शहरी 4,400 रु. तो ग्रामीण 2,900 रु. देते हैं हर साल रिश्वत!

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राजनामा.कॉम।  शहर हो या गांव हर जगह काम करवाने के लिए लोगों को रिश्वत देना पड़ता है। तमाम सरकारी कोशिशों के बावजूद भारत में रिश्वतखोरी की समस्या पर अब तक लगाम नहीं लगाया जा सका हैं।

cruptionलेकिन ऐसा नहीं है कि ये बातें सरकार के नजर से बची हुई हैं। सरकार जानती है कि शहर में हर परिवार कितनी रकम रिश्वत के तौर पर देता हैं।

सरकार सर्वे से मिले आंकड़ों के मुताबिक देश में हर शहरी परिवार को साल में करीब 4,400 रूपये की घूस देनी पड़ती है।

ग्रामीण इलाकों में एक परिवार को साल में करीब 2,900 रूपये की रिश्वत देनी पड़ती है।

ये आंकड़े केंद्र सरकार की ओर से अघोषित संपत्ति का आकलन करने के लिए बनाए गए आयोग के अध्ययन से मिले हैं।

नैशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च के सर्वे मे इस बात का खुलासा हुआ कि शहरों के लोग सामान्य कामों जैसे की बच्चे का एडमिशन कराने, या फिर पुलिस से संबंधित काम निपटाने के लिए सबसे अधिक घूस देते हैं।

सितंबर से दिसंबर 2012 के बीच हुए सर्वे के मुताबिक शहरों में लोगों को हर साल करीब 18 हजार रूपये नौकरी पाने और ट्रांसफर कराने के लिए खर्च करने पड़ते हैं।

इस रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण इलाकों में मनरेगा, पीडीएस, इंदिरा आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों और छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ उठाने के लिए लोगों को रिश्वत देनी पड़ती है।

अत्यंत गंभीर पहलु यह है कि ग्रामीण इलाकों में किसान-मजदूर वर्ग की करीब 13 फीसदी कमाई घूस देने में ही चली जाती है।

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