शर्मसार भारतः स्त्री देह की ऊर्जा से पूंजीवाद को बढ़ावा देगी तेजस

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राजनामा.कॉम। ट्रेन चलेगी। पटरी जनता की है। स्टेशन जनता का। सिंगनल और संचालन व्यवस्था जनता की। ट्रेन का निर्माण भी जनता ने किया। यात्रा जनता करेगी…..

मगर मुनाफ़ा कमायेगा पूँजीपति। ट्रेन उसकी है। उसने जनता के टैक्स और कर, शुल्क, द्वारा एकत्र धन को हथिया कर, बैंक लोन लेकर, मुनाफ़ा कमाने का अधिकार पत्र हासिल कर लिया है।

वह दो तीन गुना किराया लेगा और आपको देगा आपकी देखभाल के लिए, खूबसूरत लड़कियाँ? आखिर लड़कियाँ क्यों?

स्त्री का उपयोग मुनाफ़ा कमाने और पैसा लूटने के लिए करना इस मुनफाखोर पूँजीवाद में अनैतिकता नहीं है। क्योंकि उनके लिए स्त्री केवल देह है, जो अपनी दैहिक योग्यता से मर्द की जेब से पैसा निकाल सकती है

विज्ञापन में स्त्री का नंगा होना अनैतिकता नहीं है। कहीं भी नंगा होना अनैतिकता नहीं है। कहानी, कथा, कविता, चित्र में नंग्न होना नग्नता बेचना अनैतिकता नहीं है। क्योंकि वह साधन है पैसा कमाने का।

जब देह पैसा नहीं देगी, तब यह पूँजीवाद उसकी हत्या कर देगा। भूखों मरने के लिए छोड़ देगा। जब तक देह है, तब तक उपयोगिता है।

स्त्री को वस्तु में तब्दील कर चुका बाजार और मुनाफ़ा खोर व्यवस्था यौनिकता और यौनिक अभिव्यक्ति का बचाव करती है। यह तेजस के इस हथकण्डे से समझा जा सकता है। (स्रोतः फेसबुक)

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