प्रभात खबर को है हिम्मत यह लिखने की ?

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झारखंड-बिहार में भ्रष्टाचार की कोख से प्रकाशित दैनिक प्रभात खबर के स्थानीय संपादक विजय पाठक की निर्मल बाबा से संबंधित समाचार पढा़। मैं किसी भी धर्म-आस्था पर टीका टिप्पणी नहीं करता और सब कुछ जन मानस पर छोड़ देता हूं।
फिलहाल, पाठक ने जिस प्रकार के संदर्भों की चर्चा देकर समाचार लिखा है..निःसंदेह वह उनकी घटिया मासिकता को अधिक उजागर करती है। अगर वे निर्मल बाबा के आडियोलॉजी का थोड़ा सा भी जिक्र करते तो उनका यह समाचार निष्पक्ष कहला सकता था।
विजय पाठक अभी झारखंड की पत्रकारिता का सबसे बड़े बागड़ बिल्ला यानि दैनिक प्रभात खबर के प्रधान संपादक  हरिवंश सिंह की कृपा से दलाली की दुनिया में जमे पड़े हैं। झारखंड में भ्रष्टाचार की गंगोत्री उषा मार्टिन ग्रुप ही प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभात खबर को जाति और वर्गवाद की जमीन पर चला रहा है।
विजय पाठक यदि खुद को एक पत्रकार मानते हैं तो क्या वे उन मूंगे-मोती या सेक्स के कारोबारियों के खिलाफ लिखने का मादा रखते हैं, जो लाखों का उनके अखबार को विज्ञापन देते हैं। क्या उनमें प्रधान संपादक हरिबंश सिंह के उत्थान और वर्तमान के कारनामों को कलमबंद करने की निष्पक्षता दिखाने की जुर्रत हैं। क्या वे उषा मार्टिन ग्रुप जिस तरह से झारखंड को खोखला कर विदेशों तक अपना काला जाल फैला रखी है, उसे जरा सा छुने की भी हिम्मत विजय पाठक में है।

दरअसल, विजय पाठक जैसे लोग पत्रकार नहीं, हरिवंश सिंह जैसे स्वंयभू संपादकों के जेबी दलाल हैं। आज झारखंड की जो वद्दतर हालत हुई है, उनमें ऐसे ही संपादको और उसके ऐसे ही दलालों की गिद्धदृष्टि निहित है। अगर मधु कोड़ा लूट कांड की निष्पक्षता से कलई खोली जाये तो इसकी व्यापक पुष्ठि हो जायेगी कि प्रभात खबर की पत्रकारिता कभी कोठे की वेश्या तो कभी फाइव स्टार होटलों के कॉल गर्ल से अधिक नहीं रही है। यहां हर खबर प्लांटेड छापी जाती रही है और छापी जा रही है।

…..मुकेश भारतीय

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