वन्यजीव संरक्षण के दिशा में सराहनीय है मेनका के कदमः जाजू

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भीलवाडा। पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण संस्था पीपुल्स फॉर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी एवं पर्यावरणविद् बाबू लाल जाजू ने केन्द्रीय मंत्री एवं संस्था की अध्यक्ष मेनका गांधी की अपनी सरकार के विरुद्ध जाकर वन्यजीव संरक्षण के लिए आगे आने पर प्रशंसा करते हुए कहा है कि इस तरह की पहल वन्यजीवों को बचाने में बडी सहायक होगी।

जाजू ने आज यहां बयान जारी कर कहा कि श्रीमती मेनका गांधी ने केन्द्र्र सरकार द्वारा नीलगाय की हत्या की स्वीकृति देने का विरोध एवं अपनी ही सरकार के विरूद्ध जाकर वन्य जीव संरक्षण के लिए आगे आई है, जो एक ऐतिहासिक कदम हैं और इससे वन्यजीव प्रेमियों को सम्बल मिलने के साथ वन्यजीवों को बचाने की प्रेरणा को बढावा मिलेगा।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वोटों की राजनीति के चलते केन्द्र सरकार वन्य जीवों के आवास स्थल जंगलों एवं चारागाह जमीन को बचाने के बजाय पिछले दिनों बिहार, राजस्थान एवं अन्य राज्यों में नीलगाय की हत्या की स्वीकृति के साथ ही हाथी, मोर एवं जंगली सूअर तथा अन्य वन्य जीवों को मारने की स्वीकृति दे रही है जो प्रकृति विनाश की श्रेणी में आता है। जाजू ने कहा कि नीलगाय की आड़ में लुप्त होते वन्य जीवों की हत्या कर उनके मांस को बेचने का धंधा पनप गया हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को नीलगाय के नए आवास स्थल सुरक्षित करने के साथ इनका बधियाकरण करने की योजना बनाने के बजाय नीलगायों को मारने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। जाजू ने कहा कि सरकार की अनदेखी के चलते जंगलों का क्षेत्रफल कम होने से नीलगाय एवं अन्य वन्य जीव भोजन-पानी की तलाश में खेत खलिहानों तथा कस्बों की तरफ आ रहे हैं, जिन्हें कोई भी किसान नहीं मारना चाहता है।

उल्लेखनीय है कि मेनका गांधी ने गत नौ जून को कहा था कि बिहार में आजादी के बाद सबसे बडा वन्यजीवों का संहार हुआ है और पर्यावरण मंत्रालय राज्यों को पत्र लिखकर जानवरों को मारने के बारे में कह रहा हैं। उन्होंने कहा कि पता चला है कि किसी भी राज्य ने जानवरों को मारने की इजाजत नहीं मांगी हैं। उन्होंने कहा कि हाथी और बंदर के बाद अब नीलगायों को मारा जा रहा हैं।

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