गलत तस्वीर पेश कर रही है बिहार की मीडिया

Share Button

सरकार की अच्छाई और बुराई को उजागर करनेकी भूमिका निभाने वाले बिहार के हिन्दी और अंग्रेजी भाषाई आइना इन दिनों चूर-चूर हो गयाहै। मीडिया में बिहार की गलत तस्वीर पेश की जा रहीहै। बिहार की राजधानी पटना में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को खुश करने के लिए प्रथम पृष्ठ पर कुछ उत्साहवर्द्धक और जीवंत खबरें छप जरूर  रही हैं ,परन्तु बिहार के 38 जिलों में जिलाबार छपनेवाले हिन्दी अखबारों में जो खबरें इनदिनों छप रहीं हैं,वह खबरें सरकार के प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारियों के मनोबल को तोड़ने के लिए छापी जा रहीहै ।
बिहार के जिलों में वितरित होर हे जिलावार हिन्दी अखबारों के संस्करणों के कार्यालयों के प्रमुख और जिला,अनुमंडल और प्रखंड स्तर के संवाददाताओं को माहवार विज्ञापन संग्रह करनेका टारगेट सौंप दिया गया है । विज्ञापन संग्रह का काम पत्रकारों का नियमतः नहीं है ,परन्तु कंपनी नियुक्ति पत्र देने का प्रलोभन देकर नाजायज काम पत्रकारों से करा रही है और पत्रकारिता के पेशे को बदनाम कर रही है ।

और तो और, विज्ञापन टारगेट न पूरा करनेवाले संवाददाताओं को अखबार से अलग करने की धमकी दे दी गई है। अपराध की खबरों को छोड़कर अन्य सभी प्रकार की खबरों के प्रकाशन को विज्ञापन से जोड़ दिया गयाहै ।स्थिति यह है कि पूरे दिन संवाददाता खबरों की तलाश से ज्यादा विज्ञापन की तलाश में व्यतीत कर रहेहैं। मजे की बात यह है कि जिला स्तर पर सरकारी पदाधिकारियों और अखबार के माध्यम से अपनी बात कहनेवाले राजनीतिक कार्यकर्ताओंको प्रतिमाह विज्ञापन देने का दवाब दिया जा रहा है ।परिणाम यह है कि बिहार के 38 जिलों में प्रकाशित जिलावार संस्करणों में छपनेवाली खबरों की विश्वसनीयता अब नहीं रह गई है। अखबार के आतंक के कारण जिला स्तर के सरकारी पदाधिकारी,कर्मचारी और राजनीतिक कार्यकर्ता खामोशी से सब कुछ सह रहे हैं।
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार काशी प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से पूरे मामले की छानबीन राज्य की खुफिया एजेंसी से करानेकी मांग की है । उन्होंने सरकार को कहा है कि  पेड न्यूज के प्रचलन की जांच आसानी से की जा सकती है । हिन्दी अखबारों में छपनेवाली खबरों से जुड़ी संस्थाओं के प्रमुख से पूछताछ कर सच्चाई की पुष्टि की जा सकती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि यदि बिहार में पेड न्यूज की बढ़ती प्रवृत्ति पर तुरंत रोक नहीं लगाई जाती है, तो सबसे अधिक नुकसान सरकार को होगा क्योंकि खबरें कुछ वयां करेंगी और सच्चाई कुछ और ही होगी । जमीनी सच्चाई से रूबरू न होनेसे आगामी चुनाव में सरकार को काफी नुकसान भी हो सकता है ।
मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट

Share Button

Relate Newss:

रिपोर्टर आरजू बख्स को इजलास नोटिश से नालंदा पुलिस का उभरा विकृत चेहरा
137 वर्षों में पहली बार, नहीं छपा ‘द हिन्दू’ अखबार
समस्तीपुर में चिमनी मालिक पत्रकार की गोलियों से भून डाला
हिंदी पत्रकारिता दिवस: बिहार में साहित्यिक पत्रकारिता का विकास
इतना तो विश्वास है ही...........
खरखाहीं लूटने चले मीडियाकर्मी को टाटा समूह के चेयरमैन ने दिखाया आयना
रघु'राज की याद दिला रही है यह होर्डिंग, 3 माह बाद भी वही अटके हैं सरकारी बाबू
पत्रकारों ने मांगी छुट्टी तो हिन्दुस्तान के संपादक दिनेश मिश्रा ने दी गालियां !
दैनिक हिन्दुस्तान और प्रभात खबर में एक ही संवाददाता की हुबहू खबर!
नहीं रही दूरदर्शन की वरिष्ठ एंकर नीलम शर्मा, मिली थी नारी शक्ति सम्मान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...