लोकतंत्र, बिहार और बिहारियों की विजय है महागठबंधन की जीत :शत्रुघ्न सिन्हा

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बिहार में भाजपा की करारी हार पर सांसद शत्रुघ्न सिन्हा कहते हैं कि यदि चुनाव में उनका सही इस्तेमाल हुआ होता तो पार्टी को फायदा जरूर होता। सिन्हा पिछले कुछ दिनों में कुछ मुद्दों पर पार्टी लाइन से अलग राय व्यक्त की है और उन्हें बिहार के चुनावी प्रचार से दूर ही रखा गया था। 

shatrughan-sinhaउन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने शायद ये ठान लिया था कि हम तो डूबे हैं सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे। मैं तो इस पर दुख ही व्यक्त कर सकता हूं क्योंकि ऐसा कहने वाले लोग अपनी पार्टी के ही हैं।

उन्होंने महागठबंधन की जीत पर लालू यादव, नीतीश कुमार और राहुल गांधी को बधाई दी। वे कहते हैं, “ये लोकतंत्र की, बिहार की और बिहारियों की विजय है। अगर कहा जाए कि इस त्रिमूर्ति ने साबित कर दिया कि ये नीम पर करेला नहीं बल्कि सोने पर सुहागा हैं, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

चुनाव प्रचार से दूर रहने पर उन्होंने कहा, “ये दुखद रहा। जो आदमी दो बार राज्यसभा के बाद लोकसभा से रिकॉर्ड मार्जिन से जीत कर आता है, एक बार नहीं बल्कि दो बार, जिसके फॉलोअर्स हैं, प्रशंसक हैं, समर्थक भी हैं, उसे दुख नहीं पहुंचेगा?

सिन्हा ने कहा, “प्रतिक्रिया तो कुछ हो सकती है। मैं ऐसा नहीं कहता हूं कि मेरा सदुपयोग किया होता, मेरा इस्तेमाल किया होता तो बहुत बेहतर परिणाम होते। लेकिन हां, परिणाम पहले से बेहतर होता। कुछ सीटों का इजाफा तो जरूर होता।

उन्होंने ये भी माना कि प्रधानमंत्री मोदी को चुनावी अभियान की सही ब्रीफिंग करने में भी गलती हुई। “हमारे प्रधानमंत्री डैशिंग, डायनैमिक एक्शन हीरो हैं। उनको शायद चुनाव में हमने सही ब्रीफिंग नहीं दी। और इस तरह से गांव गांव और कस्बों में उतारा कि वो हमारे सुप्रीम लीडर हैं। अगर हमने उनका सही तरह से इस्तेमाल किया होता, तो बेहतर होता और पार्टी को और बल मिलता।

मोदी के आक्रामक चुनाव प्रचार पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “अगर उन्होंने इतनी एनर्जी से आक्रामक कैम्पेनिंग नहीं की होती, तो शायद बिहार में हमारी उतनी सीटें भी नहीं आती जितनी अभी आईं। लेकिन जिस तरह से उनको पूरे बिहार में दौरा कराया गया, वो ठीक नहीं था। हम लोग थे ना। उनका बोझ थोड़ा बांट सकते थे हम लोग। हमें लगाना चाहिए था इस काम में।

शत्रुघ्न सिन्हा का आखिर में यही कहना था कि ‘क्योंकि राजनीति के कैलेंडर में कोई आखिरी तारीख नहीं होती,’ इसलिए अब वक्त आ गया है कि पूरी स्थिति की समीक्षा की जाए, आत्मनिरीक्षण किया जाए और फिर पार्टी को और मजबूत किया जाए।

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