामला हो सकता है। इसकी उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए। प्रभात खबर प्रबंधन को भी इस घटना को लेकर संजीदगी दिखाने की जरूरत है।”

संजीत‌ के एक अन्य नितिन कुमार राय ने लिखा है कि,

“बक्सर जिला निवासी आरा प्रभात खबर में कार्यरत तेज तर्रार पत्रकार संजीत उपाध्याय की संदिग्ध परिस्थितियों मे मौत हुई।  सरकार इसकी सीबीआई जांच कराए और मृतक की पत्नी को भरण-पोषण के लिए नौकरी के साथ-साथ पच्चास लाख का मुआवजा भी दे।”

“संजीत जी कि मौत बक्सर जिला के प्रभात खबर के पूर्व जिला ब्यूरो विवेक सिन्हा की मौत की याद तरोताजा कर रही है, जिनका भी रात मे सड़क दुर्घटना मे मौत हुई थी, पर बाद में जांच के दौरान उनके सिर पर राॅड का वार होने का प्रमाण मिला था। यहां भी परिस्थितियां यह सोचने पर मजबूर कर रही कि संजीत जी की मौत हादसा नहीं साजिश है जो निष्पक्ष जांच में ही सामने आयेगा।” 

संजीत कुमार उसी प्रभात खबर के‌ साथ जुड़े थे, जिसने उन्हें अपना बनाने से भी इन्कार कर दिया है। कहते हैं कि रेलवे की रिपोर्टिंग में संजीत का कोई शानी नहीं था। प्रभात‌ खबर अखबार उनकी रिपोर्ट को खास‌ खबर बनाकर छापता था। इस बात के पुख्ता प्रमाण इन तस्वीरों में हैं।

यह एक गंभीर अपराध है कि अखबार अपने रिपोर्टर को तब अपना मानने से भी इन्कार कर देता है, जब उनके साथ कोई अनहोनी हो‌ जाती है। अखबार के लिए खास खबरें लिखने वाले संजीत की मौत की खबर उन्हीं के अखबार में यूं छपेगी,  उन्होंने कभी सोचा भी नहीं होगा।

ऐसे कई उदाहरण हैं कि जब अखबार और मीडिया कंपनियों का प्रबंधन अपने रिपोर्टर को संकट की हालत में छोड़ कर खुद को अलग कर लेता है। जिला, अनुमंडल, प्रखंड, थाना आदि स्तर के पत्रकारों के साथ यह आम बात हो गई है। और इस अमानवता के खिलाफ संघठनों, क्लबों, एशोसिएशनों की रहस्यमय चुपी भी कम शर्मनाक नहीं है।

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