वेबसाइट पर तस्वीरों के प्रकाशन के पहले जरुरी है ये तकनीकी समझ

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website pictureवेबसाइट पर किसी रिपोर्ट को प्रकाशित करने या किसी कार्यक्रम को पेश करने के लिए सही तस्वीरों का चुनाव महत्वपूर्ण है. ये यूज़र का ध्यान खींचती हैं और रिपोर्ट में प्रभाव डालती हैं. मगर तस्वीरों के इस्तेमाल के लिए संपादकीय और तकनीकी समझ के साथ-साथ कॉपीराइट जैसे क़ानूनी मामलों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

संदर्भ

वेबसाइट के लिए तस्वीर का चुनाव करते समय ये सोचना महत्वपूर्ण है कि आप उस तस्वीर का इस्तेमाल कैसे करने जा रहे हैं, यानी संदर्भ क्या है.

तस्वीर किसी समाचार के लिए है या किसी फ़ीचर के लिए? रिपोर्ट कितनी गंभीर है?

क्या रिपोर्ट हल्के मूड वाली है? यदि ऐसा है तो आप तस्वीरों के बारे में थोड़ी रियायत ले सकते हैं.

तस्वीर कहाँ दिखाई देगी? क्या वो मुख्य पृष्ठ पर लगेगी, या रिपोर्ट के भीतर? तस्वीरों का चुनाव इन दोनों बातों पर निर्भर करेगा.

जैसे यदि ये मुख्य पृष्ठ के लिए है तो इसे बड़ी सफ़ाई से काटना होगा, आपको इसके हर बिन्दु का समुचित इस्तेमाल करना चाहिए, ये सुनिश्चित करना चाहिए कि तस्वीर लिखी गई सामग्री से जुड़ी हो और पाठक का ध्यान खींचे ताकि वो आपकी रिपोर्ट पर क्लिक करे और उसे पढ़े.

पर यदि ये रिपोर्ट के भीतर है तो ये ज़रूरी है कि ये रिपोर्ट में दी गई जानकारियों को व्यक्त करे. ये सुनिश्चित करिए कि ये प्रासंगिक है – और यदि संभव हो, तो और कुछ नया बता रही हो.

इनके अलावा, ये तस्वीर किसी पिक्चर गैलरी के लिए इस्तेमाल होनी है तो वहाँ ये बड़ी और चौड़ी होगी और तस्वीरों की एक श्रृंखला का हिस्सा होगी. तो आपको ये सुनिश्चित करना होगा कि उसका संदर्भ सही हो.

मूड

संदर्भ के साथ-साथ, आपको रिपोर्ट के स्वभाव या मूड का भी ध्यान रखना होगा.

ये तब ख़ास तौर पर महत्वपूर्ण हो जाता है जब आप किसी रिपोर्ट में किसी व्यक्ति की पुरानी तस्वीर का इस्तेमाल करने जा रहे हों. आपको देखना होगा कि रिपोर्ट गंभीर है या हल्की-फ़ुल्की.आपको ये तय करना होगा कि रिपोर्ट का मूड उस तस्वीर से निकलकर आ रहा हो.

यदि रिपोर्ट गंभीर किस्म की है तो आप उसमें किसी की मुस्कुराती तस्वीर नहीं लगा सकते या यदि रिपोर्ट हल्की है तो उसमें आप उसकी गंभीर तस्वीर नहीं लगा सकते. इससे ना केवल वो बेस्वाद लगेगी बल्कि इससे पूर्णतया ग़लत संदेश जाएगा.

स्रोत

हम तस्वीरें कई स्रोतों से लिया करते हैं और ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि आपको उस तस्वीर पर भरोसा है ताकि जब आप उसे प्रकाशित करें तो आपको पता हो कि ये सही है, और आप ऐसी कोई सामग्री प्रकाशित नहीं कर रहे जिसकी सत्यता पर सवाल उठाए जा सकें.

हमारी कई तस्वीरें हमारे अपने कर्मचारी भेजते हैं. पर अधिकतर तस्वीरें कई एजेंसियों से आती हैं जिन्हें बीबीसी ने सब्सक्राइब किया हुआ है, जैसे एसोसिएटेड प्रेस या रॉयटर्स. हमने उनके साथ क़रार किया हुआ है और हम उन्हें विश्वसनीय स्रोत मानते हैं.

हम फ्रीलांसरों से भी तस्वीरें लेते हैं जिनके साथ हमारा लंबे समय से संबंध रहता है और हम जिनके काम को जानते हैं – और हमें पता होता है कि वो हमारे लिए जो काम करते हैं उसमें ईमानदारी और सच्चाई से करते हैं.

कई बार तस्वीरें आम लोग भी भेजते हैं, और ये एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें परख करने की ज़रूरत और ज़्यादा हो जाती है. इसके लिए आप तस्वीर भेजनेवाले व्यक्ति से संपर्क करते हैं और उनसे कई तरह के सवाल कर ये सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि वे सच बोल रहे हैं और ये उनकी अपनी तस्वीरें हैं – उन्होंने इन्हें कहीं और से नहीं चुराया.

कई बार कुछ लोग किसी ख़ास मक़सद या एजेंडा से तस्वीरें भेजते हैं, ऐसे में सावधानी ज़रूरी है ताकि आप केवल वही ना करने लगें जो वो आपसे करवाना चाहते हैं. आपको अन्य या दूसरे स्रोत से उनकी पुष्टि करनी चाहिए. आपको इधर-उधर से ये पता लगाना चाहिए कि आपको जो तस्वीरें भेजी जा रही हैं वो सही जगह से ही आई हैं.

जैसे यदि कोई व्यक्ति किसी बड़े आयोजन में है, तो क्या ये संभव है कि वो अकेले सारी तस्वीरें ले सका होगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि उसने कई और जगहों से तस्वीरें कॉपी कर उन्हें बस भेज दिया है?

लोग हमेशा धोखा देना चाहते हों, ऐसा भी नहीं है. कई बार ऐसे लोगों को लगता है कि वो हमें ऐसी तस्वीरें भेजकर अच्छा कर रहे हैं जिन्हें शायद हम देखना चाहते होंगे. मगर हमें इनके इस्तेमाल को लेकर बेहद सावधान रहना चाहिए.

इनके अलावा कई बार प्रेस विज्ञप्तियों के साथ भी तस्वीरें भेज दी जाती हैं. अक्सर ये तस्वीरें समाचार एजेंसियों पर भी मिल जाया करती हैं. मगर फिर भी, आपको ये सुनिश्चित करना है कि आप तस्वीरों का इस्तेमाल सही संदर्भ में कर रहे हैं और आप किसी व्यावसायिक सामग्री का विज्ञापन तो नहीं कर रहे.

कॉपीराइट

तस्वीरों का इस्तेमाल करते समय कॉपीराइट का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है और ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि हमारे पास प्रकाशित की जा रही तस्वीरों के अधिकार हैं.

एसोसिएटेड प्रेस या रॉयटर्स जैसी समाचार एजेंसियों से ली गईं तस्वीरों के इस्तेमाल में कोई समस्या नहीं क्योंकि हमारा उनके साथ क़रार है.

फ़्रीलांसरों से ली गई तस्वीरों के बारे में हमें उन्हें स्पष्ट तौर पर बता देना चाहिए कि उन तस्वीरों का इस्तेमाल कैसे होनेवाला है और ये वेबसाइट पर कब तक रहेगी. हमारी रिपोर्टें सदा के लिए मौजूद रहती हैं, तो उन्हें ये जानकारी होना ज़रूरी है और हमारे लिए भी ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि उनके साथ हुआ समझौता ऐसे इस्तेमाल को ध्यान में रखकर किया गया है. ये तस्वीरें टेलीविज़न पर भी दिख सकती हैं तो समझौता ऐसा होना चाहिए जिससे कि सभी माध्यमों के लिए उनका इस्तेमाल हो सके.

आम लोगों से तस्वीरें लेते समय उन्हें भी ये बताना ज़रूरी है कि वो हमें उनके अधिकार सौंप रहे हैं ताकि हम अपनी वेबसाइट पर उनका इस्तेमाल कर सकें. कॉपीराइट फिर भी उनके पास रहती है मगर बीबीसी के पास उनके इस्तेमाल का अधिकार होता है.

जहाँ तक अन्य स्रोतों का प्रश्न है – कई बार तस्वीरें खोजते समय हमारे सामान्य स्रोत जैसे एजेंसियाँ आदि काम नहीं आतीं और ऐसे में हम अन्य स्रोतों की ओर जाते हैं, जैसे कि कोई निजी संग्रह या किसी की व्यक्तिगत सामग्री, ऐसे में हमारी कोशिश होती है कि हम उन तस्वीरों का स्रोत स्पष्ट करें.

एक बार फिर, आपको ये स्पष्ट करना होगा कि आप क्या माँग रहे हैं और उन तस्वीरों का इस्तेमाल कैसे करेंगे? क्या उनके इस्तेमाल के साथ क्रेडिट या साभार लिखना है? इस्तेमाल कब तक करना है? और इसके लिए क्या कोई शुल्क भी देना है?

संपादकीय दिशा निर्देश

बीबीसी में कैसी तस्वीरें लगनी हैं और कैसी नहीं इसके लिए सख़्त संपादकीय दिशानिर्देश बनाए गए हैं. वेबसाइट के लिए ये विशेष तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे किसी भी उम्र का व्यक्ति, किसी भी समय देख सकता है.

आप जब मुख्य पृष्ठ पर आते हैं, तो आपको नहीं पता होता कि आप क्या देखनेवाले हैं. वहाँ एक हल्की-फ़ुल्की रिपोर्ट भी हो सकती है या कोई अति गंभीर रिपोर्ट भी. इसलिए आप क्या दिखाने जा रहे हैं इसे लेकर आपको वाकई सतर्क रहना होगा.

आप जब कोई रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं तो आपको वहाँ तस्वीर लगाने के लिए कुछ चाहिए. हम एक न्यूज़ वेबसाइट हैं, इसलिए हमें आयोजनों और घटनाओं से जुड़ी कोई तस्वीर दिखानी होगी. मगर हमें सतर्क होकर ये करना होगा. यदि कोई भी संदेह हो तो इसके लिए बीबीसी की एक संपादकीय नीति ईकाई है जो हमारी मदद कर सकता है.

आइए अब एक उदाहरण लेते हैं –

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक बम विस्फोट हुआ है. एक पिक्चर गैलरी बनानी है, जिसमें ऐसी आधी दर्जन तस्वीरों का प्रयोग करना है जो बिना वीभत्स हुए घटनाओं को व्यक्त करते हैं. आपको घटनास्थल, आस-पास का माहौल और इससे संबंधित जो कुछ हो रहा है उसे दिखाना है.

आप देखते हैं कि लोग ऐसे किसी व्यक्ति को बचा रहे हैं जो अब भी मलबे में जीवित हो सकता है, या फिर आप सामान्य तस्वीरें भी दिखा सकते हैं. जैसे दूर से ली गई एक तस्वीर जिसमें विस्फोट की जगह दिखती हो.

फिर ऐसे लोग जो घटनास्थल पर अपने संबंधियों को खोजने आए हों, जो बेहद परेशान लग रहे होंगे.

आपको अब एक तस्वीर दिखती है जिसमें एक शव को ले जाया जा रहा है, तो आप इस धमाके का नतीजा दिखाने के लिए, ये बताने के लिए कि इसमें जानें गई हैं, आप इस तस्वीर को दिखा सकते हैं, मगर वो वीभत्स नहीं होनी चाहिए.

इनके अतिरिक्त तस्वीरें लगाते समय निजता का ध्यान रखना ज़रूरी है. ये बहुत स्पष्ट नहीं है, मगर इसमें बीबीसी की संपादकीय नीति सहायता कर सकती है. जैसे कुछ समय पहले एक अमरीकी मरीन सैनिक की तस्वीर का उदाहरण लिया जा सकता है जो अफ़ग़ानिस्तान में घायल हुआ और फिर उसकी मौत हो गई. उसके माता-पिता ने उसकी तस्वीर दिखाने के लिए दी गई अनुमति वापस ले ली जिसका अर्थ ये है कि बीबीसी उसकी तस्वीर का इस्तेमाल नहीं कर सकती.

पर अमरीका में कुछ वेबसाइटों ने इस तस्वीर को प्रकाशित किया, उनका मानना था कि युद्ध की विभीषिका को दिखाना ज़्यादा महत्वपूर्ण है. ये कोई वीभत्स तस्वीर नहीं थी, मगर उसकी मृत्यु हो जाने से ये तस्वीर और अधिक भावुकता जगाती है.

तस्वीरों के इस्तेमाल में एक और क्षेत्र में अत्यंत सावधान रहने की आवश्यकता है, और वो है बच्चों की तस्वीरें. ब्रिटेन में बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल करने के लिए उनके अभिभावकों से अनुमति लेना ज़रूरी है.

मानहानि

तस्वीरों का इस्तेमाल करते समय क़ानूनी बातों का भी ध्यान रखना ज़रूरी है. इनमें एक महत्वपूर्ण चीज़ है मानहानि. आप एक तस्वीर से भी किसी व्यक्ति की वैसी ही मानहानि कर सकते हैं जैसे शब्दों से.

ये विशेष रूप से बिज़नेस के मामलों में महत्वपूर्ण है जहाँ आप विभिन्न कंपनियों और उनसे संबंधित व्यक्तियों का उल्लेख करते हैं. आपको ये सुनिश्चित करना होगा कि ये तस्वीरें उनके काम का सही और निष्पक्ष निरूपण कर रही हैं.

जैसे किसी आपराधिक मामले से जुड़ी तस्वीरों का इस्तेमाल करते समय ये ज़रूरी है कि आप उसी ख़ास कंपनी की तस्वीर दिखाएँ जिसपर मामला चल रहा है, अन्य किसी की नहीं. वैकल्पिक तौर पर, आप एक सामान्य तस्वीर दिखा सकते हैं जिसमें कोई भी ऐसी चीज़ ना दिखे जिसकी पहचान हो सकती हो.

ईमानदारी

सत्यता और ईमानदारी – तस्वीरों का इस्तेमाल करते समय ये बहुत महत्वपूर्ण हैं. तस्वीरों को काटकर आप उनका अर्थ या कहानी का संदर्भ नहीं बदल सकते.

परिवर्तन

हम तस्वीरों को बेहतर दिखाने के लिए उनमें सामान्य तकनीकी परिवर्तन कर सकते हैं. कुछ तस्वीरों में अन्य तस्वीरों की अपेक्षा अधिक मेहनत करनी होती है.

जैसे किसी वीडियो से कॉपी की गई तस्वीर में ब्राइटनेस और कॉन्ट्रास्ट ठीक करने के लिए अधिक प्रयत्न करना होता है. मगर ये तस्वीर यदि आपके अपने कैमरे से या एजेंसी से ली गई हो तो उनकी क्वालिटी ठीक करने में वैसा प्रयास नहीं करना होता.

कैप्शन

कैप्शन लगाना बहुत महत्वपूर्ण है. पाठक को ये बताना ज़रूरी है कि तस्वीर में कौन और क्या दिख रहा है और ये किस बारे में है. मगर एक कामचलाऊ कैप्शन पर्याप्त नहीं. आपको ये ध्यान रखना ज़रूरी है कि कैप्शन से रिपोर्ट में कुछ अतिरिक्त जुड़ रहा है और इससे पाठक का ध्यान आकृष्ट होता है.

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